*बिछिया–दानीटोला सड़क बनी घटनाक्रम का रास्ता, बढ़ता आवागमन और सिमटी सड़क प्रशासन की उदासीनता उजागर

दैनिक रेवांचल टाइम्स-मंडला बिछिया–दानीटोला मार्ग आज क्षेत्र में लगातार हो रही दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। वर्षों पुरानी इस सड़क पर आवागमन का दबाव कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन सड़क की चौड़ाई आज भी वही है, जो दशकों पहले प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत बनाई गई थी। समय बदला, जरूरतें बदलीं, लेकिन सड़क नहीं बदली।
स्थानीय लोगों के अनुसार बीते वर्षों में इस मार्ग पर वाहनों की संख्या लगभग दस गुना तक बढ़ गई है। दोपहिया वाहन, चारपहिया, भारी वाहन और पैदल यात्री—सभी इसी संकरी सड़क पर मजबूर हैं। नतीजा यह है कि यह मार्ग अब सुविधा नहीं, बल्कि स्थायी खतरे का प्रतीक बन चुका है। आए दिन यहां छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई बार गंभीर चोटें और जानलेवा हालात सामने आ चुके हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि सड़क की वास्तविक स्थिति से प्रशासन भली-भांति अवगत होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न तो सड़क चौड़ीकरण की दिशा में पहल दिखाई देती है और न ही यातायात सुरक्षा के प्रभावी उपाय नजर आते हैं। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है—क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदार जागेंगे?
बिछिया–दानीटोला मार्ग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है। ऐसे में इसकी उपेक्षा केवल विकास को नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जान को भी जोखिम में डाल रही है। स्थानीय जनता लंबे समय से सड़क चौड़ीकरण और सुरक्षा उपायों की मांग कर रही है, लेकिन यह मांग अब तक फाइलों में ही दबी हुई है।
वही प्रशासन को चाहिए कि वह संभावित हादसों का इंतजार करने के बजाय तत्काल सड़क की क्षमता के अनुरूप सुधार कार्य शुरू करे। अन्यथा यह मार्ग यूं ही लापरवाही, देरी और संवेदनहीनता का प्रतीक बना रहेगा—और इसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ेगी।

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