धान खरीदी में महाघोटाला: शासन–प्रशासन को तमाचा, मंत्री की नाक के नीचे लूट
77 लाख का गबन उजागर, विभाग की खुलेआम छीछालेदर
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला — यह खबर नहीं, बल्कि शासन, प्रशासन और जिम्मेदार मंत्री के मुंह पर करारा तमाचा है। मंडला जिले में धान खरीदी के नाम पर जो हुआ, उसने पूरी सहकारिता और खाद्य विभाग की पोल नंगा कर दी है। किसानों की मेहनत पर डाका डालकर बैठा सिस्टम तब तक सोता रहा, जब तक 77 लाख से ज्यादा का खुला गबन सामने नहीं आ गया।

किसानों से वसूली, अफसरों की चुप्पी
जिले के अधिकांश धान खरीदी केंद्रों में समितियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की खुली तानाशाही चलती रही।
तुलाई के नाम पर पैसे,
पोर्टल एंट्री के नाम पर रिश्वत,
नहीं देने पर किसानों की धान रोकी जाती रही।
मीडिया ने बार-बार आवाज उठाई, किसानों ने गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन और विभाग कुंभकर्णी नींद में पड़े रहे। सवाल साफ है—जब लूट हो रही थी तब अफसर कहां थे?
शासन के आदेश रौंदे गए
शासन ने धान खरीदी की अंतिम तिथि 20 जनवरी 2026 तय की थी, लेकिन भुआ बिछिया विकासखंड के दानीटोला केंद्र में
21 जनवरी तक अवैध खरीदी चली,
पोर्टल बंद होने के बाद भी तुलाई कराई गई,
बिना तौले धान को सिस्टम में चढ़ा दिया गया।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित अपराध है।
मंत्री के जिले में बेलगाम सिस्टम
सबसे शर्मनाक तथ्य यह है कि यह सब मंत्री के ही जिले में हुआ।
जहाँ से संदेश जाना चाहिए था कि “भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं”, वहाँ से संदेश गया—
“लूटो, कोई पूछने वाला नहीं।”
जांच में फूटा भ्रष्टाचार का फोड़ा
पत्रकारों के दबाव के बाद जब प्रशासन मजबूरन हरकत में आया, तो जांच अधिकारी रश्मि गौतम की रिपोर्ट ने
पूरे विभाग की इज्जत मिट्टी में मिला दी।
3277 क्विंटल धान गायब,
दर ₹2369 प्रति क्विंटल,
कुल गबन ₹77,63,686।
यह आंकड़ा नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत का खून है।
जिम्मेदार कौन?
नाम भी सामने हैं—
समिति प्रबंधक हेतेश कुडापे,
केंद्र प्रभारी समारू उइके,
कंप्यूटर ऑपरेटर सुनील नेताम, सुखमेन मार्को,
सर्वेयर शुभांश परतेति,
केशव अहिरवार।
अब सवाल यह नहीं कि कौन दोषी है, सवाल यह है कि
इनके ऊपर किसका हाथ है?
प्रशासन की साख कटघरे में
एक केंद्र में 77 लाख का गबन, और जिला प्रशासन को भनक तक नहीं—
यह सीधे-सीधे निगरानी तंत्र की विफलता और संरक्षण की बू देता है।
अगर पत्रकार सामने न आते, तो क्या यह घोटाला कभी उजागर होता?
अब आर-पार की मांग
सभी धान खरीदी केंद्रों का विशेष ऑडिट
दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी
गबन की राशि की रिकवरी
जिम्मेदार अफसरों पर भी निलंबन व FIR
अब यह देखना बाकी है कि
क्या मंत्री और प्रशासन इस तमाचे को महसूस करेंगे,
या फिर एक और घोटाला फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?
किसान पूछ रहा है—
“हम अन्नदाता हैं या सिस्टम के लिए सिर्फ लूट का साधन?”