नैनपुर जनपद में मनरेगा में भ्रष्टाचार का खुला खेल नाबालिग बच्ची से कराई जा रही मजदूरी, जिम्मेदार अधिकारी नदारद

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला/ मंडला अजब और गज़ब है और यहां शासन प्रशासन और सरकारी सिस्टम चलाने वाले अधिकारी और क्या कर्मचारी सभी के सभी निराले हैं जी हा सही पढ़ा आपने मंडला जिले की नैनपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चीजगाँव में वर्तमान समय पर केंद्र सरकार की योजना के तहत खेल मैदान का निर्माण कार्य करवाया जा रहा हैं। आने वाले समय पर एक अप्रैल से जहां केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का बदलाव करते हुए *जी रामजी* योजना को आरम्भ और आगाज करने वाली है शायद इसी वजह से ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत केंद्र सरकार के द्वारा जारी की गई राशि को जल्द से जल्द कैसे ठिकाने लगाया जाए करके ग्राम पंचायत के सक्षम अधिकारी से कर्मचारी सरकारी राशि का बंदरबाट करने के जुगाड पर लगे हुए हैं।


नैनपुर जनपद के अंतर्गत आने वाली चीजगांव पंचायत में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। ग्राम पंचायत के द्वारा खेल मैदान का निर्माण कार्य किस मद से करवाया जा रहा हैं.? निर्माण एजेंसी कौन हैं..? कितने लाख रुपए से खेल मैदान का निर्माण कार्य किया जा रहा है.? मस्ट रोल में कितनों की हाजरी भरी जा रही हैं..? मजदूरी करने वाले बालिग है या नाबालिग है..? पंचायत कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारियों को तो यह भी नहीं पता सरकार द्वारा ग्रामीण युवाओं के खेल विकास के नाम पर मनरेगा के तहत बन रहे खेल मैदान में गंभीर अनियमितताओं का मामला बरता जा रहा है। मौके पर नाबालिग बच्ची से मिट्टी ढोने और मजदूरी का काम कराए जाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे मामले ने प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कार्यस्थल पर न तो कोई तकनीकी सहायक मौजूद था और न ही ग्राम पंचायत का जिम्मेदार प्रतिनिधि। मजदूरों की निगरानी के नाम पर सिर्फ कागजों में उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि वास्तविकता में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
कानून के अनुसार मनरेगा में केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों को ही काम दिया जा सकता है, लेकिन यहां नाबालिग बच्ची से मजदूरी कराना न केवल योजना के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बाल श्रम कानून के तहत भी दंडनीय अपराध है।
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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी लंबे समय से साइट पर नहीं पहुंचे, जिससे पंचायत स्तर पर मनमानी और भ्रष्टाचार को खुली छूट मिल गई है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि
क्या मनरेगा का पैसा खेल मैदान बनाने में लग रहा है या बच्चों के भविष्य को मिट्टी में मिलाने में?

*खेल मैदान बन रहा है… पर खेल प्रशासन खेल रहा है कानून से*

सरकार कहती है –
“बच्चे देश का भविष्य हैं।”
गांव का दृश्य कहता है –
“भविष्य अभी मजदूरी कर रहा है।”
मनरेगा के तहत खेल मैदान बन रहा है। कागजों में यह मैदान गांव के बच्चों को खेल और स्वास्थ्य देगा, लेकिन जमीन पर एक नाबालिग बच्ची खुद मिट्टी ढोकर इस मैदान की नींव रख रही है।
शायद यही नया “स्किल डेवलपमेंट” मॉडल है —
पहले खेलो, फिर पढ़ो, और अगर सिस्टम ऐसे ही रहा तो… सीधे मजदूर बनो।
अधिकारियों का हाल भी कम दिलचस्प नहीं है।
वे इतने जिम्मेदार हैं कि जिम्मेदारी से ही दूर रहते हैं।
साइट पर उनकी अनुपस्थिति यह साबित करती है कि
मनरेगा में काम कम और कागजों में उपस्थिति ज्यादा दर्ज होती है।
अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में खेल मैदान के बोर्ड पर लिखा होगा –
“इस मैदान का निर्माण नाबालिग श्रमिकों के पसीने से हुआ है – ग्राम पंचायत की सौजन्य से।

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