सांदीपनि विद्यालय में बच्चों के बाल काटकर स्कूल से निकाला गया बाहर, पालकों में रोष कार्यवाही की क़ि जा रही है माँग

रेवांचल टाईम्स – मण्डला, जिले के विकास खण्ड नारायनगज में एक मामला प्रकाश में आया है जहाँ पर अध्ययनरत छात्र के बाल काट कर स्कूल से वाहर निकला गया इस घटना से स्कूल के छात्रोंओ के साथ साथ उनके पालक भी स्कूल प्रबंधन पर नाराज़गी जताई गई है और मांग की गई कि जल्द से जल्द दोषियों के ऊपर कार्यवाही की मांग है।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के विकासखंड नारायणगंज के ग्राम टिकरिया स्थित शासकीय सांदीपनि हायर सेकंडरी स्कूल में छात्रों के साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, स्कूल में अध्ययनरत बच्चों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा उनके सिर के बाल काट दिए गए और उन्हें स्कूल से यह कहकर बाहर कर दिया गया कि “बाल बड़े हैं, छोटे कराकर वापस आओ।”
वही पीड़ित बच्चों का कहना है कि स्कूल में ही कैची से उनके बाल बेढंग तरीके से काटे गए जैसे कि उन्हें सजा दी गई हो जिस कारण उन्हें सबके सामने शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा और बाद में स्कूल से भगा दिया गया। इस घटना से जहां बच्चों में अपमान और हीन भावना उत्पन्न वहीं उन्हें अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ रहा है। बच्चों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या अभिभावकों को जानकारी दिए, सीधे इस प्रकार की कार्रवाई करना अनुचित है।
स्थानीय लोगों और बच्चों का कहना है कि यदि वास्तव में बालों की लंबाई अनुशासन के विरुद्ध थी, तो पहले बच्चों को लिखित नोटिस देना चाहिए था या उनके अभिभावकों को सूचित करना चाहिए था। यदि इसके बावजूद समस्या बनी रहती, तो उच्च अधिकारियों को जानकारी देकर उचित कदम उठाया जा सकता था। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने सीधे बच्चों के बाल काटकर न सिर्फ नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि बच्चों की मानसिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। उल्लेखनीय है कि कोमल मन मस्तिष्क में बुरा असर न पड़े इसलिए पूर्व में माननीय न्यायालय एवं वरिष्ठ कार्यालय से ऐसे दिशा-निर्देश है कि बच्चों के साथ प्रताड़ना एवं ऐसा कोई कार्य न किए जाएं जिससे उनके मन मस्तिष्क में गलत असर पड़े।
इस पूरे मामले को लेकर छात्रों में रोष और अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त है। छात्रों ने जिला प्रशासन से इस घटना की गहराई से जांच कराने की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में किसी छात्र के साथ ऐसा गलत व्यवहार न हो। यदि सर के बाल कटवाना ही था तो अभिभावकों को सूचित किया जाता एवं किसी सालों वाले को बुलाकर व्यवस्थित तरीके से हेयर कटिंग करवाई जा सकती थी।
इस संबंध में जब प्राचार्य श्रीमती अर्चना नेमा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बच्चों को बीते एक महीने से बाल छोटे रखने की हिदायत दी जा रही थी और अभिभावकों को भी सूचित किया गया था। उन्होंने कहा, “बालों को स्कूल में किसने और कैसे काटा, इसकी जानकारी मैं ले रही हूं। मेरे द्वारा किसी भी छात्र को स्कूल से बाहर नहीं किया गया है। जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे निराधार हो सकते हैं। संभव है कि बच्चों को किसी ने बहकाया हो।”
वही अब देखना है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और क्या स्कूल प्रशासन के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है ? चर्चा तो यह भी है कि प्राचार्य जबलपुर से अप डाउन करती हैं, उनके मुख्यालय में निवास न करने से विद्यालय में अध्ययन- अध्यापन प्रभावित हो रहा है। जन आपेक्षा है कि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो, इस दिशा में भी ठोस प्रयास आवश्यक हैं।
इनका कहना है –
मामले की जानकारी मिली है, इस संबंध में जांच कराते हुए नियम अनुसार कार्यवाही को कराई जायेगी।
अविनाश शर्मा
उपाध्यक्ष, अध्यक्ष शिक्षा समिति
जनपद पंचायत नारायणगंज मंडला
जैसे ही मामले की जानकारी प्राप्त हुई, तत्काल विद्यालय पहुँचकर स्थिति की जानकारी ली गई। विद्यालय में विद्यार्थियों को बाल कटवाकर आने हेतु निर्देशित किया गया था तथा इस संबंध में अभिभावकों को भी सूचित किया गया। किन्तु, जब विद्यार्थियों के बाल नहीं कटे पाए गए, तब पीटीआई के निर्देश पर बाल काटे गए। यह विद्यालय प्रबंधन का पक्ष है।
हालाँकि, यह कार्य शासन के निर्धारित दिशा-निर्देशों के विरुद्ध प्रतीत होता है। इस संबंध में जांच कराकर, दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
राजेश विश्वकर्मा
खण्ड शिक्षा अधिकारी, नारायणगंज मंडला