प्रोटीन से भरपुर सबसे महंगे दामो में आसमान छूता भाव

रेवांचल टाइम्स मंडला बारिश के मौसम में मिलने वाली जंगली सब्जी जो पुर्णतः प्राकर्तिक और दुर्लभ है जिसे स्थानीय भाषा में पिहरी कहते है पिहरी में प्रोटीन खनिज व लवण प्रचुर मात्रा में पाए जाते है जिससे यह पौस्टिक आहार कहलाते है पिहरी को शाकाहारी या मांसाहारी दोनों तरह के लोग पसंद करते है इसकी खोज स्थानीय ग्रामीणों खासतौर से आदिवासियों के द्वारा की गई है यह उनके लिए आय का साधन है पिहरी बरसात के मौसम में ही मिलती है पिहरी को मांस से ज्यादा फायदेमंद और पोस्टिक मन जाता है जो जंगली क्षेत्रों में बहुत कम मात्रा में उपलब्ध होती है इसलिए इसके दाम आसमान छूटे है इन दिनों बाजार में पिहरी की आवक कम होने कारण इसकी कीमत काफी महंगे दाम में मिल रही है ऊंचे दाम का मुख्य कारण एक तो घंने जंगल पहाड़ जैसे क्षेत्रों में पाई जाती है ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग जंगल या पहाड़ में जाकर इन्हें इकट्ठा करते है इसकी पैदावार काफी कम मात्रा में होती है यह दुर्लभ सब्जी महँगी होने के बावजूद लोग बड़े चाव से ख़रीदकर खाते है यह प्राकृतिक रूप से आसमान में बिजली चमकती है तो यह वनोपज उगती है बारिश शुरू होने के एक माह से बाजार में आना शुरू हो जाती है और लगभग दो माह तक उपलब्ध रहती है इसकी कीमत एक हजार से बारह सौ और इससे भी अधिक कीमत पर मिलती है महंगी होने के बाद भी लीग इसे खाना पसंद करते है ये ग्रामीण क्षेत्रो में बिछिया मवई मोतीनाला कान्हा के जंगल और जिले के जंगली इलाको से इसकी आवक जिले में होती है छोटे छोटे व्यापारी ग्रामीण इलाकों में जाकर ग्रामीणों से इकट्ठा करके बाजार में लाकर महंगे दामो में बचते है कीमत ज्यादा होने के बाद भी लोगो मे उत्साह कम नही हो रहा है

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