व्रती नगरी पिंडरई में मुनिदेव का भव्य मंगल प्रवेश, श्रद्धालुओं ने किया आत्मीय स्वागत
मंडला। जैन धर्म की परंपरा में अत्यंत पवित्र माने जाने वाले चातुर्मास के लिए आचार्य भगवन श्रीविद्यासागरजी महाराज एवं विद्या शिरोमणि श्रीसमयसागरजी महाराज के मंगल आदेश से शनिवार को पिंडरई नगर में पूज्य मुनि श्री नीरसागरजी एवं मुनि श्रीनित्यसागरजी का मंगलमय प्रवेश हुआ।
शहर के प्रवेश मार्ग पर श्रद्धालुओं ने भक्ति और उल्लास के साथ संतों की अगवानी की। ढोल, बैंड, रथ, शंख और मंत्रोच्चार के साथ नगरवासियों ने मुनियों का स्वागत किया। समूचा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।
संतों का नगर आगमन न केवल धार्मिक महत्त्व रखता है, बल्कि यह समाज में नैतिक मूल्यों और संयम की प्रेरणा भी देता है। जैन समाज के पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने बताया कि मुनिदेव का चातुर्मास नगर में होना नगरवासियों के लिए सौभाग्य की बात है। उनके प्रवचनों और सान्निध्य से समाज में नई चेतना का संचार होगा।
शालीनता से सजे इस मंगल प्रवेश समारोह में महिला, पुरुष, बच्चे सभी उत्साह से शामिल हुए। जैन समाज के साथ अन्य समुदायों के लोगों ने भी मुनिदेव के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।