शो पीस बन कर रह गए बीएसएनएल टावर

 

ग्रामीण क्षेत्रों में अधर में लटकी मोबाइल कनेक्टिविटी

बैगाचक के छह गांवों में एक वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो सकी बी एस एन एल की सेवा

रेवाँचल टाईम्स- बजाग आज भी डिजिटल क्रांति के युग में ग्रामीण अंचल के लोग दूर संचार प्रणाली से कोसों दूर है वनग्रामों में मोबाइल कनेक्टिविटी के नाम पर कंपनियों ने ऊंचे ऊंचे टावर तो खड़े कर दिए पर उन्हें संचालित करने वाला कोई नहीं है
वनांचल के दूरस्थ क्षेत्र में बीएसएनएल के आधा दर्जन से टावर लगाए गए है जो कि अपने चालू होने का इंतजार कर रहे है बैगांचल के कई ग्रामों में लगाए गए टावर लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहे है और मात्र शो पीस बनकर रह गए है।बजाग एवं समनापुर मुख्यालय अंतर्गत लगभग आधा दर्जन वनग्रामो में बीएसएनएल के टावर लगाए है । विभाग की लापरवाही से वनग्राम रंजरा ,रजनी सरई,अजगर,लमोठा, धुरकुटा, सिलपिड़ी, और बौना में लगाए गए टावर आज तक चालू नहीं हो सके है करीब एक वर्ष से भी ज्यादा बीत गए है परन्तु आज पर्यंत तक विभाग इन्हें चालू नहीं कर पाया हैं जिसको लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों द्वारा बी एस एन एल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे है बैगाचक की आबादी वाले जिन ग्रामों में बी एस एन एल की सेवा शुरू की जानी है उन ग्रामों में सौ प्रतिशत बैगा जनजाति के लोग निवास करते है जो कि मोबाइल कनेक्टिविटी की प्रारंभ होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।लोगो ने बताया कि जब टावर लगाने का काम शुरू हुआ था तब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था वर्षों से जंगलों में अलग थलग जीवन व्यतीत कर रहे लोगो में मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए देश दुनिया से जुड़ जाने की आस जागी थी परंतु टावर लगे काफी समय बीत गया । लोहे का ढांचा खड़े करने के बाद संबंधित विभाग टॉवर चालू करना ही भूल गया। और लोगों का डिजिटल बनने का सपना आज भी अधूरा है टावर लगते ही ज्यादातर ग्रामीण बीएसएनएल कंपनी की सिम खरीदकर भी रखे हुए है उपभोक्ताओं ने सिम कार्ड खरीद तो लिए परंतु बंद न हो जाए इसलिए समय समय पर रिचार्ज भी करा रहे है जिससे उनका पैसा व्यर्थ में बर्बाद हो रहा है मोबाइल से बात करने के लिए आज भी लोग यहां वहां नेटवर्क ढूंढते फिर रहे है इस संबंध में ग्रामीण फोन के माध्यम से विभाग को टावर चालू कराने के लिए कई बार गुहार भी लगा चुके लेकिन विभाग इस और ध्यान नहीं दे रहा है जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष पनप रहा है!

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