रसोइयों का जीवन खतरे में! शासन की लापरवाही से स्कूलों में ‘गैस विस्फोट’ जैसी स्थिति

खराब गैस चूल्हों से झुलसने का खतरा, महीनों से नहीं मिला भुगतान, आखिर कब जागेगी सरकार?

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रेवांचल टाईम्स – मंडला प्रधानमंत्री पोषण आहार कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित मध्यान्ह भोजन योजना अब खुद रसोइयों के लिए खतरा बन गई है। मंडला जिले के कई स्कूलों में वर्षों पुराने गैस चूल्हे लगातार खराब हो रहे हैं, और समूहों को बार-बार मरम्मत कराकर किसी तरह बच्चों को भोजन परोसना पड़ रहा है।
गैस लीक की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे रसोइयों की जान पर बन आई है, पर शासन-प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है।
वही जानकारी के अनुसार, शासन द्वारा वर्षों पहले स्कूलों को जो गैस चूल्हे उपलब्ध कराए गए थे, वे अब जर्जर हो चुके हैं। समूहों को अपने स्तर पर बार-बार सुधार करवाना पड़ रहा है, पर अब गैस लीक और तकनीकी खराबी के कारण हादसे की आशंका बढ़ गई है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।

रसोइयों का कहना है कि सरकार ने न तो नए चूल्हे उपलब्ध कराए, न ही बर्तनों की जरूरतों पर ध्यान दिया। कुकर, भगोना, करछुल और अन्य आवश्यक सामान की भारी कमी है, जिससे भोजन पकाना दूभर हो गया है।
इतना ही नहीं, भुगतान भी लंबित है। समूहों के खाते में राशि पूरी नहीं डाली गई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। स्थानीय किराना और सब्जी विक्रेताओं ने अब उधार देना बंद कर दिया है।
रसोइयों का सवाल है, “जब हमें भुगतान ही नहीं मिल रहा, तो हम बच्चों को कैसे भोजन दें?”
महंगाई के इस दौर में तय की गई राशि बेहद अल्प है, जिससे भोजन की गुणवत्ता बनाए रखना लगभग असंभव हो गया है। वहीं, समूह के अध्यक्षों और सचिवों को भी मानदेय नहीं दिया जा रहा, जबकि वे पूरा समय कार्यक्रम संचालन में दे रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासन को तत्काल इस गंभीर विषय पर ध्यान देना चाहिए।
वे मांग कर रहे हैं कि—
सभी स्कूलों में नए गैस चूल्हे तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।
रसोइयों और समूहों का बकाया भुगतान तत्काल किया जाए।
कार्यरत पदाधिकारियों को मानदेय की राशि दी जाए।
यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो मध्यान्ह भोजन योजना हादसों की योजना में बदल सकती है।

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