पत्रकारिता शर्मसार: देश का चौथा स्तंभ बनी निशाने पर

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पत्रकारिता हो रही है शर्मसार
देश का चौथा स्तंभ हो रहा है बदनाम
देश का चौथा स्तंभ खतरों पर

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, देश और दुनिया को यदि कोई सच रूपी आईना दिखाने का काम करता है तो वो होता है पत्रकार एक सच्चा पत्रकार कभी भी अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होता वह हमेशा ही अपने और अपने परिवार को खतरों में डाल देश दुनिया को सच दिखाने का काम करता है। देश की आजादी से लेकर उसके बाद तक में सच्चे और सच्चे साफ छबि वाले पत्रकारों ने हमेशा ही अपने अपने युगों में चाटूकारिता न करते हुए निर्भीक निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता करते हुए समाज को सच रूपी आईना दिखाने का काम किया हैं। पर आज के आधुनिकवादी और भौतिक वादी इस युग में जब आम लोगों के पास में समय का अभाव होता है। उसके बाद में भी अपने अपने घरों पर दफ्तरों से लेकर भागमभग वाली इस जिंदगी में सोशल मीडिया या मोबाइल फोन के माध्यम से ही कम समय पर अधिक से अधिक समाचारों को संकलित कर अपनी जिज्ञासाओं की पूर्ति करता हैं। और अधिक से अधिक लोगों तक उस समाचार या खबरों को दूसरों तक अग्रसित करता हुआ दिखाई देता हैं। यह सच है या झूठ इससे दूर होता जा रहा हैं।
वही पत्रकार देश दुनिया का चौथा स्तंभ से जवाजा जाता है। जैसे सेना का एक सच्चा जवान बॉर्डर की रक्षा करते अपनी जान देने से पीछे नही हटाता वैसे ही सच्चे एक सच्चा पत्रकार लोकतंत्र को बचाने स्वस्थ रखने और समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए किसी अधिकारी कर्मचारी या मंत्री मिनिस्टर के आगे झुकना पसंद नही करते हैं, देश में एक एक सच्चे पत्रकार की आवश्यकता हमेशा ही होती हैं। उसका कर्त्तव्य होता है कि जनता के हित के लिए सरकार और जिला प्रशासन में बैठें जिम्मेदारों से सवाल करना होता है। और सरकार वा जिम्मेदारों से मिली जानकारी को पारदर्शिता से समाज तक पहुंचाना होता है। जनता को सूचित करना और सामाजिक मुद्दों पर निगरानी रखना होता है। लेकिन जब वही चौथा स्तंभ का मतलब बदलता दिखाई पड़ता जा रहा हैं लोग इसे अपने घर बार चलाने का जरिया बनाने लगे हैं और पत्रकारिता को कलंकित करते हुए पत्रकारिता की दुकानें सजने लगी है जो आज हर दूसरे वाहनो में प्रेस या मीडया लिखा आसानी से देखा जा सकता हैं और वह अपने निजि वाहनों में प्रेस लिख कर एक सूत्रीय अभियान करते हुए चाटूकारिता और मुखौटा लगाए कुछ यूट्यूबर और वेबपोर्टल पत्रकार अपनी दो पहिया और चार पहिया वाहनों में मोनो चिपका कर प्रेस लिखा कर ग्राम पंचायतों का दौरा करते हुए सरपंच सचिव या फिर धान ख़रीदी केंद्रो और चल रहे सरकारी काम काजो सहित छोटे मोटे कर्मचारियों से और नेताओं के सामने मुंह फाड़ खुद को अपने आप को पत्रकार बोल कर गलत तरीके से खर्चा पानी या फिर छोटी मोटी गलती निकाल कर उन्हें पत्रकारिता का रौव दिखाते हुए अवैध वसूली जैसे कामों पर लग जाते हैं तो निश्चित ही फिर समझिए इस देश प्रदेश और जिले की पत्रकारिता और देश के चौथे स्तंभ को गर्द में जा रहा है और वह कलंकित करने के लिए काफ़ी हैं। और ऐसे पत्रकार शहर से लेकर गांव के कस्बों तक दिखाई पड़ रहे है जो अपनी रोजी रोटी चलाने निकल पड़ते है जो अब जनता भी उन्हें समझने लगी हैं।

सर, आप ही खर्चा दे दो..

जगह जगह अपने आप को पत्रकार बतला कर खर्चा पानी के नाम से अवैध वसूली करना और नेताओं के साथ ही जिम्मेदारों के सामने सवाल न करते हुए अपनी हजारी देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करना आज ऐसे ही लोगों के कारण पत्रकार जगत शर्मशार हो रहा है। इनकी कायराना करतूतों से जनता का पत्रकारों के ऊपर से विश्वास उठता जा रहा है।
विगत दिनों ऐसा ही कुछ नज़ारा देखने को मिला जब मंडला जिले की बीजाडांडी थाने के अंतर्गत बुदरा पंचायत की जनता आज भी बोलती है। मंडला से आए कुछ पत्रकारों को पंचायत पर हुए घपलों और घोटालों की जानकारी दी गई, लेकिन आज दिनांक तक न खबर देखने को मिली और न ही सुनने और न ही पढ़ने को मिली और न ही आज तक संबंधित पंचायत पर कोई कार्यवाही हुई ऐसे नाम मात्र के पत्रकार जो पत्रकारिता को कलंकित हुए केवल जुगाड़ करने में लगे हैं
इन दिनों मंडला में पत्रकारिता का मुखौटा लगा कर पत्रकारिता के नाम से कुछ यूट्यूबर और वेबपोर्टल पत्रकार गांव-गांव घूम-घूमकर जानकारी बटोर पैसा बटोरो अभियान चला रहे है। जैसे तेसे जनता का विश्वास जीत कर उनके मन में एक विश्वास पैदा कर अपना उल्लू सीधा करने का काम किया जा रहा हैं। तरोताजा मामला थाना बीजाडांडी का है, जहाँ पर पुलिस थाना के सामने पुलिस विभाग के द्वारा हेलमेट चैकिंग चल रही थी करीब साढ़े चार बजे एक हल्के पीली कलर कि स्कूटी थाने के सामने आकर के रुकती हैं। दो पहिया वाहन के सामने प्रेस लिख मोनो चिपका कर स्कूटी से दो लोग उतर कर के आते हैं और जांच करने वाले ए.एस.आई साहब से पूछते हैं आपके टीआई सर कहा पर है..? बदले में जबाब मिलता हैं मनेरी गए हुए है। इसके बाद पत्रकार महोदय के द्वारा ए.एस.आई साहब से बोला जाता है कि सर नहीं तो आप ही खर्चा पानी दे दो जबाब मिला बड़े साहब से बात करो.. फिर पत्रकार बंधु बोलते है कि नंबर दीजिये। टी.आई सर का नंबर मिलने के बाद में पत्रकार ने तुरंत ही फोन किया थाना कप्तान ने रिसीव किया पत्रकार बोला में मंडला से फलाने न्यूज चैनल से हूँ थाना प्रभारी ने बोला कोई मामला है क्या.. पत्रकार नहीं सर दिवाली में नहीं आया था…सोचा आज मिल लु.. ठीक है सर जब भी मंडला आऊंगा फोन कर लूंगा एक और मामला है। वहीं मंडला में कुछ सर्प मित्र भी हैं जो सर्प पकड़ने का काम करते थे अब वह धन्धा चला नही तो सोचे कि चलो पत्रकार बन जाओ इसमें अच्छी कमाई है और अपने आप को पत्रकार बतला कर अवैध वसूली जैसे कामों पर लगे हुए है।
जिले में यदि अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक और नेताओं के साथ अधिकारियों के चरण चुंबन न करने वाले पत्रकारों की गिनती की जाए तो मात्र कुछ अंगुलियों में ही उनकी गिनती दिखाई देगी। जो चौथे स्तंभ की गरिमा बनाये हुए हैं बाकी सब अपनी अपनी रोजी रोटी सेकने में लगे हुए है और जिले में जितने पत्रकारो का रिकॉर्ड जिला जनसंपर्क कार्यालय नाम नही उनसे ज्यादा सड़कों और गांवों में माइक आईडी लेकर घूम रहें हैं।
वही जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से मांग है कि ऐसे बिना रजिस्ट्रेशन वाले यूट्यूब चैनल व वेबपोर्टल वाले पत्रकारों की जाँच करते हुए वैधानिक व दण्डात्मक कार्यवाही की जाए जिससे सच्चे और अच्छे साफ छवि वाले पत्रकारों को अपने आप को पत्रकार बताने में शर्म महशूस न हो बल्कि वह अपना काम ईमानदारी से करे और जनता और सरकारी संस्थानों में उपस्थित दर्ज करवाकर ख़र्चा पानी वाले पत्रकारों की जाँच जानी आवश्यक हैं। जिससे स्तंभ कहे जाने वालों की गरिमा बनी रहे।

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