अजब मंडला के गजब हाल: भ्रष्टाचार की गहराई में डूबी निर्माण एजेंसी ग्रामीण यंत्रिकीय सेवा विभाग

आरईएस विभाग पर गंभीर आरोप- 80 फीसदी निर्माण सामग्री सिर्फ कागज़ों पर

आदिवासी क्षेत्र में भ्रष्टाचार की नई दास्तान

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडल
मंडला, जो आदिवासी बाहुल्य जिला है, वहाँ की प्रमुख निर्माण एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग भ्रष्टाचार के दलदल में गहराई तक धंसा हुआ है।
सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त जानकारी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है, विभाग द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों में 80% से अधिक निर्माण सामग्री केवल कागज़ों में दिखायी गई है, जबकि जमीनी स्तर पर उसका कोई अता-पता नहीं है।

जिम्मेदार विभाग खुद बना भ्रष्टाचार का सूत्रधार

बड़े पैमाने पर होने वाले निर्माण कार्यों के बावजूद, विभागीय निगरानी और सत्यापन की घोर अनदेखी की गई है।
जब निर्माण एजेंसी खुद ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो, तो अन्य ठेकेदारों और सहयोगी एजेंसियों से पारदर्शिता की उम्मीद करना बेमानी है।

निरीक्षण और जांच में लापरवाही
निर्माण स्थलों का कोई निरीक्षण नहीं किया गया।

सामग्री की मात्रा, गुणवत्ता और अनुपात का कोई विवरण उपलब्ध नहीं।
ज़मीनी सच्चाई की परख के लिए कोई भौतिक परीक्षण या मूल्यांकन नहीं किया गया।

यह सब कुछ आरईएस के अधिकारियों और ठेकेदारों की आपसी मिलीभगत का नतीजा है, जिसमें करोड़ों की राशि का गबन किया गया।

निर्माण की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़
जिन स्थानों पर कार्य हुआ है, वहाँ की गुणवत्ता बेहद खराब है।
निर्माण सामग्री के मानकों की अनदेखी,
अनुपात में गड़बड़ी,

साफ-साफ भ्रष्टाचार की बू — ये सभी बातें सूचीबद्ध कार्यों में सामने आई हैं।

दर्जनों निर्माण कार्य संदेह के घेरे में

सूचना के अधिकार के तहत दर्जनों निर्माण स्थलों की सूची सामने आई है, जिनमें गुणवत्ताहीन और अपूर्ण निर्माण कार्य किए गए हैं।
इन स्थलों में विभागीय निरीक्षण नहीं हुआ और निर्माण में लगे अधिकारियों व ठेकेदारों ने आपसी सांठगांठ से योजनाओं में भारी गड़बड़ी कर सरकारी खजाने को चूना लगाया।

जवाबदेही का सवाल: प्रशासन मौन क्यों?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये जानकारी सामने आने के बाद भी:
जिला प्रशासन ने न तो कोई कार्रवाई की,
और न ही किसी जांच की शुरुआत की।

प्रशासनिक चुप्पी अपने आप में सवालों के घेरे में है, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं यह मिलीभगत की एक और परत तो नहीं?

कौन है जिम्मेदार?

मंडला जैसे आदिवासी और विकासशील क्षेत्र में यदि भ्रष्टाचार का ये आलम है, तो विकास की कल्पना ही बेमानी हो जाती है।
आरईएस संभाग क्रमांक-1 के अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ ने जनकल्याणकारी योजनाओं को निजी लाभ के लिए लूट का जरिया बना डाला है।

सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस मामले में तत्काल प्रभाव से जांच बैठाएं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।

Leave A Reply

Your email address will not be published.