सहायक आयुक्त द्वारा जांच में दोषी पाए जाने के उपरांत भी उसी फर्जी डिग्री स्कोरकार्ड से कर ली नौकरी
शासन के राजकोष से की गई वित्तीय अनियमितता….लगाया चूना

रेवाँचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में शिक्षा विभाग के जिम्मेदारो की भी अजब ग़ज़ब नियमों कानून की अनदेखी की जा रही है और लगातार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और भ्रष्टाचार सरकारी राशि में ग़बन पद का दुरुपयोग करना आम बात हो चुकी है आख़िर क्यो ये अब किसी से छुपा नहीं है !


मामला है सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग मंडला अंतर्गत हायर सेकेंडरी स्कूल टाटरी विकासखंड नैनपुर का जहां एक अतिथि शिक्षिका रितु तिवारी के द्वारा फर्जी स्कोर कार्ड से 4 साल तक नौकरी कर शासन प्रशासन को किया गुमराह
हाई कोर्ट के आदेश से कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग की कोर्ट शाखा से जांच में पाई गई दोषी
वही सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह है पूरा मामला रितु तिवारी शासकीय सर्वोदय उ. माध्यमिक विद्यालय ककैया विकासखंड बिछिया का है जहाँ पर अतिथि शिक्षक का पद पर कार्यरत थी इन्होंने एक साथ अतिथि शिक्षक का कार्य करते हुए उसी सत्र एवं समय में जबलपुर से नियमित B.Ed की डिग्री अर्जित की और bed एवं अतिथि शिक्षक का अनुभव स्कोरकार्ड में जुड़वाकर विद्यालय में नौकरी करने लगी जो नियमानुसार गलत है कि लोक शिक्षण संचालनालय मध्य प्रदेश के आदेशानुसार यदि कोई अतिथि शिक्षक एक साथ अतिथि शिक्षक पद पर कार्य करते हुए उसी सत्र एवं समय में B.Ed की डिग्री अर्जित की है तो उसकी अभ्यर्थीता निरस्त मानी जावेगी . हाई कोर्ट के आदेशानुसार इसी आदेश के तहत कार्यालय सहायक आयुक्त ने कोर्ट शाखा से जांच में अतिथि शिक्षक को दोषी पाया एवं विद्यालय से उसे बाहर कर दिया .
कार्यालय सहायक आयुक्त की मिली भगत ने कार्यवाही के नाम पर किया अनुभव निरस्त
वही जानकारी के अनुसार जांच में दोषी पाई जाने के उपरांत कार्यालय सहायक आयुक्त ने कार्यवाही के नाम पर मात्र उस अतिथि शिक्षक के सिर्फ अनुभव निरस्त किए.ना ही उस पर किसी प्रकार की कोई कानूनी कार्यवाही की गई और ना ही उसकी मानदेय की राशि को वापस लिया गया … जो सहायक आयुक्त की न्याय प्रक्रिया के ऊपर प्रश्नवाचक चिन्ह पैदा करता है की अनुभव के अंक निरस्त क्यों किए गए जबकि सरकार ने उस साल के अनुभव के अंकों को स्कोर कार्ड में जोड़ा ही नहीं था l जिस सत्र के स्कोर कार्ड के अंक को जोड़ा ही नहीं गया था उसे निरस्त कर कार्यालय सहायक आयुक्त क्या वाहवाही लूटना चाहती है.
अनुभव निरस्त होने पर स्कोर कार्ड भी निरस्त होना था उसी स्कोर कार्ड से कैसे नौकरी कर ली
जब जांच में दोषी पाई जाने पर विद्यालय से बाहर करने के उपरांत अतिथि शिक्षिका का सहायक आयुक्त द्वारा अनुभव निरस्त किया गया था तो स्कोर कार्ड भी निरस्त करना था और जब अनुभव निरस्त किया गया तो उसी स्कोर कार्ड को लगाकर अतिथि शिक्षक के द्वारा नौकरी कैसे कर ली गई यही एक संशय का विषय है की कार्यालय सहायक आयुक्त कि इसमें मिलीभगत क्यों है..?
कुल 306365 की राशि की हुई वित्तीय अनियमितता का जिम्मेदार कोन
हाई कोर्ट के आदेश के उपरांत कार्यालय सहायक आयुक्त की कोर्ट शाखा के जांच में दोषी पाई जाने के बाद भी लगातार 4 वर्षों तक नौकरी करने की जानकारी कार्यालय सहायक आयुक्त को थी शिकायतकर्ता विपिन चक्रवर्ती के द्वारा लिखित आवेदन देकर कार्यालय सहायक आयुक्त को इस विषय से अवगत करा दिया गया था फिर भी शिकायत को अनदेखी करते हुए अपात्र स्कोरकार्ड धारी अतिथि शिक्षक को किसके संरक्षण में नौकरी प्रदान की गई …? क्यों उस पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई…? क्यों उसके दस्तावेज की पुनः जांच नहीं की गई..? भर्तीकर्ता प्राचार्य शास्त्री पटेल शासकीय उ. माध्यमिक विद्यालय टाटरी द्वारा क्यों उनके दस्तावेज का बगैर सत्यापन किये मांनदेय पत्र तैयार किया गया… क्यों संकुल के द्वारा इस बात की पूरी जानकारी होने के बाद भी बिल जनरेट किया गया इन सब के पीछे किसका हाथ है या पूरा सिस्टम ही भ्रष्ट थाl या फिर सभी का निजी थोड़ा-थोड़ा इसमें स्वार्थ निहित था तभी तो इतनी बड़ी राशि की होली खेली गई मध्य प्रदेश सासन के राजकोष में चूना लगाया गयाl अब इस राशि को वापस करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगीl भर्तीकर्ता प्राचार्य के ऊपर क्या कार्रवाई की जावेगी अपात्र डिग्रीधारी स्कोर कार्डधारी अतिथि शिक्षक से क्या यह राशि वापस ली जावेगी या उन पर किसी प्रकार की कार्यवाही की जावेगी. इतनी प्राप्त राशि के पूर्व भी उक्त अतिथि शिक्षक के द्वारा 2 वर्ष तक नौकरी का कार्य किया गया है इसी स्कोर कार्ड के माध्यम से सहायक आयुक्त को यह सब पूरा मामला संज्ञान में होने के बाद भी उसके द्वारा समय सीमा पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई शासन की राशि को अपात्र को क्यों प्रदान कराया जा रहा था यह सब एक योग है या फिर सहयोग
प्राचार्य/ संकुल प्राचार्य /अतिथि शिक्षिका रितु तिवारी पर कार्यवाही ना करने के नाम पर मेहरबान क्यों..?कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति विभाग
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब कार्यालय के द्वारा जांच कर उनके द्वारा स्वयं प्राचार्य द्वारा की गई भर्ती प्रक्रिया एवं रितु तिवारी के दस्तावेज को दोषी पाया गया है तो फिर कार्यालय सहायक आयुक्त इन पर कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं करता क्यों इनको संरक्षण प्रदान कर रहा हैl आखिर आरोपियों को बचाने में कार्यालय सहायक आयुक्त का क्या निजी स्वार्थ हेl या फिर लेनदेन का अच्छा खासा सेटअप है थाना बमनी बंजर से भी कार्यालय सहायक आयुक्त को पत्र जारी कर इन पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए पत्र जारी करने को कहा गया किंतु आज दिनांक तक थाने से जारी पत्र का कार्यालय संयुक्त के द्वारा कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है और ना ही स्वयं के द्वारा कानूनी कार्रवाई की जा रही है जो इन पर दोषियों को बचाने एवं मेहरबानी की स्पष्ट भाषा को उजागर करता है
जिला कलेक्टर के संज्ञान में है यह मामला जिला कलेक्टर के संज्ञान में भी यह है मामला शिकायतकर्ता के द्वारा भूख हड़ताल पर बैठकर इस मामले की जांच के लिए ध्यानाकर्षण किया जा चुका है l शिकायतकर्ता से सभी साक्ष्य एवं सीएम हेल्पलाइन के प्रमाण प्राप्त करने के उपरांत जिला कलेक्टर के द्वारा शिकायतकर्ता के समक्ष सहायक आयुक्त को स्पष्ट आदेशित कर दिया गया था कि दोषियों पर कार्रवाई की जावे किंतु सहायक आयुक्त के द्वारा जिला कलेक्टर के आदेश को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है प्राचार्य/संकुल प्राचार्य एवं अतिथि शिक्षक को बचाया जा रहा है. सीएम हेल्पलाइन को दबाया जा रहा है सीएम हेल्पलाइन में गलत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत कर जिला कलेक्टर को गुमराह किया जा रहा है।