पढ़ने लिखने की उम्र में शाला प्रबंधन ने थामा दिया चुल्हा
शाला के मासूम बच्चों से बनवाया जा रहा मध्यान्ह भोजन: शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले के विकास खण्ड बिछिया क्षेत्र के ग्राम पड़रिया स्कूल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जहाँ पढ़ने के लिए पहुँचे बच्चों से स्कूल परिसर में चूल्हा जलवा कर खाना बनाने की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। सोशल मीडिया में वायरल फोटो में स्पस्ट नजर आ रहा है कि स्कूल की ड्रेस में बच्चे भवन के पास ही लकड़ी लाकर चुल्हा जला कर उसमें कुछ पका रहे हैं और जिम्मेदार शिक्षक और समूह के कोई भी नजर नही आ रहें हैं
वही सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार बिछिया के शासकीय एकीकृत माध्यमिक एवं प्राथमिक शाला, ग्राम पंचायत पड़रिया (जनपद क्षेत्र बिछिया) में पढ़ने वाले नन्हे-नन्हे विद्यार्थियों से मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) बनवाए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि स्कूल प्रशासन, संबंधित शिक्षकों और मध्याह्न भोजन संचालन समिति की गंभीर लापरवाही को भी उजागर करती है।
कक्षा की जगह रसोई में दिखे बच्चे
वही अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कई बार बच्चे कक्षा में पढ़ाई करने के बजाय रसोईघर में सब्जी काटते, बर्तन धोते और भोजन पकाते बर्तन धोते देखे गए। और जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उनसे चूल्हा-चौका कराया जाना शिक्षा व्यवस्था के मूल उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत है। और कही इन बच्चों के साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो जिम्मेदार कौन होगा
स्कूल प्रशासन और MDM व्यवस्था पर उठे सवाल
मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना और उनकी स्कूल उपस्थिति बढ़ाना है। लेकिन इस शाला में बच्चों से ही भोजन बनवाना योजना के क्रियान्वयन में गंभीर गड़बड़ी का संकेत देता है।
शाला प्रशासन की स्पस्ट लापरवाही साफ झलकती है शिक्षकों की जिम्मेदारी पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न जहाँ मध्याह्न भोजन समिति की निष्क्रियता उजागर हो रही हैं जनपद शिक्षा विभाग की निगरानी पर भी सवाल खड़े
अभिभावकों ने जताई नाराज़गी
वही स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने स्कूल भेजते हैं, न कि घर का काम करने। बच्चों से भोजन बनवाना न सिर्फ गलत है बल्कि यह विद्यालयीन अनुशासन और सरकारी व्यवस्था की खुली अनदेखी है।
क्या होगी कार्यवाही?
वही मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सक्षम अधिकारी इस गंभीर लापरवाही करने वाले जिम्मेदारो पर क्या कार्रवाई करते हैं। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामले शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते रहेंगे। और अपना भविष्य सवारने वाले नवनिहाल का भविष्य इन रसूखदारों के कारण अंधकार में रह सकता क्योंकि पढ़ाई लिखाई की उम्र में मासब ने चूल्हा जलाना और खाना बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।