मंडला भी अजब है और गजब है इस जिले का जिला प्रशासन विधायक मंत्री भ्रष्टाचार का बोलबाला रिश्वत लेते हुए ट्रेप फिर से पुरानी कुर्सी पर अफसर

क्या फिर होगा गबन और घूस का अगला अध्याय शुरू
रेवांचल टाइम्स – मंडला, मंडला जिला जो बैगा आदिवासी बाहुल्य होने के साथ साथ इस जिले में कोई भी नियंम या काननू नाम की चीज दिखाई पड़ रही है इस जिले में काननू व्यवस्था चौपट हो चुकी है और अब भ्रष्टाचार ग़बन और भ्रस्टो का गढ़ बन गया है जहाँ पर जिसकी लाठी इसकी भैस जैसी कहावत सही होते दिखाई पड़ रही है जहाँ एक तरफ केन्द्र और राज्य सरकार सुशासन की बात करती वही दुसरी ओर भ्रस्टो का बोलबाला दिखाई पड़ रहा है आज आम आदमी पर इन भ्रष्ट तंत्र के सामने नतमस्तक दिखाई पड़ रहा है जहाँ इन पर जाँच एजेंसियों के द्वारा लगाम लगाने कार्यवाही तो की जा रही हैं पर वह समुचित दिखाई नही पड़ रही और न ही इन रिश्वत खोरो भ्रस्टो पर कोई असर दिखाई पड़ता दिखाई दे रहा ये आज भी उसी शान से अपने पद पर बने हुए है और जैसे कि इन भ्रस्टो पर कार्यवाही का कोई असर ही नही हुआ है आज भी समय से अपना काम ऑफिस में अपनी कुर्सी पर बैठ कर लोगो को बतला रहे है कि ऐसी कई जाँच आती है और जाती है क्या ये जाँच एजेंसियों पर एक तमंचा नही या फिर उन मंत्री विधायक जिला प्रशासन जो बड़ी बड़ी बात करते है और सुशासन की बात करते है
वही योजनाओ और अलग अलग मद से क्रय साम्रगी की फाइले बढ़ाने के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। भ्रष्टाचार का चक्र टूटने का नाम नहीं ले रहा है। विगत एक माह के भीतर जिले में दो सरकारी अधिकारियों को भ्रष्टाचार निरोधक संगठन आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो और लोकायुक्त जबलपुर द्वारा रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए ट्रेप किया गया। इन मामलों ने जिले भर में हलचल मचा दी और आमजन में यह उम्मीद जागी कि अब शायद भ्रष्ट तंत्र पर लगाम लगेगी और अन्य अफसर अपनी कार्यशैली में सुधार लाकर काम करेगें। लेकिन इन उम्मीदों को तगड़ा झटका तब लगा जब इन अधिकारियों को महज कुछ ही दिनों के बाद पुन: उनकी पुरानी जगह पर ही पदस्थापित करा दिया गया। इस निर्णय ने प्रशासन की नीयत और भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यही है भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा क्या इस पुन: पदस्थापना से भ्रष्ट अधिकारियों को खुली छूट नहीं मिल रही। क्या वे फिर से गबन और रिश्वत के उसी चक्र में नहीं लौटेंगे जिससे जनता त्रस्त है
भ्रष्टाचार के दो बड़े शिक्षा विभाग के मामले एक माह में दो ट्रेप
विगत एक माह में जिले में दो बड़े ट्रेप सामने आए। पहला मामला सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग मंडला में पदस्थ सहायक यंत्री नरेन्द्र गुप्ता जिन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथों 11 सितम्बर 2025 स्वयं के कार्यालय में रोशन तिवारी से फर्म बोरिंग बिल्डर्स से रिपेयर मेंटिनेंस का कार्य का भुगतान के एवज में छप्पन हजार की रिश्वत मांग की गई थी पहली किश्त बीस हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त की जबलपुर ने रंगे हाथ पकड़ा। जो ठेकेदार का भगुतान रोके हुए थे। दूसरा मामला 25 सितम्बर 2025 समग्र शिक्षा अभियान जिला शिक्षा केन्द्र में पदस्थ डी पी सी अरविंद कुमार विश्वकर्मा के द्वारा जिले के ककैया स्कूल में मान्यता क्लियर के एवज में एक लाख बीस हजार रुपये विद्या निकेतन स्कूल संचालक रवि कांत नंदा से साठ हजार रिश्वत लेते पत्नी संग ईओडब्लू जबलपुर से धराये गए जिसमे पहली किश्त ए पी सी अवधेश नारायण पांडे को पचास हजार पहले दिए गए थे।
वही इन दोनों मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित करने की कार्रवाई जिला प्रशासन के द्वारा किया जाना था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जो आमजनो के बीच चर्चा का विषय है। शुरुआती कार्यवाही से ऐसा प्रतीत हुआ कि शासन.प्रशासन भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने को तैयार है। मगर यह स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं रही।
भ्रष्टाचार अधिनियम की कार्यवाही के बाद भी अपनी कुर्सी में है बरकरार अधिकारी क्यो
वही सूत्रों से जानकारी अनुसार सिर्फ 3 सप्ताह के भीतर दोनों अधिकारियों को प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर दोबारा उन्हीं पदों पर तैनात कर दिया गया जहां वे पहले कार्यरत थे, और जहाँ से उन्होंने घूसखोरी की थी। यह फैसला शासन के उच्चाधिकारियों की स्वीकृति से हुआ जो अब खुद संदेह के घेरे में हैं।
यह पुन: उसी पद पर पदस्थापना केवल सवाल ही नहीं खड़े करती, बल्कि यह दर्शाती है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध दिखाया जाने वाला रुख केवल कागजों तक सीमित है।
क्या फिर से कर सकते हैं गबन, भ्रष्टाचार या फिर मिटा रहे है
वही यदि कोई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है और फिर उसे उसी पद पर फिर से बैठा दिया जाए तो यह न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है बल्कि यह संदेश भी देता है कि सिस्टम भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति नरम है। ऐसे में दोबारा गबन या घूस लेना बिलकुल मुमकिन है या फिर उन्हें उसी पद में असीन कर उनके द्वारा किये गए काले कबरे को मिटा देने की छूट प्रदान कर दी है जहाँ पर उनके द्वारा किये गए गोलमाल पर किसी अन्य अधिकारी या जनप्रतिनिधि न लिप्त हो जाये इसलिए इन्हें मौका दिया जा रहा जा है।
वही लोकायुक्त की कार्यवाही का उद्देश्य केवल पकडऩा नहीं बल्कि भविष्य में होने वाले अपराधों को रोकना भी होता है। अगर कार्रवाई के बावजूद अधिकारी पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं लागू होती तो यह लोकायुक्त जैसी संस्थाओं की साख को भी कमजोर करता है। और जनता में उसका असर बुरा होता हैं और विभाग के प्रति जनता का भरोसा टूटाता है स्थानीय नागरिकों (विभाग) में इस निर्णय को लेकर जबरदस्त नाराजगी है
जब ट्रेप के बाद भी वही अधिकारी वापस उन्हें मूल पद बिठा दिए जाते हैं तो आम जनता को क्या संदेश मिलता है यही कि रिश्वत लो पकड़े जाओ फिर भी कुछ नहीं बिगड़ेगा। यह तो खुला आमंत्रण है, भ्रष्टाचार को।
यह जन विश्वास का मज़ाक करार दिया और मांग की कि ऐसे अधिकारियों को कम से कम विभागीय जांच पूरी होने तक किसी भी संवेदनशील पद पर तैनात न किया जाए।अगर यही चलन बन गया कि ट्रेप हुए अधिकारी कुछ ही समय बाद फिर से अपनी सीटों पर वापस बैठेंगे तो इससे न केवल भ्रष्टाचार को बल मिलेगा बल्कि ईमानदार अधिकारियों का मनोबल भी टूटेगा। यह चलन आगे चलकर घातक सिद्ध हो सकता है।क्योंकि एक बार रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद भी अगर कोई अधिकारी उसी कुर्सी पर लौटता है तो यह उस सिस्टम पर कलंक है जो उन्हें पकडऩे की बात करता है। क्या ऐसे में वे फिर से घूस नहीं लेंगे क्या गारंटी की जनता को फिर से ठगा नहीं जाएगा।
भ्रष्टाचार के इस गंभीर मसले पर केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे अंजाम तक पहुँचाना आवश्यक है।भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई केवल ट्रेप या निलंबन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली लड़ाई तब है जब ऐसे मामलों को निर्णायक अंत तक पहुँचाया जाए। लेकिन अगर ट्रेप के बावजूद अधिकारी फिर से कुर्सी पर आ जाएं तो यह केवल सिस्टम की असफलता नहीं बल्कि लोकतंत्र के मूल्यों की अवमानना है।आज जरूरत है सख्त राजनीतिक इच्छाशक्ति और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचे की ताकि न सिर्फ भ्रष्टाचार रुके बल्कि जनता का भरोसा भी बहाल हो सके।
इनका कहना है कि…
मंडला जिला भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया है जहां आये दिनों लोकायुक्त और ई ओ डब्ल्यू की कार्यवाही भ्रस्टो पर जारी है पर मंत्री मिनिस्टर विधायक सांसद है और इस ओर कोई भी ध्यान नही दे रहे है जिस कारण से भ्रष्टाचार ग़बन दिन व दिन तेजी से बढ़ रहा है जिन पर जाँच एजंसियों ने कार्यवाही की है वह 24 से 28 घण्टे के अंदर मुख्यालय में अटैच किया जाता है वित्तीय पावर और उनके पद से हटा दिया जाता है पर ये मंडला में नही हो रहा है कार्यवाही हो रही है पर भ्रष्ट आज भी अपनी कुर्सी में यथावत दिखाई पड़ रहे है पर भाजपा के शासन में शुशासन कहि दिखाई ही नही पड़ रहा हैं, वर्तमान सरकार नियमों को शिथिल करते हुए उन्हें पद में बनाये हुए है कांग्रेस पार्टी जल्द से जल्द भ्रष्टाचारियो के नाम खोलते हुए संबंधित कार्यालय में तालाबंदी की कार्यवाही करेगी ऐसी कार्यप्रणाली को देखते हुए मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन को लिखित पत्र देगी।
अशोक मर्सकोले
जिला अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी मंडला