जनपद पंचायत मोहगांव में बीआरजीएफ योजना में जमकर हुआ भ्रष्टाचार लूट सको तो लूट लो कि तर्ज में चल रहा भ्रष्टाचार

रेवांचल टाईम्स- मण्डला, आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में भ्रष्टाचार चरम सीमा पार कर चुका है और सरकारी योजनाओं में सरकारी धन को लूट सको तो लूट लो इसी तर्ज में जोरो पर चल रहा भ्रस्टाचार और जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी अपनी आँख मूंदे सब देख रहे और जनप्रतिनिधियों ने इस ओर देखना पसदं भी नही कर रहे इसके पीछे का क्या रहस्य है यह तो वही बता सकते है कि लूट रहे सरकारी धन में कितना हिस्सा उन तक पहुँच रहा है या फिर और कुछ वजह है यह तो वही बतला सकेंगे कि जिले के विकास के लिए आई शासन से राशि मे कितना जमी विकास किया जा रहा और कितना अधिकारियों कर्मचारियों का विकास हो रहा हैं।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडला जिले की जनपद पंचायत मोहगांव में अपीलार्थी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत बीआरजीएफ योजना में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के संयुक्त हस्ताक्षर राशि आहरण किये जाने की जानकारी प्राप्त हो रही है। शासन के द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर के लिए किस कर्मचारी का नाम प्रस्तावित किया गया है इस संबंध में जानकारी चाही गई थी किंतु संबंधित कार्यालय के द्वारा जानकारी नहीं दी गई। सूचना के अधिकार के अंतर्गत अपीलार्थी द्वारा नियमानुसार प्रथम अपील हेतु जनपद पंचायत मोहगांव में नियमानुसार आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है, तद्नुसार संबंधित विभाग द्वारा जानकारी नहीं दी गई है जिसके कारण सूचना के अधिकार का पालन नहीं किया गया है जो एक सोचनीय विषय है। जनपद पंचायत मोहगांव में शाखा प्रभारी द्वारा जानकारी दी गई है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के संयुक्त हस्ताक्षर से राशि आहरण मोहन सिंह परस्ते प्रभारी खंड पंचायत अधिकारी बीआरजीएफ एक योजनांतर्गत प्रभारी अधिकारी थे, लेकिन राज्य शासन द्वारा सुरेश कुमार रजक सहायक विकास विस्तार अधिकारी जनपद पंचायत मोहगांव का नाम संयुक्त हस्ताक्षर मुख्य कार्यपालन अधिकारी के द्वारा प्रस्तावित किया गया है। शासन के आदेश की उपेक्षा कर शाखा प्रभारी द्वारा मोहन परस्ते का नाम क्यों प्रस्तावित किया गया है? जो संदेह के घेरे में है। अपीलार्थी द्वारा मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन भोपाल को बीआरजीएफ जनपद पंचायत मोहगांव जिला मण्डला के कार्यों में नियम प्रक्रिया के विरूद्ध कार्यों के संबंध में लिखित शिकायत की गई है। शासन द्वारा जिला पंचायत मण्डला में मुख्यमंत्री की शिकायत का नजर अंदाज किया जा रहा है। आम नागरिकों की शिकायत का क्या होगा? जो सोचने वाली बात है। सीईओ/संयुक्त हस्ताक्षर प्रभारी के हस्ताक्षर से राशि आहरण की गई है साथ ही अनाप-शनाप फर्जी बिल लगाये गये हैं। जिसकी माप पुस्तिका कार्यालय में नहीं मिलेगी। जिला पंचायत मण्डला द्वारा जांच दल बनाया गया है आज दिनांक तक गंभीर विषय पर जांच नहीं की गई है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि मुख्यमंत्री की जांच का अनदेखा किया जा रहा है। पुन: इसके संबंध में अपीलार्थी मोहम्मद शरीफ खान द्वारा जिला पंचायत मण्डला में 13 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री हाऊस की शिकायत का शीघ्र अतिशीघ्र निराकरण के लिये आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है, किंतु जिला पंचायत द्वारा जानबूझकर उक्त आवेदन पत्र पर कार्यवाही आज दिनांक तक परिलक्षित नहीं हो पाई है। क्या कारण है? और इसके पीछे का क्या रहस्य है यह तो जाँच में सामने आ पायेगा पर अब बड़ा सवाल ये की आखिर जाँच कब होंगी और कौन करेगा और क्या दोषियों पर कार्यवाही होंगी या फ़िर केवल चेतावनी देकर पुनः भ्रस्टाचार करने का अवसर दिया जाऐगा।