अमरवाड़ा स्टेट बैंक पर उठे सवाल; 120 पीड़ित महिलाओं की शिकायत पर पुलिस जांच में लिया
दैनिक रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा |छिंदवाड़ा जिले की तहसील अमरवाड़ा में एक बड़े बैंकिंग घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की लगभग 120 अनपढ़ महिलाओं के नाम पर आठ फर्जी स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाकर लाखों रुपए का बैंक लोन उठा लिया गया है। इस पूरे जालसाजी का आरोप सिमरिया ग्राम की एक महिला, रिजवाना पति मस्जिद खान, पर लगा है।
कैसे हुआ खुलासा?
मामला तब सामने आया जब सिमरिया की कुछ ग्रामीण महिलाओं ने नई सरकारी योजनाओं के लिए समूह बनाने हेतु आवेदन किया। स्टेट बैंक अमरवाड़ा के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके नाम पर तो पहले ही समूह बन चुके हैं और उन पर लाखों रुपए का कर्ज भी लिया जा चुका है। यह खबर सुनते ही महिलाओं के पैरों तले जमीन खिसक गई।
सूत्र बताते हैं आरोपी रिजवाना ने कथित तौर पर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से यह घपला किया। अनपढ़ ग्रामीणों की पासबुक और सारे कागजात उसी के पास होने के कारण किसी को भी कानो-कान खबर नहीं लगी। समूहों से ₹3 लाख से लेकर ₹8 लाख तक की अलग-अलग राशियों का लोन लिया गया है।
बैंक की भूमिका पर संदेह
पीड़ित 120 महिलाओं ने एकजुट होकर आरोपी रिजवाना के खिलाफ थाना अमरवाड़ा में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उस पर कानूनी कार्रवाई करने और उनके नाम पर लिए गए कर्ज की वसूली उससे करने की मांग की गई है।
इस गंभीर मामले में स्टेट बैंक अमरवाड़ा के अधिकारी संदिग्ध भूमिका निभा रहे हैं। जब इस संबंध में बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक संजय श्रीवास्तव चर्चा की गई तो उन्होंने बताया मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं आया है और यदि ऐसा होता है तो जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्यवाही होगी l
ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि बैंक में जाकर भी उन्हें यह जानने से रोका जा रहा है कि किसके नाम पर कितना लोन लिया गया है। बैंक अधिकारी जानकारी देने से कतरा रहे हैं, जिससे उनकी मिलीभगत की आशंका और मजबूत होती है।
शनिवार को सिमरिया ग्राम की 120 पीड़ित महिलाएं (जो अमरवाड़ा से 9 किलोमीटर दूर से पैदल चलकर आई थीं)
अमरवाड़ा थाना प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने बताया शिकायत आई है और जांच जारी है जांच के बाद ही खुलासा हो पाएगाl
ग्रामीण क्षेत्रों की अनपढ़ महिलाओं को समूह के नाम पर ठगा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक को इसका तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और निष्पक्ष जांच करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाना चाहिए, साथ ही बैंक की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।