सरवाही अस्पताल में मरीजों से शुल्क वसूलने वाले डॉक्टर को नोटिस जारी
भर्ती मरीज से अस्पताल के बेड चार्ज लेने के लगे थे आरोप
इलाज के नाम पर मरीजों से की जा रही थी मोटी रकम की वसूली
आरोपों की न जांच हुई न कार्यवाही ,
रेवाँचल टाईम्स – बजाग बीते दिनों प्राथमिक स्वास्थ्यकेंद्र सरवाही में सरकारी अस्पताल के चिकित्सक द्वारा अस्पताल को ही निजी अस्पताल की तरह संचालित किए जाने का मामला सामने आया था है और अस्पताल में भर्ती मरीजों से भारी भरकम शुल्क वसूले जाने के आरोप लगे थे ग्रामीणों ने अस्पताल पर पदस्थ चिकित्सक पर इलाज के नाम पर मरीजों से पैसे लेने के गंभीर आरोप भी लगाए थे पीड़ितजनो ने इसकी शिकायत जिला पंचायत अध्यक्ष से की थी जहां जिला पंचायत अध्यक्ष ने ग्रामीणों को उक्त मामले की जांच करकर कार्यवाही कराने का आश्वाशन दिया था। परंतु स्थानीय लोगों की माने तो आज तक न तो इस मामले की जांच हुई न ही कार्यवाही ।जिससे चलते चिकित्सक का रवैया नहीं बदला है मामले का पर्दाफाश होने के बाद कुछ दिन तक तो हालत स्थिर रहे परंतु धीरे धीरे वही पहले जैसे स्थिति बनती जा रही है अब पंद्रह दिन बाद मामले पर संज्ञान लेते हुए उक्त चिकित्सक के विरुद्ध कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया । जारी पत्र में कहा गया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरवाही में आपकी कार्य शैली एवं स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आपके द्वारा शासकीय चिकित्सालय को निजी अस्पताल के रूप में उपयोग करते हुए मरीजों से इलाज के नाम पर भारी भरकम राशि वसूले जाने के आरोप लगाए गए है।
आगे लिखा गया है कि आपको निर्देशित किया जाता है कि इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण तीन दिवस के भीतर कार्यालय में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करे। जवाब प्रस्तुत नहीं करने की दशा में एक पक्षीय कार्यवाही किए जाने की चेतावनी दी गई है
मामले के अनुसार आठ अगस्त को ग्राम घोपतपुर के एक मजदूर दंपति ने अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर पर मलेरिया के इलाज लिए चार हजार रुपए नगद लेने के आरोप लगाए है शंकर सिंह मरावी और उसकी पत्नी ने बताया था कि मेरे बेटे द्वारका उम्र 21 वर्ष को तेज बुखार आने पर अस्पताल लाया गया। जहां रोगी कि पर्ची काटकर भर्ती कर उसका उपचार शुरू किया गया।डॉक्टर द्वारा बोला गया कि इसको मलेरिया डेंगू हो गया। और मरीज का उपचार यहां संभव नहीं है शहडोल या जबलपुर रिफर करना पड़ेगा। और यहां ठीक होना है तो दो हजार रूपये देने होगे। बाहर से दवाइयां मांगना पड़ेंगी। पीड़ित ने बताया कि हम भयभीत हो गए और हमने दो हजार रूपये दिए तब जाकर बेटे का इलाज शुरू हो सका।दूसरे दिन फिर से दो हजार की मांग की गई।सवाल पूछने पर कहा गया कि भर्ती रहना है तो सरकारी अस्पताल के बेड का रोजाना दो हजार चार्ज लगेगा।मायूसी दंपति ने बताया कि हमारे पास पैसे नहीं थे हमने खेत गिरवी रख कर दो हजार का ओर इंतजाम करके फोन पे के माध्यम से पैसे दिए।इसके बाद भी पैसे मांगने का सिलसिला नहीं रुका।बताया गया कि मरीज इतने में ठीक नहीं होगा।पूर्ण रूप से स्वस्थ कराने के लिए कुल आठ हजार देने होंगे। पैसे नहीं देने पर न तो आगे का इलाज किया जा रहा था न ही डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा था। जिला पंचायत अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल के चिकित्सक ने पीड़ित को दो हजार रूपये वापस किए गए थे।
इसी तरह के आरोप बजाग के समीपी परडिया डोंगरी ग्राम के रहने वाले नारायण बघेल ने लगाए थे उन्होंने बताया था कि अपने पिता को इलाज के लिए अस्पताल लाए थे अस्पताल से पर्ची काटने के बाद यहां के कर्मचारियों ने कहा कि पीछे डॉक्टर के कमरे में चले जाओ।मरीज अस्पताल में ठीक नहीं होगा। डॉक्टर के निवास में ले जाने पर दो दवाइयों की बोतल लगाई गई जिसके तीन हजार दो सौ रुपए ले लिए गए।
सर्वाही के रहने वाले बुजुर्ग अकल दास ने आरोप लगाया था कि खेत में काम करने के दौरान पैर के अंगूठे में चोट आ जाने पर अस्पताल आया था।पर्ची काटने के बाद डॉक्टर के पास कमरे में भेजा गया ।डॉक्टर ने कहा पंद्रह ठीक होना है तो दो हजार लगेंगे।मैने हा कर दी। फिर कहा गया कि ठीक होने में पंद्रह दिन लग जाएंगे। और पैसे देने होंगे।ऐसा कहकर मुझसे साढ़े नौ हजार रुपए ले लिए गए। सर्वाही के ही रहने वाले नर्मदा प्रसाद ने आरोप लगाया था कि मुझे चोट लगी थी इलाज कराने अस्पताल आया तो पर्ची काटने के बाद कहा गया कि पीछे चले जाओ । वहां मुझे दो टांके लगाए गए।ओर कोई दवाइयां नहीं दी गई। और दो हजार आठ सौ का बिल बना दिया गया।जब मैने पूछा कि किस बात के पैसे ले रहे हो ।तो बोला गया कि चुपचाप पैसे दो और चले जाओ।
शासकीय आवास से निजी क्लिनिक का होता है संचालन :
अस्पताल के पीछे बने सरकारी आवास में डॉक्टर ने अपना निजी क्लिनिक खोल कर रखा है जहां बकायदा परामर्श शुल्क दो सौ रुपए की पर्ची दीवार पर चस्पा कर रखी है मरीज के भर्ती होने पर यहां हालत के अनुसार इलाज का ठेका होता है और जमकर रुपए ऐंठे जाते है इतना ही नहीं यहां मौजूद डॉक्टर के रिश्तेदार भाई और अन्य लोग भी सरकारी आवास में रहकर अवैध तरीके से मरीजों का इलाज करते है।