जल निगम मंडला कार्यालय की 1करोड़ 92 लाख की “मजबूत” ईमारत 6 माह में ही हिली

दरारों पर पुट्टी, भ्रष्टाचार पर चुप्पी!

*लगभग 200 लाख रुपए की बिल्डिंग पर 200 से अधिक दरारें*

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला/ मंडला जिले में भ्रष्टाचार किस कदर से हावी है यह किसी से छुपा नहीं हैं अभी PWD विभाग में मवई कुड़ेला मार्ग का भ्रष्टाचार आमजनता भूली भी नहीं थी कि मंडला जिले में नव निर्माण PIU जल निगम विभाग के सरकारी निर्माण की सच्चाई अब दीवारों से झांक रही है। 1 करोड़ 92 लाख रुपए की लागत से बनी PIU मंडला की नई कार्यालय बिल्डिंग, जिसका उद्घाटन बड़े गर्व से पिछले साल के नवंबर महीने में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तियां ऊईके ने बड़े जोश खरोश से किया था, वह बिल्डिंग अब महज 6 महीनों में ही अपनी “गुणवत्ता” का असली चेहरा दिखा रही है।

दीवारों में उभरती दरारें सिर्फ सीमेंट के टूटने की नहीं, बल्कि सिस्टम की सड़ांध की गवाही दे रही हैं। हालात ये हैं कि दरारों को ठीक करने के बजाय उन पर पुट्टी और पेंट का मेकअप चढ़ाकर सच्चाई को छुपाने की कोशिश की जा रही है — जैसे भ्रष्टाचार को रंग-रोगन से ढक दिया जाएगा!

स्थानीय लोगों का कहना है कि दरारें दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं, जिससे भवन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों की लागत के बावजूद इतनी जल्दी जर्जर होना साफ इशारा करता है कि निर्माण में या तो भारी लापरवाही हुई है या फिर “कमीशन का खेल” पूरी मजबूती से खेला गया है।

अब सवाल ये उठता है कि जिम्मेदार कौन है? ठेकेदार, इंजीनियर या फिर वो अधिकारी जो आंख मूंदकर सब कुछ पास करते रहे?

*“मंडला मॉडल ऑफ डेवलपमेंट”*

जहां इमारतें नहीं, दरारें मजबूत बनती हैं!

मंडला मॉडल का यह नया सिस्टम है यहां बिल्डिंग का उद्घाटन पहले होता है और मजबूती बाद में ढूंढी जाती है।
6 महीने में दरारें आना कोई गलती नहीं, बल्कि “नई तकनीक” है–

*‘क्रैक-रेडी कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी’!*

जहां दीवारें बोलती हैं —
“हम कमजोर नहीं हैं, बस बजट रास्ते में ही हल्का हो गया!”
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारीनुसार पता चलता हे कि उक्त बिल्डिंग का टेंडर कल्पतरू कंपनी के द्वारा प्राप्त किया गया था, जिसका कुल बजट 1 करोड़ 92 लाख रुपया था परन्तु बजट रास्ते में भटक जाने के साथ ही लोकनिर्मण विभाग (भवन) के द्वारा और ठेकेदार के तालमेल जबरदस्त होने के चलते कल्पतरु के ठेकदार ने उक्त भवन का निर्माण स्वयं के द्वारा न करके सस्ते ठेकेदार की तलाश कर राजेंद्र धनगर निवासी महाराजपुर को मात्र कुल सत्तर लाख रुपए शब्दों में (70 लाख रुपए) पेटी में देकर इतिश्री कर लिया गया। केवल टेंडर डालने में कल्पतरु कंपनी के द्वारा सीधा सीधा 1 करोड़ 10 लाख रुपए अपनी जेब में डाल लिया गया।
इससे स्पष्ट अनुमान लगाया जा सकता हे कि जिस बिल्डिंग का निर्माण 1 करोड़ 90 लाख रुपए में बननी थी वो अब कुल 70 लाख रुपए में बना कर तैयार कर दी गई। इसी को तो कहते है कि यह मंडला का नया विकास मॉडल है।
वही जानकार का कहना है कि उक्त बिल्डिंग में प्लिंथ बीम पर सही से कॉम्पेक्शन नहीं किया गया जिससे सेटलमेंट ले रही है या फिर जो कलम और ब्रिक्स की चुनाई के बीच में मुर्गा जाली नहीं लगाई है और जहां-जहां लाइट के पाइप डाले गए हैं वहां पर भी मुर्गा जाली नहीं लगाई गई जिससे पहले से ही क्रैक आना स्टार्ट हो गए आने वाले टाइम में काफी क्रैक आ सकते हैं जिससे दीवार गिरने के चांसेस ज्यादा बढ़ जाएंगे और कही न कही भवन निर्माण कार्य मे ठेकेदार गुणवत्ता हीन कार्य किया और अगर गुणवत्ता का ध्यान रखा गया होता तो दीवारे में क्रक्स नही आती हैं।

*और विभाग कहता है —*

“दरारें नहीं हैं, ये तो डिज़ाइन पैटर्न है… जल निगम का नया ऑफिस देखकर आप भी थोड़ा समझिए थोड़ा सा यह मॉडर्न आर्ट हैं!”

शायद विभागीय मंत्री संपत्तियां मैडम तक जब यह बात पहुंचे तो शायद जवाब भी पहले से तैयार हो:
“सब विपक्ष की साजिश है, दीवारों को भी बहका दिया गया है!”

*लगभग 200 लाख रुपए की बिल्डिंग पर 200 से अधिक दरारें*

मुरम युक्त पहाड़ी पर बने इस भवन के नीचे जब ईमानदारी की नींव कमजोर हो, तो लगभग 2 करोड़ रुपए भी दीवारों को संभाल नहीं पाता।
जल निगम के बने इस ऑफिस में जनता के टैक्स से प्राप्त शासन के इन पैसों की कैसे विभाग के संरक्षण लापरवाही और अनदेखी के चलते ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों द्वारा होली खेली जा रही हे यह अब किसी से छुपा नहीं हैं।
करीब दो करोड़ की लागत से बनी इस बिल्डिंग में 200 से अधिक दरारें देखने को मिल रही है, जिससे यह साबित होता है कि दो सौ लाख रुपए में 200 से अधिक दरारें मतलब प्रति लाख रुपए पर एक दरार अब यही है मंत्री संपत्तियां ऊईके के विभाग का मंडला मॉडल शायद जिसको आगे चल कर पूरा प्रदेश फॉलो करें और उसकी ईबारत बाद में मेरे प्रदेश के साथ ही साथ देश में भी लागू हो जाएं क्योंकि यही तो हे, जिसको कहते है मंडला का विकास मॉडल या कहे मंडला मॉडल ऑफ डेवलपमेंट।।

क्या कहते है जिम्मेदार

हमने दीवारें बॉक्स से बनाई हे और ठेकदार कल्पतरु कंपनी के हैं, मुझे तो केवल पेटी में मात्र 70 लाख रुपए में भवन निर्माण का कार्य दिया गया था। जो दरारें आई हैं उस पर पुनः क्रैक्स सील भरने का कार्य किया जा रहा हैं इसके बाद में रंग रोगन लगा कर पूर्ण किया जायेगा।
राजेंद्र धनगर ठेकेदार
निवासी महाराजपुर मंडला

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