मंडला में सांड बेलगाम, नगरपालिका बेहोश! सड़कों चोराहो पर सींगों का राज, दफ्तरों में कुर्सियों की नींद

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दैनिक रेवाँचल टाईम्स- मंडला।मंडला नगर सहित पूरे जिले में आवारा पशुओं का आतंक से अब आम नागरिकों का घर से निकला सड़को में चलना दूभर होता जा रहा हैं, और रोज़मर्रा का खतरा बन चुका है। शहर की गली चोबरो और सड़कों पर सांड और बैल बेखौफ होकर धमा-चौकड़ी मचा रहे हैं, लेकिन लापरवाह नगर पालिका प्रशासन और जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में लीन नजर आ रहे हैं।
लालीपुर बिंझिया क्षेत्र हो या शहर का व्यस्त इलाका—हर सड़क मानो सांडों की निजी जागीर बन चुकी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आए दिन इन साँड़ो के वर्चस्व की लड़ाई सड़को में देखने को मिल रही हैं पहले भी तहसील कार्यालय के ठीक सामने एक सांड दुकान में घुस गया, वहीं बुधवारी बाजार में एक नागरिक को घायल कर दिया गया। सवाल यह नहीं कि हादसे क्यों हो रहे हैं, सवाल यह है कि कितने हादसों के बाद नगरपालिका जागेगी?
या फिर नगरपालिका प्रशासन के जिम्मेदारों को गहरी नी द से जगाने के लिए कौन सा उपाय करना होगा जहाँ जानता की जान बच सके और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि आवारा पशुओं को व्यवस्थित रूप से गौशालाओं में रखा जाए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फाइलें चल रही हैं और सांड दौड़ रहे हैं।
पूर्व में कलेक्टर द्वारा इस समस्या के समाधान के प्रयास जरूर किए गए थे, लेकिन सरकारी तंत्र की सुस्ती और लापरवाही ने उन प्रयासों पर पानी फेर दिया।
आज हालात यह हैं कि
सड़कों पर सांड, सड़को में चोराहो और
बाजारों में भय,
नागरिक घायल,
और जिम्मेदार अधिकारी “बेहोशी” की हालत में!
नागरिकों में भारी आक्रोश है और यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
जनता की स्पष्ट मांग है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान ले और केवल निर्देश नहीं, परिणामकारी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
वरना आने वाले दिनों में मंडला की पहचान
“संस्कारों की नगरी” से ज्यादा
“सांडों और आवारा कुत्तो की राजधानी” के रूप में न हो जाए!

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