अनेकता में एकता देश की विशेषता को आबाद रखने समाजसेवियों का स्वागत : पी.डी.खैरवार
भारतीय एकता दिवस 31 अक्टूबर पर मण्डला से विशेष.....
रेवाँचल टाईम्स – मण्डला, भारत जैसे विशाल भू-भाग के चारों दिशाओं में सदियों से रहते आ रहे जनमानस की भाषा,वेशभूषा , रहन सहन, संस्कृति तथा खान पान में मौलिक विविधताएं यहां की मुख्य विशेषता है। इनके रहते हुए भी एकमेव निष्ठा, श्रद्धा,लक्ष्य और विश्वास अपने स्वतंत्र भारत देश के संवैधानिक अखंडता, संम्प्रभुता , सुरक्षा, स्वतंत्रता,समृद्धि और देश की चहुंमुखी उन्नति की ओर भारत अग्रसर है। भारत देश के आत्ममुग्ध, स्वार्थ जनित, स्वहित में सक्रिय, तथाकथित, स्वयंभू जनसेवक, समाज को रसातल में ले जाने में कोई चूक भी नहीं कर रहे हैं,जो सर्वांगीण विकास में बाधक का काम करते हैं ।जिन पर विश्वास करके सुख-दुख में आवाज बनने जनता मतदान कर अपना नेता चुनती है पर नतीजा कुछ और । समुदायों,जातियों और धर्मों के नाम पर दूषित राजनीति में मशगूल ऐसे राजनेताओं ने ही निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए,देश की विभिन्न आंचलिक विविधताओं में भी अटूट एकता की परम्परा और परिपाटी को तहस-नहस करके रख दिया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में बसने वाले विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं, आस्थाओं , परम्पराओं के मानने वाले भोले भाले जनमानस का भावनात्मक शोषण और भयादोहन करते हुए उन्हें उनकी बोली, भाषा, जाति, फिरका, सूबे के आधार पर बांटने में एंड़ी चोटी का जोर ऐसे लोग लगाए हुए हैं। जो कि उनके राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति का अत्यंत सरल और सुगम जरिया बना हुआ है। जिससे देश की विविधता में एकता की सुदृढ एवं अटूट परंपरा/परिपाटी तेजी से घटते क्रम में जा रहा है। जबकि भारत देश के विभिन्न सूबों के विशेष रूप से समस्त संस्कृतियों , भाषाओं, आस्थाओं को एकीकृत करके समेट रखे भारत देश के वक्षस्थल, हृदय प्रदेश हमारे एक प्रदेश मध्यप्रदेश है। जिसके सताए,पीड़ित,लाचार,बेवस जनता को उनके संवैधानिक हक़, अधिकार तथा समुचित न्याय दिलाकर उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करा पाने में फिरका परस्त तथाकथित जनसेवक राजनेताओं को कोई रुचि नहीं है, क्योंकि देश और प्रदेश की आम जनता को उनके रोज मर्रा की बुनियादी जरूरतों की समस्यायों का न्यायोचित समाधान हो जाने पर ऐसे जातिवादी, फिरका परस्त, भाषा और वेशभूषा की राजनीति करने वाले स्वार्थी राजनेताओं की राजनीति की दुकानों के बंद हो जाने का खतरा सताता रहता है। यह जरूर है,कि ऐसे स्वार्थी कथित जनसेवकों की पूंछ परख तभी तक हो सकती है, जब तक देश और प्रदेश की आमजनता इनके भावनात्मक भयादोहन और शोषण के इनके जबड़ों में जकड़ी रह कर इनकी कठपुतली बनी रहेगी।
आज की आवश्यकता
अस्तु आज आवश्यकता इस बात की है , कि देश और प्रदेश के संवेदनशील , नैतिक, ईमानदार,बेदाग भले लोग जातिगत , समुदाय गत,दलगत क्षेत्रगत राजनीति विचारों से ऊपर उठकर एक साथ एक जनमंच में रहकर अपने संवैधानिक हक एवं अधिकारों से तथा समुचित न्याय पाने से वंचित और उपेक्षित सताए, पीड़ित, लाचार,बेवस आमजनता को उनके संवैधानिक हक़ एवं अधिकार तथा उन्हें समुचित न्याय दिलाने की प्रभावी मुहिम चला कर देश व प्रदेश की आमजनता के दुःख दर्दों को बांटने के लिए उनके साथ खड़े होकर मददगार बनकर उन्हें जातिवादी, मजहबी, भाषाई और क्षेत्रीय रुप से बांटने वाले कथित समाजसेवकों का लिवास पहने लोगों के जबड़ों से निकाल कर भारत देश की संवैधानिक मुख्य धारा में लाने के लिए प्रयत्नशील बने रहने में क्षमतानुसार भागीदारी निभाते रहने वाले समाजसेवियों का स्वागत है, आवाहन है ।
पी.डी.खैरवार ( समाजसेवी )