शहर में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का धड़ल्ले से उपयोग, चाय दुकानों पर परोसा जा रहा धीमा ज़हर

रेवांचल टाइम्स मंडला वर्तमान समय मे शहर से लेकर ग्रामीण अंचलो में सिंगल यूज प्लास्टिक के कप का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है सरकार द्वारा सख्त प्रतिबंध के बावजूद 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाली सिंगल यूज प्लास्टिक कप का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। खासकर चाय दुकानों और ठेलों पर उपयोग होने वाले डिस्पोज़ेबल गिलास, कप, न केवल पर्यावरण के लिए खतरा बन गए हैं, बल्कि लोगों की सेहत से भी गंभीर खिलवाड़ कर रहे हैं।
नगर पालिका और पर्यावरण विभाग के द्वारा कार्यवाही न होने के कारण इन उत्पादों का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। शहर और ग्रामीण इलाकों के प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, चौक चौराहे और स्कूल-कॉलेज के बाहर लगी चाय की दुकानों पर प्लास्टिक के पतले कपों में चाय परोसी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म चाय जब इन पतले प्लास्टिक कपों में डाली जाती है, तो उसमें मौजूद हानिकारक रसायन चाय में मिल जाते हैं, जो गंभीर जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
, “100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक के कप स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। गर्म तरल पदार्थ के संपर्क में आने पर इनमें से बिस्फेनॉल-ए (BPA) और अन्य जहरीले रसायन निकलते हैं, जो लीवर, किडनी और हार्मोन सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं।”
सरकार की गाइडलाइंस हवा में उड़ रहीं
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 100 माइक्रोन से कम मोटाई की सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद शहर में न तो पर्याप्त निगरानी हो रही है और न ही कार्रवाई। कई जगहों पर दुकानदार खुलेआम पॉलीथिन और प्लास्टिक कप बेचते और इस्तेमाल करते देखे जा सकते हैं।

स्थानीय प्रशासन की उदासीनता
सूत्रों से जानकारी अनुसार नगर पालिका के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि “कार्रवाई तो कभी कभी की जाती है, लेकिन जब तक जनता खुद जागरूक नहीं होगी, तब तक यह समस्या खत्म नहीं हो सकती।” सवाल यह उठता है कि जब प्रतिबंध लागू है, तो इन उत्पादों का निर्माण और बिक्री कैसे हो रही है?
जनता की भूमिका भी महत्वपूर्ण
जहाँ एक ओर प्रशासन की लापरवाही उजागर हो रही है, वहीं आम लोगों की अनदेखी भी कम जिम्मेदार नहीं है। सस्ते और सुविधाजनक होने के कारण लोग प्लास्टिक कप और पॉलीथिन का इस्तेमाल करते हैं, बिना यह सोचे कि वे अपनी और अपने बच्चों की सेहत से क्या खिलवाड़ कर रहे हैं।
शहर में जिस तरह से प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है, वह न केवल पर्यावरणीय आपदा को आमंत्रण है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। आवश्यकता है सख्त निगरानी, कठोर दंड और जनजागरूकता की, ताकि यह धीमा ज़हर हमारे समाज से खत्म हो सके।

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