घोटाले के शहर मंडला में एक और प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला

भूमिहीन गरीब महिला को बहला फुसला कर महिला का प्रधानमंत्री आवास पालासुन्दर के नरेंद्र साहू के नाम बनवा दिया गया
रेवांचल टाईम्स – मंडला, यू तो बैगा आदिवासी बहुल्य जिला में भ्रष्टाचार ग़बन और घोटाले का अंबार लगा हुआ है, जिनकी शिकायत होती भी है लोग अधिकारियों के सामने लिखित से लेकर मौखिक तक शिकायत करते है पर कोई न सुनने वाला है न ही देखने वाला है दिन व दिन सरकारी योजना जो ग्रामीणों को मिलने वाली मुलभूत सुविधाओं में घात लगाए बैठे भ्रस्टो ने किसी को नही छोड़ रहे हैं, चाहे वह गरीब या फिर माध्यम वर्ग के लोग और जिन्हें इन रोकने की जिम्मेदारी सौपी है वह चैन की वंशी बजा रहा हैं।
शिकायत हुई तो पंचायत सचिव रोजगार सहायक और जनपद पंचायत के अधिकारी झूठा मढ़ने को तैयार
जिला प्रशासन और शासन को झूठी जानकारी देकर मामले को दबाया जा रहा
मंडला जिला प्रशासन और नेता कुछ भी कह ले और ऑनलाईन डेटा में सरकार को सब कुछ बराबर बतलादे पर इसकी जमी हकीकत जमी ही व्यया करती है जो जिले के जिम्मेदार जिला प्रशासन और सांसद विधायक मंत्री सब इस ओर देखना भी पंसद नही कर रहे है, और भ्रस्टो से गठबंधन कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में उनके कंधे से कंधे मिलते नजर आ रहे हैं, केंद्र और प्रदेश सरकार लाख भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण करना है चाहे। मगर भ्रष्टाचार की जड़ इतनी गहरी है। उसको कभी भी खत्म नहीं लिया जा सकता है। क्योंकि भ्रष्टाचार की इबारत ही अधिकारी लिखते हैं। अधिकारी इतने दबंग होते है। छोटी शिकायतों को तो घोरकर पी जाते है। डकार भी नहीं लेते है। वही वे किसी की परवाह नहीं करते है। क्योंकि झोला लेकर आते है। और सूटकेस भरकर ले जाते है। खैर जो भी हो जब पोल खुलना चालू होती है। तो अच्छे अच्छे अधिकारी भागते नजर आते है।अधिकारियों की एक धारणा बन चुकी है। की शिकायत होगी तो कोई कार्यवाही नहीं होगी।
क्या है। मामला
नैनपुर विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत पालासुन्दर ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के अंतर्गत गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जिसमें ग्राम पंचायत पालासुंदर निवासी कमली बाई यादव (MP4097159) का प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में दिनांक 10/12/2022 को स्वीकृत हुआ था। हितग्राही कमली बाई यादव को आवास स्वीकृति उपरांत प्रथम किश्त रूपये 25000/- जारी तो हुई मगर आवास का निर्माण कमली बाई ना करके ग्राम पालासुंदर नरेंद्र साहू ने कर लिया। मजे की बात तो यह है। कमली बाई ग्राम भरवेली की स्थाई निवासी है। और ग्राम पंचायत पालासुंदर में कोई भी संपति नहीं है। तो फिर आधार में उसको आवास स्वीकृत किया गया जोकि आपने आप बड़ा मामला था। जब महिला के पास स्वयं की भूमि नहीं थी। महिला को क्यों आवास आवंटन किया जोकि जांच विषय और मुख्य बिंदु बनाता जा रहा है। वही ग्रामीणों ने आरोप लगाते रह गए है। कि पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और पंचायत समन्वयक अधिकारी के द्वारा रिश्वत लेकर पात्र गरीब परिवारों को लाभ नहीं दिया जाता है। और ग्राम पंचायत पालासुंदर में ऐसे कई ऐसे आवास भी स्वीकृत किए गए हैं जो पहले से ही पक्के मकानों में रह रहे हैं। जिनकी उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए
अगर जांच होती है। आपने आप में भ्रष्ट्राचार का बड़ा मामला निकल कर आयेगा ।
पंचायत के आवास प्रभारी ग्राम पंचायत सचिव रोजगार सहायक और पीसीओ ने मिलकर किया घोटाला
ग्राम पंचायत पालासुंदर की जनता के बीच ग्राम पंचायत में फर्जी बिल फर्जी मजदूरी और अनेक मामले रटे हुए है। वही दबी जुबान में ग्रामवासी कहते भी है। की ग्राम पंचायत में ऐसे अनेक घोटाले है। अगर वो निकल कर आ गए तो भूचाल आ जाएगा खैर जो भी मगर जांच का विषय यह है। कि जब महिला के पास स्वयं की भूमि नहीं थी। तो उसका आवास क्यों स्वीकृत किया गया और किसके के लिये आवास निर्माण किया गया है। जब रेवांचल टाईम्स की टाइम ने गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि जो महिला ग्राम पालासुंदर निवासरत है।उसका पालासुंदर में कोई भी स्थाई संपति नहीं है। ना ही राजस्व अभिलेख में कृषि भूमि ना ही स्वयं भूमि दर्ज नहीं है। और शासकीय भूमि पर एक छोटा सा घर बनाकर निवास करती है। जबकि मूल रूप उसका घर ग्राम पंचायत टाटरी के ग्राम भरवेली की रहने वाली है। और पंचायत सचिव और रोजगार इतने मेहरबान है। शादी शुदा महिला को विधवा पेंशन दे रहे है। जिससे साफ होता है। जनपद पंचायत नैनपुर के क्षेत्रीय समन्वय अधिकारी नर्मदा प्रसाद पटेल आवास प्रभारी गणेश साहू और सचिव बुधराम और रोजगार सहायक किस तरह से मेहरबान है। आपात्र होने के बाद भी शासन की योजना का लाभ दे रहे है। जबकि ग्राम पंचायत में ऐसे अनेक लोग है। जो पात्र होने के बाद भी योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। और जानकारी के अनुसार पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पात्र हितग्राहियों के स्थान पर अपात्र व्यक्तियों के नाम से आवास स्वीकृत किए गए हैं। जिसका खुलासा अगले अंक में होगा
इस मामले की शिकायतकर्ता ने जनपद पंचायत सीईओ और जिला पंचायत सीईओ सहित जिला प्रशासन को दी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए और सभी लाभार्थियों की सूची की पुनः जांच कराई जाए। वही ग्राम वासी भी चाहते है। कि इस प्रकार की गड़बड़ियों से प्रधानमंत्री की जनकल्याण कारी योजनाओं की साख पर आंच आती है। पूरे घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके।
क्या जिला पंचायत सीईओ और जिला प्रशासन आवास मामले के घोटाले में दोषी अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्यवाही करेंगे
वही शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन और जिला पंचायत को पत्र के लिखकर शिकायत दर्ज करवाई है। मगर जनपद पंचायत के सीईओ विनोद मरावी भी इस प्रकरण को दबाने में लगे है। और शिकायत कर्ता पर झूठा और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे है। वही दोषियों अधिकारियों और कर्मचारियों निलंबन व एफआईआर नहीं जाती है। तो आवेदक वरिष्ठ अधिकारी और न्यायालय में प्रकरण दर्ज करने के लिये मन बना चुका है। अब देखना है। की क्या जिला पंचायत के अधिकारी और जिला कलेक्टर मामले को कितनी गंभीरता से लेते है। एक बार फिर मामला दब कर रह जाता है।
इनका कहना है कि…
मेरे द्वारा ग्राम पंचायत पालासुंदर में प्रधानमंत्री आवास में घोटाले की लिखित शिकायत जिला प्रशासन और सीएम हेल्पलाइन में दर्ज की गई मगर जनपद पंचायत के अधिकारी कार्यवाही करने बजाय शिकायकर्ता पर झूठा आरोप लगा रहे है।
सुजीत कुमार प्रजापति नैनपुर