अंत्योदय की प्रतिबद्ध प्रतिनिधि एवं विचाराधारित राजनीति का सशक्त स्वर : डॉ. लता वानखेड़े दीदी

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दैनिक रेवांचल टाइम्स भोपाल/ भारतीय लोकतंत्र केवल शासन-व्यवस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म की निरंतर साधना है। इस साधना में वही नेतृत्व स्थायी प्रतिष्ठा अर्जित करता है, जो विचार, संगठन और सेवा को जीवन-व्रत बना ले। सागर संसदीय क्षेत्र की लोकप्रिय सांसद तथा भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश महामंत्री डॉ. लता वानखेड़े दीदी का सार्वजनिक जीवन इसी अनुशासित, राष्ट्रनिष्ठ साधना का तेजस्वी उदाहरण है।

पंच के रूप में प्रारंभ हुई उनकी यात्रा जनजीवन की वास्तविक धड़कनों से जुड़ी रही। तीन बार निर्वाचित सरपंच के रूप में उन्होंने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व वंशानुगत विशेषाधिकार नहीं, बल्कि अर्जित विश्वास का प्रतिफल होता है। ग्रामसभा की सरल भूमि से लेकर संसद के गरिमामय प्रांगण तक उनका उत्क्रमण इस सत्य का प्रमाण है कि परिश्रम, प्रतिबद्धता और जनसेवा ही जनादेश की वास्तविक आधारशिला हैं।

दीदी ने प्रत्येक दायित्व को केवल पद नहीं, बल्कि दायित्वबोध के रूप में स्वीकार किया। मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने व्यवस्था को संवेदनशीलता का स्पंदन दिया और न्याय की प्रक्रिया को मानवीय गरिमा से जोड़ा। महिला मोर्चा के नेतृत्व में उन्होंने नारी शक्ति को संगठनात्मक आत्मविश्वास प्रदान किया, वहीं संभाग संगठन मंत्री के रूप में कार्यकर्ताओं के मध्य समन्वय, अनुशासन और सक्रियता की सुदृढ़ शृंखला निर्मित की।

उनकी कार्यशैली में दूरदर्शिता की स्पष्टता, निर्णय की दृढ़ता और व्यवहार की गरिमा साथ-साथ चलती है। वे उत्तरदायित्व को अवसर में और अवसर को परिणाम में रूपांतरित करने की अद्भुत क्षमता रखती हैं। यही क्षमता उन्हें केवल एक नेतृत्वकर्ता नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत बनाती है।

डॉ. लता वानखेड़े दीदी के व्यक्तित्व में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अनुशासनपरक संगठन चेतना स्पष्ट परिलक्षित होती है। संघ की परंपरा व्यक्ति-निर्माण से राष्ट्र-निर्माण की है, और यही संस्कार उनके निर्णयों में झलकते हैं। वे व्यक्तिपरक आग्रहों से ऊपर उठकर समष्टिगत हित को प्राथमिकता देती हैं। उनका प्रत्येक प्रयास संगठन को आधार से सुदृढ़ करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने के संकल्प से प्रेरित है।

पं. दीनदयाल उपाध्याय जी द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद की अंत्योदय भावना उनके कार्यों में सजीव रूप में दृष्टिगोचर होती है। विकास उनके लिए केवल भौतिक संरचना नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवीय गरिमा का विस्तार है। महिला सशक्तिकरण की संस्थागत पहल हो या संगठन का ग्रामोन्मुख विस्तार—हर क्षेत्र में उत्तरदायित्व और संवेदना का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है।

उनकी वाणी और आचरण में भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की समन्वयी राष्ट्रीयता की प्रेरक छाया दृष्टिगोचर होती है। वे दृढ़ हैं, किंतु दुराग्रही नहीं; स्पष्ट हैं, किंतु कठोर नहीं; प्रभावशाली हैं, किंतु आडंबरहीन हैं। वे असहमति को संवाद में रूपांतरित करने की क्षमता रखती हैं और समर्थन को अधिकार नहीं, दायित्व मानती हैं। यही संतुलन उन्हें परिपक्व और विश्वसनीय राष्ट्रीय नेतृत्व का स्वरूप प्रदान करता है।

प्रदेश महामंत्री के रूप में उनका दायित्व केवल संगठनात्मक संचालन नहीं, बल्कि संगठनात्मक ऊर्जा का जागरण है। वे शीर्ष-केन्द्रित नेतृत्व की अपेक्षा आधार-सशक्त सहभागितामूलक दृष्टि में विश्वास रखती हैं। तीन बार सरपंच के रूप में अर्जित जनविश्वास और प्रांत स्तर पर संगठन का मार्गदर्शन इस तथ्य को पुष्ट करता है कि उनका नेतृत्व जड़ों से पोषित है।

समकालीन राजनीति के शोर में जहाँ तात्कालिक लोकप्रियता को स्थायी उपलब्धि मान लिया जाता है, वहाँ डॉ. लता वानखेड़े दीदी का जीवन यह संदेश देता है कि स्थायित्व विचार, अनुशासन और सेवा से निर्मित होता है। उनकी राजनीति संघर्षशील है, पर संयमित; दृढ़ है, पर मर्यादित; सत्ता से जुड़ी है, पर सेवा से संचालित।

ऐसा नेतृत्व समाज को विभाजित नहीं करता, उसे संगठित करता है। वह केवल शासन नहीं करता, दिशा भी देता है। डॉ. लता वानखेड़े दीदी का व्यक्तित्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठन-निष्ठा, पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की अंत्योदय दृष्टि और अटल बिहारी वाजपेयी जी की समावेशी राष्ट्रचेतना का समन्वित आलोक है। यही आलोक उन्हें समकालीन भारतीय राजनीति में एक प्रेरक, सुदृढ़ और विश्वसनीय राष्ट्रीय हस्ताक्षर के रूप में प्रतिष्ठित करता है।

उनके जन्मदिवस के शुभ अवसर पर हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, आत्मदीप्ति, सुदीर्घायु और राष्ट्रसेवा की अक्षय ऊर्जा प्राप्त होती रहे। श्री रामलला से कामना है कि उनका जीवन राष्ट्रसेवा की अखंड साधना में निरंतर आलोकित रहे और उनका नेतृत्व सागर सहित समस्त प्रदेश को विकास, समृद्धि और गौरव के नवीन शिखरों तक पहुँचाता रहे।

अशेष शुभेच्छाएँ एवं अभिनंदन। 💐

 

 

✍🏻लेखक

शैलेन्द्र सिंह रघुवंशी ‘अधिवक्ता’

(मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय)

कार्यालय : मानसरोवर कॉम्प्लेक्स, भोपाल (म.प्र.)

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