आख़िर क्या कर रहे प्रभारी मंत्री?
विकास ठप… योजनाएँ कागज़ में… जनता बेहाल, गंदगी-बेरोज़गारी-धांधली पर कोई रोक नहीं! जम के चल रहा है जंगल राज
रेवाँचल टाईम्स- मंडला, मध्यप्रदेश का मंडला ज़िला एक येसा जिला है जहाँ पर न जिला प्रशासन होश में और न ही जनप्रतिनिधि और आज जिले के हालत जंगल राज जैसे हो रहें है जहाँ जिसकी लाठी उसकी भैस जैसे कहावत सच साबित होती दिखाई पड़ रही है और आम जानता की परेशानी दिन वि दिन बड़ रही है और आज भी समस्याओं के दलदल में फंसा हुआ है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, यातायात, रोजगार से लेकर स्वच्छता तक – हर मोर्चे पर हालात बदतर हैं। स्वच्छ भारत मिशन सिर्फ कागज़ में सफल है, हकीकत में ज़िला आज भी गंदगी और खुले में शौच की मार झेल रहा है।
जनता का कहना है कि प्रभारी मंत्री विकास कार्यों में बिल्कुल भी रुचि नहीं ले रहे। ज़िले में अधिकांश योजनाएँ भ्रष्टाचार और धांधली की भेंट चढ़ चुकी हैं।
उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह गया है।
स्वास्थ्य सेवाएँ बदहाल हैं, सड़कें जर्जर पड़ी हैं।
गंदगी, बीमारी, निरक्षरता और बेरोज़गारी अपने चरम पर है।
जनता का आरोप है कि प्रभारी मंत्री न तो समीक्षा बैठकें कर रहे हैं, न ही आकस्मिक निरीक्षण। नतीजा यह है कि शासन-प्रशासन पूरी तरह ढर्रे पर चल रहा है और भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।
लोगों की मांग है कि मंत्री सक्रिय हों, प्रतिमाह समीक्षा बैठकें और गांव-नगरों का आकस्मिक निरीक्षण करें। केवल भाषणों और कागज़ी योजनाओं से ज़िला नहीं चलेगा – अब जनता चाहती है कि मंडला में विकास की गंगा बहे। और चल रहै जंगल राज ख़त्म हो सके क्योंकि इस जिले के जिम्मेदार सब चेन की नीद से आराम फ़रमा रहें है ।