सॉची मिल्क पार्लर घोटाला 75 हजार जमा कर हितग्राहियों को ठगा, एक साल बाद भी गुमटी का अता-पता नहीं!

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दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला । सरकारी योजनाओं की आड़ में गरीबों की मेहनत की कमाई लूटने का खेल कब तक चलेगा? मंडला जिले में सॉची मिल्क पार्लर योजना के तहत हितग्राहियों से 75 हजार रुपये ऐंठ लिए गए, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उन्हें गुमटी (कियोस्क) नहीं मिली। यह सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और उदासीनता का जीता-जागता सबूत है, जहां गरीबों के रोजगार के सपने कुचले जा रहे हैं। हितग्राही अब भी न्याय की राह ताक रहे हैं, लेकिन अधिकारी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़कर बच निकलने की जुगत में लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, न्यालय कलेक्टर नजूल मंडला ने 17 मई 2024 को पत्र क्रमांक 91 के माध्यम से सॉची मिल्क पार्लर संचालन के लिए 11 स्थानों पर अनुमति प्रदान की थी। उप संचालक पशु पालन एवं डेयरी विभाग, मंडला के पत्र क्रमांक 1367/टीएल/2023-24 दिनांक 27 दिसंबर 2023 का हवाला देते हुए यह फैसला लिया गया। हितग्राहियों से फॉर्म भरवाकर 75 हजार रुपये जबलपुर सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित के खाता क्रमांक 10462391143 में जमा कराए गए। लेकिन पैसा जमा हुए पूरे एक साल हो चुके हैं, और न तो गुमटी मिली है और न ही रकम वापस। यह सीधे-सीधे धोखाधड़ी का मामला है, जहां सरकारी योजना के नाम पर गरीबों को ठगा जा रहा है!
जब इस मुद्दे की पड़ताल की, तो पशु पालन एवं डेयरी विभाग के उप संचालक यू.एस. तिवारी से बात की। उन्होंने प्रभारी दुग्ध शीत प्रतिमा ताम्रकार को फोन कर बुलाया और सवाल किया कि आखिर हितग्राहियों को गुमटी क्यों नहीं मिल रही? ताम्रकार का जवाब चौंकाने वाला था- “सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित जबलपुर गुमटी लगवाने में रुचि नहीं ले रहा है। मैंने हितग्राहियों को जबलपुर मैनेजर का फोन नंबर दे दिया है, वे चाहें तो अपना पैसा वापस ले सकते हैं।” यह कितनी शर्मनाक बात है! क्या सरकारी अधिकारी सिर्फ फोन नंबर देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेंगे? हितग्राही एक साल से रोजगार शुरू करने की उम्मीद में बैठे हैं, शर्तें पूरी कीं, पैसा जमा किया, लेकिन बदले में मिला सिर्फ धोखा और निराशा।
इस संबंध में जब कलेक्टर सोमेश मिश्रा से बात की, तो उन्होंने कहा, “मुझे इसकी जानकारी नहीं है। कोई आवेदन भी नहीं आया। आपने बताया है तो मैं जबलपुर सहकारी संघ से बात करूंगा कि पैसा जमा होने के बाद गुमटी क्यों नहीं दी जा रही?” कलेक्टर साहब, क्या गरीबों की आवाज आपके कानों तक पहुंचने के लिए मीडिया की जरूरत पड़ती है? यह सरकारी सिस्टम की नाकामी है, जहां उच्चाधिकारी तक मुद्दे पहुंचते ही नहीं। हितग्राहियों ने जबलपुर सहकारी दुग्ध संघ के विपणन मैनेजर चंद्रभान भलावी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन नहीं उठता। पहले उठाते थे तो कहते थे “प्रक्रिया चल रही है”, लेकिन अब सन्नाटा। क्या यह संगठित ठगी नहीं है?
वही मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिले में जहां बेरोजगारी चरम पर है, ऐसी योजनाएं गरीबों के लिए वरदान हो सकती थीं। लेकिन लालफीताशाही और अधिकारियों की मिलीभगत ने इसे अभिशाप बना दिया। हितग्राही अब गुमटी मिलने की आस में बैठे हैं, ताकि वे अपना व्यवसाय शुरू कर परिवार चला सकें। स्वदेश मांग करता है कि तत्काल जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और हितग्राहियों को या तो गुमटी दी जाए या पैसा ब्याज समेत वापस। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह सरकारी तंत्र पर एक और कलंक होगा। क्या प्रशासन जागेगा या गरीबों की चीखें अनसुनी रहेंगी?

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