मध्यान्ह भोजन रसोइयों का फूटा आक्रोश, मुख्यमंत्री-कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन
रेवांचल टाइम्स मण्डला। जिले के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाले रसोइयों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। वर्षों से लंबित मांगों और लगातार हो रही अनदेखी से नाराज रसोइयों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
रसोइयों का कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हुए भी आज तक बुनियादी सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन से वंचित हैं। प्रदेश में लगभग चार लाख रसोइए कार्यरत हैं, लेकिन उनकी स्थिति अस्थायी मजदूरों से भी बदतर बनी हुई है। ज्ञापन में मांग की गई है कि उन्हें 12 महीने का नियमित वेतन दिया जाए, मानदेय में वृद्धि कर सम्मानजनक बनाया जाए तथा शासकीय कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए। इसके साथ ही अवकाश, बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त राशि जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।
रसोइयों ने यह भी स्पष्ट किया है कि 62 वर्ष की आयु तक उन्हें कार्य से अलग न किया जाए। वर्तमान में कम दर्ज संख्या या शाला मर्जिंग के नाम पर कई रसोइयों को हटाया जा रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है। संगठन ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि रसोइयों का मानदेय समय पर नहीं मिलता। कई बार महीनों तक भुगतान लंबित रहता है। मांग की गई है कि हर महीने की 10 तारीख तक मानदेय सीधे बैंक खातों में जमा कराया जाए। इसके अलावा रसोइयों से मध्यान्ह भोजन के अलावा अन्य कार्य करवाने के लिए दबाव बनाया जाता है, जिसे तत्काल बंद किया जाए।
संगठन के संरक्षण पी.डी. खैरवार और मार्गदर्शक सी.जी. नामदेव ने बताया कि विद्यालय परिसरों में शुद्ध पेयजल और पर्याप्त संसाधनों की भी भारी कमी है, जिससे भोजन बनाने और परोसने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रसोइयों को हर वर्ष कार्य के दौरान पहनने के लिए दो ड्रेस उपलब्ध कराने की भी मांग रखी गई है।
रसोइयों ने कुछ संगठनों पर आरोप लगाया कि वे उन्हें महंगे और घटिया गुणवत्ता के ड्रेस खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं और विरोध करने पर धमकियां भी दी जाती हैं। इस तरह की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग प्रशासन से की गई है।
रसोईया उत्थान संघ समिति की सचिव गंगोत्री विश्वकर्मा सहित सोमती धार्वैया, कुंवर सिंह मरकाम, रम्मू साहू, रामबाई और प्यारी बाई ने संयुक्त रूप से बताया कि मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के लिए सामग्री की राशि तो समूहों के खातों में पहुंच जाती है,उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के दौरान भी रसोइए कठिन परिस्थितियों में भोजन बनाकर बच्चों को परोसते हैं, बावजूद इसके उन्हें समय पर मेहनताना नहीं दिया जाता। जून माह का मानदेय विगत कुछ वर्षों का भुगतान नही किया गया है एरियर बनाकर भुगतान करते हुए आगामी जून के महीने में कराए गए काम का भुगतान किया जाए ।रसोइयों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी अगस्त माह में भोपाल में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन में प्रदेशभर के रसोइए शामिल होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी