प्रेस क्लब की आड़ में पनप रहा अपराध: मंडला से कान्हा तक फैला ‘पत्रकार’ नाम का काला कारोबार
प्रेस क्लब की आड़ में पनप रहा अपराध: मंडला से कान्हा तक फैला ‘पत्रकार’ नाम का काला कारोबार
पत्रकारिता या संगठित अपराध का नया चेहरा?
कभी पत्रकारों को समाज का प्रहरी माना जाता था … आज वही प्रेस शब्द, अपराध की सबसे बड़ी पनाहगाह बन गया है।
प्रेस क्लब, पत्रकार संगठन और मीडिया संस्थाएं … अब इनका उपयोग पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा के बजाय, सट्टा, जुआ, शराब और अनैतिक कारोबार को वैधानिक संरक्षण देने के लिए हो रहा है।
जबलपुर से शुरू हुआ यह नेटवर्क अब मंडला, कान्हा नेशनल पार्क, बिछिया, नैनपुर, डिंडोरी, निवास और बीजाडांडी जैसे इलाकों तक धीरे-धीरे नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से फैल चुका है।
इस काले कारोबार का केंद्र है – ‘पत्रकार’ बनने का लाइसेंस देने वाले फर्जी संगठन, जिनकी सदस्यता बस 200 से शुरू हो जाती है।
लार्डगंज छापे ने खोले कई राज़
कुछ दिनों पूर्व जबलपुर के रानीताल स्थित एक किराए के मकान पर थाना प्रभारी नवल आर्य के नेतृत्व में छापामार कार्रवाई की गई।
यह मकान कथित रूप से एक ‘प्रेस क्लब’ द्वारा किराए पर लिया गया था, लेकिन अंदर क्या मिला?
जुए की फड़
नकद रकम
सट्टा पर्चियां
शराब की बोतलें
और संगठन के पत्रकार आईडी लिए ‘जुआरी’
पुलिस ने मौके से कई लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें कुछ पत्रकार संगठन के सदस्य भी थे। ये सदस्य ना किसी मीडिया संस्थान से जुड़े थे, ना कोई रिपोर्टिंग करते थे … ये सिर्फ ‘प्रेस’ शब्द की आड़ में जुए का ठेका चला रहे थे।
कान्हा के जंगलों में भी ‘प्रेस क्लब’ की गूंज … अब टाइगर नहीं, शराब पार्टियों की गूंज
मंडला जिले के संवेदनशील इको टूरिज्म क्षेत्र कान्हा नेशनल पार्क तक यह गंदगी फैल चुकी है।
प्रेस क्लबों के नाम पर कई ठिकानों पर रातभर शराब पार्टियां, संदिग्ध गतिविधियाँ, और बाहरी महिलाओं के प्रवेश की सूचना स्थानीय सूत्रों से प्राप्त हुई है।
सवाल उठता है … क्या ये संरक्षित वन क्षेत्र अब अय्याशी का अड्डा बनता जा रहा है?
बिछिया, नैनपुर, निवास … हर ब्लॉक में ‘पत्रकारों’ की नई बस्ती
इन इलाकों में अब यह आम हो गया है कि…
कबाड़ी,
शराब दुकानदार,
अवैध कॉलोनी काटने वाले बिल्डर,
रेत माफिया,
होटल-ढाबा संचालक,
और यहाँ तक कि रिक्शा चालक भी अब पत्रकार बन चुके हैं!
बस किसी तथाकथित संगठन से 200 देकर सदस्यता लीजिए, एक प्रेस का आईडी कार्ड पाइए, और फिर प्रशासन को धमकाइए।
प्रेस लिखे वाहनों में घूमिए, वसूली करिए, और अपने धंधों को वैधता दीजिए।
पैसे की चासनी में डूबा पत्रकार संगठन तंत्र
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब लार्डगंज छापे से पहले कथित संगठन के कुछ पदाधिकारियों ने 1.5 लाख रुपये जुआघर संचालकों से लिए थे, तो वादा किया था … “पुलिस कुछ नहीं करेगी।”
लेकिन जब छापा पड़ा, वे सब गायब हो गए, फोन तक नहीं उठाए।
यह खुली ब्लैकमेलिंग है … और एक गिरोह की तरह काम कर रहा पत्रकार संगठन।
अब सवाल जनता और प्रशासन से है:
क्या मंडला जिले में सक्रिय तथाकथित पत्रकार संगठनों की रजिस्ट्रेशन रद्द होगी?
क्या पुलिस अब भी सोती रहेगी या इन अवैध क्लबों पर भी छापेमारी करेगी?
क्या ईमानदार पत्रकारों की छवि को बचाने कोई सख्त कदम उठाया जाएगा?
क्या प्रेस क्लबों के भवनों में CCTV जांच और स्थानीय निगरानी अनिवार्य की जाएगी?
पत्रकारों के नाम पर कालिख पोतने वालों का बहिष्कार जरूरी
आज सच्चे पत्रकार, जो सालों से जमीनी रिपोर्टिंग करते आ रहे हैं … वे बदनाम हो रहे हैं क्योंकि…
“पत्रकार संगठन अब शरणस्थली बन चुके हैं अपराधियों के लिए, न कि पत्रकारों के लिए।”
प्रेस का आईडी आज हर गली में बिक रहा है, हर अपराधी अब ‘पत्रकार बनकर’ अपने धंधों को चला रहा है।
इससे बड़ा अपमान पत्रकारिता का और क्या होगा?
रेवांचल टाइम्स की मांग … जांच, जब्ती और बहिष्कार
मंडला, कान्हा, नैनपुर, बिछिया, निवास, बीजाडांडी में सक्रिय प्रेस क्लबों और संगठनों की लोकेशन-वार सूची बनाई जाए।
सभी भवनों, किराये के ठिकानों की सीसीटीवी फुटेज, किराया दस्तावेज और गतिविधियों की जांच हो।
गैर-पत्रकार सदस्यों की पहचान कर, उनके ID कार्ड तत्काल जब्त किए जाएं।
जिन संगठनों में फर्जी सदस्य पाए जाएं, उनका पंजीकरण रद्द किया जाए और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।
अगर अभी नहीं उठी आवाज, तो आने वाली पीढ़ियाँ पत्रकार को ‘दलाल’ कहेंगी।
यह सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर ईमानदार पत्रकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि ऐसे फर्जी संगठनों का सार्वजनिक बहिष्कार करें, उनके खिलाफ मोर्चा खोलें, और प्रेस की प्रतिष्ठा को बचाएं।
यह कोई साधारण रिपोर्ट नहीं, यह उस पत्रकारिता की पुकार है जो अब दम तोड़ रही है … प्रेस क्लबों की अय्याशी, संगठनों की सौदेबाजी और अपराधियों की सदस्यता में।
अब चुप रहना गुनाह है।
अतुल कुमार बन्देवार