मजाक बनी अमृत–2 योजना, पाइप लाइन बिछाने में भारी भ्रष्टाचार के आरोप

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रेवांचल टाइम्स जुन्नारदेव नगर में अमृत–2 योजना के अंतर्गत चल रहे पाइप लाइन बिछाने के कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। योजना का उद्देश्य जहां आम नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, वहीं ठेकेदार की मनमानी और नगर पालिका परिषद की संदिग्ध चुप्पी के चलते यह योजना अब मजाक बनती नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाइप लाइन डालने के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। नियमों के अनुसार पाइप लाइन कम से कम 1 मीटर गहराई में डाली जानी चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर बिना समुचित खुदाई के ही पाइप डाल दिए गए हैं।
इतना ही नहीं, पाइप डालने से पहले और बाद में आवश्यक रेत या मुरम (मोरम) का उपयोग भी नहीं किया जाना चाहिए जो नहीं किया जा रहा है। जबकि मानकों के अनुसार पाइप के नीचे, ऊपर और आजू-बाजू रेत या मुरम की फीलिंग अनिवार्य होती है, ताकि भविष्य में पाइप लीकेज या जॉइंट टूटने जैसी समस्याएं न हों।
जानकारों ने बताया कि सही प्रक्रिया में पहले खुदाई, फिर सफाई, उसके बाद मुरम डालकर पानी डालना, धुम्मस (कम्पैक्शन) करना और अंत में पाइप डालना शामिल है। लेकिन ठेकेदार द्वारा अब तक कहीं भी इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। अधिकतर जगहों पर सीधे जमीन में पाइप डालकर मिट्टी से ढक दिया जा रहा है, जो आने वाले समय में बड़ी तकनीकी और आर्थिक समस्या बन सकता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे मामले पर नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। न तो मौके पर निरीक्षण किया जा रहा है और न ही ठेकेदार पर कोई कार्रवाई होती दिखाई दे रही है। नगरवासियों ने मांग की है कि अमृत–2 योजना के कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि जनता के पैसों से बनी योजना का लाभ वास्तव में जनता तक पहुंच सके।

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