परसवाड़ा में संकल्प से समाधान’ शिविर बेअसर

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ग्रामीण समस्याएं अनसुलझी, आवेदनों का निराकरण लंबित

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में जन समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए चलाए जा रहे विभिन्न सरकारी कार्यक्रम अपनी उपयोगिता साबित करने में नाकाम सिद्ध हो रहे हैं। जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन जैसे माध्यम पहले ही अप्रभावी हो चुके हैं, वहीं अब ‘संकल्प से समाधान’ शिविर भी ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा। जिले की नैनपुर तहसील अंतर्गत ग्राम परसवाड़ा में हाल ही आयोजित शिविर इसका ताजा उदाहरण है, जहां उपसरपंच अश्वनी पडवार द्वारा दिए गए आवेदनों का अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
सूत्रों के अनुसार, उपसरपंच ने शिविर में दो आवेदन पत्र सौंपे थे। पहला आवेदन जल जीवन मिशन के तहत गांव में नल जल योजना शुरू करने से संबंधित था, जबकि दूसरा आवेदन ग्राम की विभिन्न मूलभूत समस्याओं पर केंद्रित था। इसमें हनुमान मंदिर स्थित पुराने रंगमंच की मरम्मत, ग्राम पंचायत भवन की मरम्मत, तालाबों का गहरीकरण और नए तालाबों का निर्माण, शासकीय कुओं की सफाई एवं मरम्मत, सभी सरकारी भवनों की मरम्मत व रंग-रोगन, स्कूल में बाउंड्री वॉल का निर्माण, माध्यमिक शाला भवन या अतिरिक्त कक्षों का निर्माण तथा खेल मैदान समेत कई मांगें शामिल थीं।
हालांकि, इन आवेदनों का निराकरण अभी तक नहीं हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिविर की सूचना सही ढंग से नहीं दी गई। कोटवार के माध्यम से गलत मुनादी कराई गई, जिसमें गिरदावरी के नाम पर लोगों को बुलाया गया, जबकि कार्यक्रम ‘संकल्प से समाधान’ के तहत था। इससे अधिकांश ग्रामीण अपनी समस्याओं से जुड़े आवेदन जमा नहीं कर सके। कार्यक्रम के प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक परिवार से संपर्क कर आवेदन लेने की व्यवस्था है, लेकिन यहां इसका पालन नहीं किया गया।
सूत्रों ने आगे बताया कि आवेदन पत्रों को ग्राम सचिव द्वारा जनपद पंचायत कार्यालय नैनपुर में जमा नहीं किया गया है और न ही संबंधित पोर्टल पर इन्हें दर्ज किया गया। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच की मांग की है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। उन्होंने कहा कि परसवाड़ा में दिए गए आवेदनों का अनिवार्य रूप से निराकरण किया जाए, ताकि गांव की मूलभूत जरूरतें पूरी हो सकें।
जिला प्रशासन से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों की सफलता तभी संभव है जब उनकी जानकारी और क्रियान्वयन पारदर्शी हो। यह घटना मंडला जिले में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाती है।

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