मंत्री के जिले में वॉशबेसिन-नलों तक में भ्रष्टाचार, मासूमों के हिस्से का पानी भी हड़पा

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घोटाले के शहर में एक और नया घोटाला बच्चों के पीने के पानी और वासवेसिन में विभाग और ठेकेदार ने जम के मचाई लूट

रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी जिला मंडला को अब लोग ग़बन घोटाले भ्रष्टाचार के जिले से जानने लगे है जहाँ किसी अन्य जिलों में जब मंडला जिले की बात होती है कहा जाता है कि वही जिला जहाँ पर रोज पेपर और चैनलों में भ्रष्टाचार ग़बन सरकारी धन की लूट और निक्कमे जनप्रतिनिधियों जिला प्रशासन के बारे मीडिया रोज रोज उछाल रही है पर कुछ नही होता है सब के सब आँखे बंद कर जेब भरने में ध्यान दे रहे है जहाँ पर आम जनता का बुरा हाल और जनता लाचार है और अधिकारी कर्मचारी ठेकेदार मालामाल हो रहें है विकास के नाम पर सरपंच से लेकर विधायक के रिश्तेदार ठेकेदार बन बैठे है और फर्जी एजेन्सी बनाकर फर्जी बिल लगा लगा कर ग़रीबो की योजनाओं में लूट मंचा रखी है और जिले में एक और नया घोटाला सामने आया है जहाँ पर अब भ्रस्टाचारियो ने बच्चों तक को नही बक्श रहे हैं। धन्य वह जिला और धन्य है उस जिले के निवासी और धन्यवाद उस जिले के विधायक सांसद मंत्री और जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को जो भ्रष्टाचार ग़बन घोटाला और जिम्मेदार अधिकारियों के पद के दुरुपयोग कर सरकारी धन को अपना धन कर लूट रहे हैं।


वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दिनों मंडला जिले की मंत्री श्रीमति संम्पत्तिया उइके के जिले में जम के घपले बाजी हो रही है और माननीय जिस विभाग की मंत्री उस विभाग में भ्रस्टाचार ग़बन के अजब गजब घोटाले और कमीशन बाजी चल रही हैं और विभाग उन घपलों को छुपाने लीपापोती करने में लगा हुआ हैं।
वही जल जीवन मिशन योजना के रिट्रो फिटिंग योजना में जम के किया घोटाला सूचना के अधिकार की जानकारी में हुआ खुलासा योजना में विभाग के अधिकारियों उपयंत्री और ठेकेदारों ने मिलकर कमाया करोड़ो अधिकारियों के करोड़ो का कमीशन से बनाई बेनामी संम्पति परिवार के नाम पर करोड़ो के किया जमीन मकान महंगी मँहगी ली गाड़ियां

मध्यप्रदेश में मंडला जिला हमेशा से सुखियों में रहा है। ओर कहावत भी है, की मंडला में अधिकारी और कर्मचारी थैला या फिर एक अटेची लेकर आते है। ओर इस जिले में बैठे कर करोड़ो की संपति बना कर ट्रक भर भर कर माल छान कर चले जाते है। और सब मुख़बधित बन देखते रहते है इस जिले में गरीब और गरीब हो रहे है और रसूखदार तेजी से दिन दुगनी रात चौगनी तरक़्क़ी कर रहे चाहे वह अधिकारी वर्ग हो या फिर ठेकेदार हो सब मालामाल हो रहे है और प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार इस जिले को आजादी के बाद से पिछड़ा जिला मान कर अन्य जिलो से अत्यधिक राशि और योजनाएं क्रियान्वयन कर रही है पर चोर लुटेरे डकैत हर कदम कदम में बैठे है इसी तर्ज पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के कार्यपालन यंत्री मनोज भास्कर और विभाग के रिटायर एसडीओ राजकुमार रंगारे उपयंत्री राजकुमार उइके भुनेश्वर गौतम और अन्य कर्मचारियों के द्वारा योजना को ठेकदार के साथ मिलकर ऐसा कमाल किया कि प्रदेश में हड़कंप मच गया है। खैर जो भी हो मगर अधिकारी और ठेकेदारों ने मिलकर करोड़ो का मॉल अंदर कर लिया है। और शासन और जनता के पेसो से संपति खरीद रहे है।

क्या है। मामला

मध्यप्रदेश स्तर पर 100दिन की कार्ययोजना के तहत जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्राथमिक स्कूल आंगनबाड़ी एवं अन्य संस्थानों में पेय जल व्यवस्था हेतु जल उपलब्ध करने की योजना मध्यप्रदेश शासन से स्वीकृत थी। मगर विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर ऐसा खेल खेला कि बिना टेंडर की प्रक्रिया के बिना ही सारा मॉल अधिकारी उपयंत्री और ठेकेदारों ने गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य और अधिक लागत दिखा कर शासन से पूरा पैसा आहरण कर लिया वही मुख्यआभियंत के आदेश में टेंडर प्रकिया का पालन करने का स्पष्ट आदेश उललेख है। मगर मंडला जिले के कार्यपालन यंत्री मनोज भास्कर के द्वारा ने कागजों में खेल खेला कि बिना टेंडर के ही कार्य करवा कर ठेकेदारों का पूरा भुगतान कर दिया गया और जानकारी के अनुसार स्वयं का कमीशन भी लिया है। वहीं इसी प्रकार संपूर्ण जिले में रिट्रोफिटिंग योजना का बंदरबाट किया गया है।

जल जीवन मिशन योजना में अधिकारी और उपयंत्री ने बनाई परिवार के नाम पर करोड़ो की संपति

गोपनीय जानकारी के अनुसार पीएचई विभाग के अधिकारी कार्यपालन अधिकारी मनोज भास्कर ने नागपुर में संपति क्रय की है। और परिवार के नाम संपत्ति क्रय की है। वहीं नैनपुर एसडीओ राजकुमार उईके स्वयं 27 लाख के वाहन से सफर करते है। परिवार के पास और नाम पर कितनी संपति है। वो जांच के बाद जो सरकारी धन में कमीशन बाजी का खुलासा होगा जिसमें कार्यपालन यंत्री सहित उपयंत्री भुनेश्वर गौतम और रिटायर एसडीओ सतीश कुमार रंगारे भी कम नहीं है। इन अधिकारियों ने मिलकर 10 करोड़ो का कमीशन खेल खेला और वर्तमान में सभी के पास परिवार के नाम पर करोड़ो की संपत्ति और लक्जरी वाहन है। वहीं विभाग अगर जांच करवाता है। तो आय से अधिक संपत्ति का खुलासा होगा मगर जिला प्रशासन है। मोन साधना में बैठा हुआ है। जनता प्रशासन से मांग करती है। ऐसे अधिकारियों की जांच होनी चाहिए

देखना है। की क्या अधिकारियों पर होगी कार्यवाही

पीएचई विभाग के अधिकारी पर 10 करोड़ रुपए कमीशन का आरोप भी हैं। इस पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग प्रमुख अभियंता (ईएनसी) से भी शिकायत की गई है। मगर आज तक कोई कार्यवाही नहीं होना संदेश होता है। वहीं प्रमुख अभियंता कार्यालय ने सभी मुख्य अभियंता पीएचई और परियोजना निदेशक मप्र जल निगम को इस मामले में पत्र लिखकर शिकायत दर्ज करवाई है। निर्देश में कहा गया कि भारत सरकार ने राज्य के जल जीवन मिशन को उच्च स्तर की जांच की जाय । वहीं जल जीवन मिशन का घोटाला सच साबित होते दिखाई दे रहे है।

इनका कहना है।

मेरे द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त हुई है। जिसमें रिट्रोफिटिंग योजना में निर्माण कार्य में घोर अनियमिता की है। और लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन घोटाला स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जहाँ स्कूलों और आगनवाड़ी केन्द्रों में फिटिंग की गई वह केवल दिखावे के लिए निगरानी समिति और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी ठेकेदार खुला फायदा पहुँचा है।
सुजीत कुमार प्रजापति
अधिवक्ता नैनपुर मंडला

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