जनपद बीजाडांडी में भ्रष्टाचार का तांडव: CEO की चुप्पी, उपयंत्री की मनमानी और सरपंच-सचिव की मिलीभगत से लूट रहा जनहित

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला जिले की बीजाडांडी जनपद पंचायत इन दिनों भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और मनमानी कार्यप्रणाली का केंद्र बनती जा रही है। हालात यह हैं कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली लूट हो रही है, और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बसंती दुबे की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है। लगातार शिकायतों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं पूरे मामले को संरक्षण मिल रहा है।
उपयंत्री की तानाशाही: गृह जनपद में खुला खेल
पौंडी सेक्टर में पदस्थ उपयंत्री पूरन धुर्वे, जो स्वयं ग्राम पंचायत मानिकसरा के निवासी हैं, पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे अपने ही गृह जनपद में नियमों को दरकिनार कर मनमानी कर रहे हैं।
सरपंचों और सचिवों का आरोप है कि:
निर्माण कार्यों में जानबूझकर खामियां निकाली जाती हैं, मूल्यांकन के नाम पर 15% तक कमीशन की मांग की जाती है
पंचायतों पर दबाव बनाया जाता है कि कार्य उपयंत्री के माध्यम से ही कराए जाएं
ग्रेवल रोड सर्वे में खेल, मनरेगा के अंतर्गत चल रहे ग्रेवल रोड सर्वे में भी बड़ा खेल सामने आ रहा है। आरोप है कि उपयंत्री उन्हीं कार्यों का सर्वे कर रहे हैं जहां व्यक्तिगत लाभ की संभावना है, जबकि अन्य जरूरी कार्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे ग्रामीण विकास सीधे प्रभावित हो रहा है।
सरपंच-सचिव भी संदेह के घेरे में
इस पूरे मामले में कुछ सरपंच और सचिवों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि मिलीभगत के चलते भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, और जो विरोध करता है उसे प्रताड़ित किया जाता है।
फोन नहीं उठाना, व्हाट्सएप कॉल से संपर्क पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि उपयंत्री सामान्य कॉल रिसीव नहीं करते, बल्कि बाद में व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क करते हैं, जिससे बातचीत रिकॉर्ड न हो सके। यह व्यवहार पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जनहित पर भारी भ्रष्टाचार
ग्रामीणों का कहना है कि इन सबका सीधा नुकसान जनता को हो रहा है। विकास कार्य या तो अधूरे हैं या फिर घटिया गुणवत्ता के साथ किए जा रहे हैं, जिससे सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ही खत्म हो रहा है।
जिला प्रशासन पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल अब जिला प्रशासन पर खड़ा हो रहा है—क्या शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होना मिलीभगत का संकेत है? क्यों गृह जनपद में पदस्थ उपयंत्री को अब तक नहीं हटाया गया? आखिर कब तक जनहित की अनदेखी होती रहेगी?
आंदोलन की चेतावनी, पंचायत प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उपयंत्री को हटाकर निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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