सरकारी राशन दुकान में बाहरी लोगों का डेरा 

 नियमों की खुलेआम धज्जियाँ, लाखों का अनाज जोखिम में

रेवांचल टाइम्स बम्हनी बंजर मंडला ग्राम पंचायत मुगदरा में संचालित सरकारी उचित मूल्य की राशन दुकान से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह खुलासा हुआ है कि इस सरकारी दुकान में हरियाणा से आए बाहरी व्यक्तियों ने डेरा जमा लिया है। ये लोग न केवल दुकान परिसर में ठहरे हुए हैं, बल्कि वहीं खाना बनाकर रह भी रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि दुकान की चाबी स्वयं सेल्समैन द्वारा इन बाहरी व्यक्तियों को सौंपी गई है।

बाहरी मजदूरों का डेरा राशन दुकान में सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुगदरा ग्राम की सरकारी राशन दुकान में हरियाणा राज्य से आए करीब दस से पंद्रह मजदूर अपने साथ दो हार्वेस्टर मशीनें लेकर आए हुए हैं। ये मजदूर आसपास के खेतों में फसल कटाई का कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इन सभी को मुगदरा निवासी  के कहने पर राशन दुकान में ठहराया गया है। यह भी खुलासा हुआ है कि दुकान के सेल्समैन द्वारा स्वयं चाबी देकर इन लोगों को दुकान में रुकने की अनुमति दी गई।इन मजदूरों ने दुकान के भीतर अस्थायी रसोई बनाकर खाना पकाने तक का काम शुरू कर दिया है। इस दौरान सरकारी राशन दुकान में रखे लाखों रुपये मूल्य के खाद्यान्न जिसमें गेहूं, चावल, नमक और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं  “अगर रात के वक्त कोई घटना घट जाती है या अनाज चोरी हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा

सेल्समैन पर मिलीभगत के आरोप

ग्रामवासियों ने  आरोप लगाते हुए कहा कि राशन दुकान के सेल्समैन की इन बाहरी मजदूरों से मिलीभगत है। बताया जा रहा है कि जिन हरियाणा के मजदूरों ने यहां डेरा जमाया हुआ है, वे खेतों में फसल की कटाई के दौरान सेल्समैन को कमीशन देते हैं। इसी आर्थिक लेन-देन के चलते उन्हें सरकारी राशन दुकान में रहने की अनुमति दी गई है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि राशन दुकान का अनाज इन मजदूरों के उपयोग में लाया जा रहा है, यानी सरकार द्वारा गरीबों के लिए भेजे गए खाद्यान्न का दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है।  “जब सरकार गरीबों के लिए अनाज भेजती है, तो उसका फायदा गांव के निर्धन परिवारों को मिलना चाहिए, लेकिन यहां तो बाहरी लोगों को ही सुविधा दी जा रही है।”

थाने में नहीं कराई गई मुसाफरी

सुरक्षा की दृष्टि से भी यह मामला बेहद गंभीर है। सूत्रों से जानकारी अनुसार   हरियाणा से आए इन मजदूरों की मुसाफरी (अस्थायी प्रवास की सूचना) स्थानीय थाने में दर्ज नहीं कराई गई है। जबकि नियमों के अनुसार, किसी भी बाहरी व्यक्ति को गांव या कस्बे में ठहराने से पहले उसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को दी जानी चाहिए।इस नियम का उल्लंघन न केवल सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी अनदेखी है। अगर इन लोगों में से किसी ने कोई अनुचित गतिविधि की या चोरी जैसी घटना हो गई, तो गांव की छवि खराब होगी

गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, सरकारी राशन दुकान वह जगह है जहां गरीबों का अधिकार रखा जाता है। अगर वहीं अनाज की सुरक्षा खतरे में है, तो हम किस पर भरोसा करें।

 

नियमों का उल्लंघन सरकारी दुकान में ठहरना सख्त मना

उचित मूल्य की राशन दुकानों के संचालन संबंधी नियमों के अनुसार, दुकान परिसर में किसी भी व्यक्ति को ठहरने या रहने की अनुमति नहीं होती। दुकान का परिसर केवल खाद्यान्न वितरण और भंडारण के लिए आरक्षित होता है।इसके बावजूद सेल्समैन द्वारा चाबी बाहरी लोगों को देना स्पष्ट रूप से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। यह कृत्य न केवल प्रशासनिक अपराध है बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से खिलवाड़ भी है।

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी सरकारी भंडार स्थल पर बिना अनुमति बाहरी व्यक्ति को ठहराया जाता है और वहां रखी सामग्री को क्षति पहुंचती है, तो जिम्मेदारी सीधे तौर पर दुकान संचालक या सेल्समैन की होती है भले ही इन लोगों को कुछ दिन ठहराने की मजबूरी रही हो, पर सरकारी संपत्ति का इस तरह उपयोग करना गलत है। नागरिक आपूर्ति  सरकारी राशन दुकानें सुरक्षित रहें और उनमें रखे गए खाद्यान्न का वितरण केवल पात्र परिवारों को ही किया जाए।संभावित कानूनी कार्रवाई में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला धारा 409 (सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग) और धारा 120B (साजिश) के तहत आपराधिक मामला बन सकता है। साथ ही, खाद्य विभाग के नियमों के अंतर्गत संबंधित सेल्समैन की लाइसेंस रद्द करने की भी कार्रवाई की जा सकती है।

मुगदरा ग्राम पंचायत की यह घटना सरकारी व्यवस्था की एक गंभीर खामी को उजागर करती है। गरीबों के लिए संचालित राशन दुकानों का उपयोग निजी लाभ के लिए किया जाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक नैतिकता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक प्रशासनिक निगरानी मजबूत नहीं होगी और जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक इस तरह की घटनाएँ रुकने वाली नहीं हैं।

ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इनका कहना

ग्राम पंचायत मुगदरा में शासकीय उचित मूल्य दुकान में दो हारबेस्टर वाले दस से पंद्रह लोग रुके हुए है शासकीय दुकान में नही रुक सकते ।

विवेक नामदेव स्थाई निवासी मुगदरा

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