मूल्य से अधिक दामों पर बिक रही यूरिया,जमकर हो रही कालाबाजारी

 

अधिकारियों को जानकारी के बावजूद नहीं हो रही कार्यवाही

रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला
यू तो भारत वर्ष कृषि प्रधान देश है जहाँ की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और सभी अन्नदाताओं पर निर्भर करता है वही जब किसानों को समय पर बीज खाद सरकार उपलब्ध नही कर पायगी तो किसानों को एवं खेती को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा अन्नदाताओं को समय पर यदि खाद नही मिल पाती है तो फसलो का उत्पादन प्रभावित हो जायेगा जो देश एवं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होना तय है जबकि सरकार किसानों से बड़े बड़े वादे करती है कि हम किसानों को समय पर सारी चीजें उपलब्ध करायेगे पर ऐसा जमीनी हकीकत में देखने को नही मिल पा रहा है आज जब किसानों की फसलें पकने को तैयार है और तब उन्हें खाद ना मिल पायगी तो फसले ऐसे ही खराब हो जायगी जबकि सरकार कृषि विभाग के द्वारा किसानों को जागरूक करने जैविक खेती ; प्राकृतिक खेती पर्यावरण मिट्टी और भूमिगत जल को दूषित होने से बचाता है पर ये सब चीजें शिवरों वा कार्यशाला तक ही सीमित रह जाता है।

मंहगी यूरिया लेने को किसान मजबूर

किसानों की सबसे बड़ी जरूरत यूरिया खाद है वही सूत्रों से जानकारी के अनुसार इन दिनों नारायणगंज तहसील क्षेत्र में खाद खुलेआम अधिक दामों पर बेची जा रही है। लायसेंसी दुकानदारों से लेकर बिना लाइसेंस के छोटे विक्रेता तक मनमाने दाम वसूल रहे हैं। स्थिति यह है कि सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य और दुकानों पर वास्तविक बिक्री मूल्य में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। किसानों को यह अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ रहा है।

जानकारी के मुताबिक तहसील के कई ग्रामों से किसान लगातार शिकायत कर रहे हैं कि दुकानदार यूरिया मूल्य से कहीं ज्यादा वसूल कर रहे हैं। प्रति बोरी 400 से 500 रुपये तक वसूला जा रहा है। यही नहीं, कई दुकानों पर यूरिया की कालाबाजारी भी हो रही है। किसान सुबह से लाइन में लगते हैं लेकिन जब उनकी बारी आती है तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया है, जबकि वही बोरी रात में दोगुने दामों पर बेच दी जाती है।

किसानों की शिकायत है कि इस गंभीर समस्या की जानकारी जिला मुख्यालय और विभागीय अधिकारियों तक कई बार पहुंचाई गई है, लेकिन आज दिनांक तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। इससे ग्रामीण अंचल में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि प्रशासन से लेकर जिला स्तर तक कहीं न कहीं अधिकारियों और यूरिया व्यापारियों के बीच मिलीभगत का खेल चल रहा है।

किसानों का कहना है कि यूरिया की आवश्यकता खरीफ और रबी सीजन में सबसे ज्यादा होती है। समय पर खाद नहीं मिलने से फसलें प्रभावित होती हैं। दूसरी ओर जब यह कालाबाजारी रुकती नहीं है, तो मजबूरी में किसान ऊँचे दामों पर यूरिया खरीदने को विवश होते हैं। इसका सीधा असर उनकी लागत और उत्पादन पर पड़ता है। पहले ही डीजल, बीज और कीटनाशकों की कीमतों में बढ़ोतरी से किसान परेशान हैं, और अब यूरिया की महंगाई उनकी कमर तोड़ रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। कुछ किसानों ने तो यहां तक कहा कि अगर प्रशासन ने इस पर जल्द कार्यवाही नहीं की तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे। किसानों की मांग है कि नियंत्रित दर पर यूरिया उपलब्ध कराई जाए, दुकानों पर नियमित निरीक्षण किया जाए और दोषी विक्रेताओं पर सख्त कार्यवाही हो।

जानकारों का कहना है कि खाद की कालाबाजारी और ऊँचे दामों पर बिक्री कोई नई समस्या नहीं है। हर वर्ष फसल सीजन के दौरान यही हालात सामने आते हैं, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है। इससे यह संदेश जाता है कि अधिकारियों और व्यापारियों का गठजोड़ किसानों की मेहनत पर चोट कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक ध्यान देता है और कब किसानों को राहत दिलाई जाती है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो नारायणगंज के किसान आंदोलन के मूड में आ सकते हैं।
किसानों की सीधी मांग है कि यूरिया की बिक्री पर निगरानी रखी जाए, कालाबाजारी रोकने के लिए अलग जांच दल गठित किया जाए और दोषी व्यापारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।

खाद की बहुत परेशानी है एक सप्ताह से ज्यादा समय से किसानों को खाद नही मिल पा रही है दुकानों से ज्यादा कीमत में बेंची जा रही है मैंने डी डी ए से बात की है बस आश्वासन दिया गया कि एक दो दिन में उपलब्ध करा दी जाएगी लेकिन खाद नही मिल पा रही है किसान परेशान हो रहे है ।

भूपेंद्र वरकड़े
जिला पंचायत सदस्य नारायणगंज

शासकीय दुकान में यूरिया कम आने के कारण मुझे खाद नही मिल पाई स्थानीय यूरिया विक्रेता से मैने खाद खरीदनी चाही तो कीमत ज्यादा होने के कारण मैने खाद नही खरीदी जिसके कारण मेरी फसल विकसित नही हो पा रही है ।
छोटे लाल सिंगरौरे
स्थानीय कृषक

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