बिछिया के दानीटोला धान खरीदी केंद्र में 77 लाख से अधिक का घोटाला, 7 आरोपियों पर FIR दर्ज
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।मंडला जिले के बिछिया विकासखंड अंतर्गत दानीटोला स्थित धान खरीदी केंद्र में हुए बड़े भ्रष्टाचार के मामले में आखिरकार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 7 जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। यह मामला शासन के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना और करोड़ों की धान खरीदी में गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है।
शासन द्वारा प्रदेशभर में धान खरीदी की अंतिम तिथि 20 जनवरी 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन इसके बावजूद दानीटोला खरीदी केंद्र में 21 जनवरी 2026 तक अवैध रूप से धान खरीदी जारी रखी गई। सूत्रों के अनुसार, पोर्टल बंद होने के बाद भी अधिकारियों की मिलीभगत से धान की तुलाई कराई जाती रही, जो सीधे-सीधे शासन के आदेशों का उल्लंघन है।
बिना तुलाई के पोर्टल में चढ़ाई गई धान
केंद्र परिसर में किसानों की हजारों क्विंटल धान बिना तुले पड़ी हुई थी, वहीं आरोप है कि बिना वास्तविक तुलाई किए ही धान को पोर्टल में दर्ज कर लिया गया। इस पूरे प्रकरण ने सहकारिता समितियों की मनमानी और भ्रष्ट कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया।
पत्रकारों की सक्रियता से खुला मामला
बिछिया के पत्रकारों द्वारा इस गंभीर अनियमितता को उजागर कर खबरों के माध्यम से जिला प्रशासन को अवगत कराया गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और तत्काल जांच शुरू की गई।
3277 क्विंटल धान कम, 77 लाख से अधिक की वित्तीय हानि
जांच के दौरान आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, क्रमांक-1, क्रमांक-2 एवं राज्य लक्ष्मी वेयरहाउस दानीटोला में की गई खरीदी की पड़ताल की गई।
जांच अधिकारी रश्मि गौतम द्वारा की गई जांच में 3277 क्विंटल धान कम पाई गई, जिसकी सरकारी दर ₹2369 प्रति क्विंटल के हिसाब से ₹77,63,686 (77 लाख 63 हजार 686 रुपये) की राशि का गबन सामने आया।
7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज
मामले में दोषी पाए जाने पर घुघरी थाना में निम्नलिखित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई—
हेतेश कुडापे – समिति प्रबंधक
शशि सिंह ठाकुर – प्रशासक
समारू उइके – केंद्र प्रभारी
सुनील नेताम – कंप्यूटर ऑपरेटर
सुखमेन मार्को
शुभांश परतेति – सर्वेयर
केशव अहिरवार
इन सभी के विरुद्ध नियम अनुसार कार्रवाई हेतु कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा गया, जिसके आधार पर पुलिस ने आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। आगे की जांच एवं कार्रवाई जारी है।
सवालों के घेरे में सहकारिता व्यवस्था
यह मामला न केवल धान खरीदी व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करता है कि पोर्टल बंद होने के बाद खरीदी कैसे होती रही और इतने बड़े घोटाले पर अब तक निगरानी क्यों नहीं हुई।