नारायणगंज नगर में बंदरों का आतंक,वन विभाग और पंचायत को नहीं है ध्यान

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रेवाँचल टाईम्स – मंडला जिले के विकास खंड नारायणगंज के पंडरिया एवं खैरी के गांव में इन दिनों बंदरों का आतंक चरम पर है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोग अपने घरों में रहने और छतों पर जाने से डर रहे हैं। कि कहीं बंदर हमला न कर दे

वही सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव में बंदरों के हमले से आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। ये बंदर सड़क सेकर छतों पर अपना डेरा जमाए हुए हैं। जब भी छत का दरवाजा खुलता है, वे सीधे घरों में घुस जाते हैं। वे न केवल सामान खाते और नुकसान करते उसे बर्बाद करते हैं, बल्कि लोगों पर हमला भी करते हैं।

गांव के घरो की बालकनी में रखें गमले बंदरों द्वारा फेंके जाते हैं जिसके कारण मलबा सीधे लोग बाग के सिर पर गिरने से वे गंभीर रूप से घाय हो जाते हैं एवं पौधों का नुक़सान हो जाता है

इस समस्या के बावजूद वन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार वन विभाग के अधिकारियों को बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ने की सूचना दी है। लेकिन विभाग इसे ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहा है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

इनका कहना है कि
वही बंदरों का आतंक बहुत अधिक बढ़ गया है वे घरों की छतों पर आ कर गमले तथा सूखने रखी सामग्री का नुक़सान करते हैं एवं कई बार लोगों पर हमला करने से भी नहीं कतराते हैं पंचायत तथा वन विभाग को संयुक्त कार्यवाही कर के इनसे निजात दिलवाना चाहिए।
सूरज सोनी नारायणगंज
लाल मुंह के बंदरों ने घर के अंदर घुस जाते रहें है इनका आतंक दिन व दिन बढ़ता ही जा रहा हैं कपड़े बाहर नही सूखा पाते है और न की कोई भी चीज बाहर रख सकते है इनसे लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है न ग्राम पंचायत कुछ कर रही है और न ही वन विभाग ध्यान दे रहें है कभी कोई बड़ी घटना न घट जाये ।
सरिता उइके ग्रहणी नारायणगंज

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