देवदरा पंचायत में मुक्ति धाम का हाल बेहाल मनमानी और घटिया निर्माण ने बिगाड़ी स्थिति

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रेवांचल टाइम्स मंडला ग्राम पंचायत देवदरा अंतर्गत निर्मित मुक्ति धाम (शमशान घाट ) आज अपनी दयनीय स्तिथि पर स्वयं आँसू बहा रहा है कई बार पंचायत के द्वारा निर्माण कार्य कराया गया जिसका उद्देश्य अंतिम संस्कार हेतु एक स्वच्छ सुरक्षित और सम्मानजनक स्थल उपलब्ध हो सके परंतु पंचायत की मनमानी, घटिया निर्माण और देखरेख के अभाव ने इस पवित्र स्थल की गरिमा को धूमिल किया जा रहा है।निर्माण के दौरान मुक्ति धाम में टाइल्स बिछाई गई चारदीवारी की मरम्मत की गई। और चेकर्स लगाए गए थे ताकि परिसर को सुंदर और सुविधाजनक बनाया जा सके। लेकिन महज कुछ महीनों में ही इन चेकर्स का उखड़ना शुरू हो गया है। निर्माण कार्य के समय घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था। अब स्थिति यह है कि जगह-जगह से चेकर्स निकल रहे हैं, और पूरा परिसर अस्वच्छ हो गया है।
असामाजिक तत्वों का अड्डा बना मुक्ति धाम
शाम ढलते ही मुक्ति धाम अब श्रद्धा का नहीं, बल्कि शराबखोरी का केंद्र बन चुका है। आसपास के मोहल्लों के कुछ लड़के यहां बैठकर नशा करते हैं। शराब की खाली बोतलें, टूटी हुई शीशियां और गुटखा के पाउच हर जगह बिखरे पड़े रहते हैं। दीवारों पर गुटखा थूकने से दीवारे और फ़र्श गंदा हो गया है मेंन गेट में लगाये गए ताले को तोड़ दिया जाता है ।जिससे मुक्ति धाम की सुंदरता नष्ट हो रही है।
स्थानीय निवासी बताते हैं,हमने पंचायत को कई बार शिकायत दी कि कुछ शरारती तत्व यहां रात में शराब पीते हैं और दीवारों पर गंदगी फैलाते हैं, पर किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। पंचायत का कोई जिम्मेदार व्यक्ति यहां झांकने तक नहीं आता।
पंचायत की लापरवाही ग्राम पंचायत की ओर से निर्माण कार्य तो कराया गया, लेकिन उसके बाद देखरेख की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। न चौकीदार की नियुक्ति हुई, न सफाई की स्थायी व्यवस्था। नतीजा यह है कि असामाजिक तत्वों का कब्जा इस पवित्र स्थल पर हो चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता अच्छी होती और निगरानी रखी जाती, तो आज यह स्थिति न होती।ग्रामीणों में पंचायत के प्रति गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जब मुक्ति धाम के निर्माण में सरकारी धन खर्च किया गया, तो उसकी जिम्मेदारी भी पंचायत की बनती है कि वह उसकी सुरक्षा और साफ सफाई सुनिश्चित करे। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां मृत आत्माओं की शांति के लोग आते है वहां अब अशांति और असभ्यता का माहौल फैलाया जा रहा है अब तो श्मशान घाट भी सुरक्षित नहीं रहा जरूरत है कि इसे फिर से उसकी गरिमा और पवित्रता लौटाई जाए, ताकि यह स्थल मृत आत्माओं की शांति का स्थान बन सके, न कि असामाजिक गतिविधियों का।

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