ग्राम पंचायत लफरा में मचा लफड़ा : भ्रष्टाचार और शराबबंदी को लेकर उबाल पर ग्रामीण, चौथे दिन भी जारी धरना प्रदर्शन

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रेवांचल टाइम्स बिछिया मंडला जिले की कई ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार लगातार जारी है शासकीय राशि का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है कागजो पर तो सही दिखाया जा रहा पर जमीनी स्तर पर कुछ और ही दिखाई दे रहा है सरकारी योजनाओं को अपनी निजी संपत्ति समझकर सरकारी धन भय मुक्त होकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है लाखो रुपये के बिल नियमों को ताक में रखकर भुगतान किये जा रहे है ग्राम वासियो के द्वारा मय सबूत के शिकायत कर कार्यवाही की मांग की जा रही है पर शिकायतों में किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नही की जा रही है
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार विकास खंड बिछिया की ग्राम पंचायत लफरा इन दिनों अपने ही नाम की तरह लफड़े में घिरी हुई है। ग्रामीणों ने पंचायत में फैले भ्रष्टाचार, मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी,और मातृशक्तियो के द्वारा शराबबंदी की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है लगातार चार दिनों से गोदर बाबा के प्रांगण में धरना प्रदर्शन जारी है, जिसमें ग्रामीणों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी भाग ले रही हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, और जनपद अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं। पंचायत में योजनाओं के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जैसी महत्वपूर्ण योजना को भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है। मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। कई अपात्र व्यक्तियों को पात्र बनाकर योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। वहीं, वास्तविक पात्र गरीब परिवारों को योजनाओं से वंचित रखा गया है।
मृत रोजगार सहायक की आईडी से किया गया फर्जीवाड़ा
इस पूरे प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब यह जानकारी सामने आई कि पूर्व रोजगार सहायक संतोष नागवंशी, जिनका देहांत 31 दिसंबर 2024 को हो चुका था, उनकी आईडी का सात माह तक गलत उपयोग किया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच, उपसरपंच, सचिव और जनपद स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से मृत व्यक्ति की आईडी का उपयोग कर मनरेगा के अंतर्गत कई फर्जी भुगतान किए गए। इस गड़बड़ी में नवनीत झरिया नामक व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है, जो कथित रूप से इस आईडी से काम करता रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ईपीओ संध्या शिवहरे समय पर मृत व्यक्ति की आईडी को बंद करवा देतीं, तो इतना बड़ा भ्रष्टाचार नहीं होता। यह लापरवाही अब बड़े घोटाले के रूप में सामने आ चुकी है।
चार दिनों से जारी धरना, प्रशासन मौन
लगातार चार दिनों से ग्रामीण और महिलाएं गोदर बाबा प्रांगण परिसर में धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों में महिलाओं की संख्या उल्लेखनीय है। महिलाएं नशा मुक्ति अभियान को लेकर अनशन पर बैठी है कि बार रैली निकालकर शराब का विरोध कर चुकी है लफरा में लगभग चालिस घरो में कच्ची हाथ भट्टी शराब बनाकर एवं बाहर से लाकर बेची जा रही है सात माह में मातृशक्तियो ने संगठित होकर तीन बार शिकायतें जनसुनवाई में दो बार पुलिस कार्यालय और बम्हनी थाने में शिकायत कर चुकी पर कोई कार्यवाही ना होने के कारण इस बार अनशन में बैठ कर शराब बंदी की मांग कर रही है।
धरना स्थल पर नारेबाजी, तख्तियां, और हाथों में बैनर लिए महिलाएं “भ्रष्टाचार बंद करो” और “शराब बंदी लागू करो” जैसे नारे लगा रही हैं।
नशामुक्ति की मांग को लेकर भी ग्रामीणों का संघर्ष
भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के साथ ही ग्रामीणों ने नशामुक्ति अभियान को भी आंदोलन का हिस्सा बनाया है। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि बीते सात महीनों से वे शराबबंदी को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रही हैं, परंतु आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया।
महिलाओं का कहना है कि कच्ची शराब और हाथ भट्टी की वजह से गांव का माहौल बिगड़ चुका है। सस्ती और आसानी से उपलब्ध कच्ची शराब ने युवाओं को बर्बादी की राह पर धकेल दिया है। कई घर उजड़ चुके हैं, परिवारों में कलह बढ़ गई है, और मेहनत से कमाया पैसा नशे में बर्बाद हो रहा है।मातृशक्ति ने ठान लिया है कि अब वे पूर्ण शराबबंदी लागू करवा कर ही रहेंगी। धरना स्थल पर महिलाएं “हमारा गांव नशामुक्त बनेगा” जैसे नारे लगाकर अपनी एकजुटता दिखा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
धरने पर बैठी ग्रामीण महिला संगीता पुष्पकार ने कहा हमने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई कि गांव में कच्ची शराब की बिक्री बंद कराई जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब हम महिलाएं ही आगे आई हैं। जब तक गांव नशामुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त नहीं होता, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
धरना स्थल पर ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों की सूची भी तैयार की है, जिनमें शामिल हैं —
मृत रोजगार सहायक की आईडी से हुए फर्जीवाड़े की उच्च स्तरीय जांच।
सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और जनपद अधिकारियों पर तत्काल निलंबन व आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
मनरेगा के अंतर्गत हुए सभी भुगतानों का ऑडिट कराया जाए।
ग्राम पंचायत में सभी योजनाओं की सोशल ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।खेरमाई पहाड़ी में खेल मैदान की जांच -ग्राम पंचायत लफरा वृक्षारोपण की जांच -कच्ची नाली निर्माण लफरा से कटंगा टोला -कटूर् टैंक के कार्य की जांच ग्राम पंचायत लफरा के प्रभारी सचिव महासिंग मरावी के समय के सभी बिलो से निकली गई राशि की जांच की जाए और ग्राम की महिलाओं की मांग है कि गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाए।कच्ची शराब के निर्माण व बिक्री में संलिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।धरना स्थल पर ग्रामीणों की एकजुटता देखते ही बनती है। महिलाएं सुबह से शाम तक नारेबाजी और जनजागरण के गीत गा रही हैं। स्थानीय युवा भी मंच संचालन में सहयोग दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन अब केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं, बल्कि गांव की अस्मिता बचाने की लड़ाई बन चुका है।ग्राम पंचायत लफरा की यह लड़ाई अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश उफान पर है, तो दूसरी ओर नशामुक्त गांव की मांग ने इस आंदोलन को सामाजिक स्वरूप दे दिया है।
यदि प्रशासन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाता, तो यह धरना प्रदर्शन और बड़ा रूप ले सकता है। ग्राम पंचायत लफरा के लोग अब यह तय कर चुके हैं कि वे भ्रष्टाचार और नशे की जड़ें उखाड़ फेंकने तक चैन से नहीं बैठेंगे।

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