मंडला में खुलेआम बिक रही अवैध शराब!
शासन-प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल — आखिर कब थमेगा यह गोरखधंधा?

रेवांचल टाईम्स – मंडला, पवित्र नगरी मंडला को मैला करने की शराब ठेकेदारों ने कसम खा कर कमर कस ली है क्योंकि इस जिले में क़ानून व्यवस्था बद से बत्तर हो चुकी है और शराब माफियाओं के आगे सब के सब हाथ बांधे नजर आ रहे है शायद आज बन्द के बाद देशी विदेशी शराब लाइसेंसी दुकानो से निकल मंडला नगर और उपनगर और हाईवे में संचालित ढाबों में बड़े ही आसानी से परोसी जा रही हैं।
हम मध्यप्रदेश के मंडला जिला इन दिनों अवैध गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है। जुआ, सट्टा और अवैध शराब रेत बिक्री का कारोबार इतने खुलेआम चल रहा है कि ऐसा लगता है मानो कानून यहां छुट्टी पर चला गया हो।
वही पवित्र नगरी मंडला, जहां शराब विक्रय पर प्रतिबंध है, वहीं आज हर गली-मोहल्ले में शराब की खुलेआम बिक्री हो रही है। दुकानों, ठेलों, यहां तक कि घरों में भी शराब का धंधा चल रहा है, और आप अपने घर मे ही रहे और बस एक कॉल करें शराब आपके द्वार वाला अभियान चल रहा हैं साथ ही जो शराब आपको ठेका में 1200 में मिलेगी वह आपको घर पहुँच कर 900 में मिल जायेगी ये कैसे संभव है ठेका में महँगी शराब ही घर मे सस्ती मिल रही शराब और ये सब जिला प्रशासन और पुलिस विभाग आबकारी विभाग के गठबंधन से अबैध शराब का कारोबार तेजी से नगर उपनगर और हाईवे के किनारे संचालित ढाबों फल फूल रहा है और जिस कारण से नेशनल हाईवे तीस में लगातार लोगो की मौत का सिलसिला जारी है क्योंकि जिम्मेदार मूकदर्शक बन बैठे है।
ग्रामीण इलाकों में हालात और भी भयावह हैं। ठेकेदारों और सप्लायरों का नेटवर्क गांव-गांव तक फैला है। रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और पिकअप से शराब की खेप उतरती है, लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग को इसकी “खबर” तक नहीं होती या यूं कहें कि वे जानबूझकर अनजान बने हुए हैं।
वही स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सारा कारोबार पुलिस और आबकारी विभाग के “संरक्षण” में फलफूल रहा है। सवाल उठ रहा है, आखिर जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने नर्मदा नदी को जीवंत और जीवन दायनी का दर्जा दिया है और वर्तमान में प्रदेश में सरकार भी भाजपा की ही है इसके बावजूद आज गली गली माँ नर्मदा के दोंनो तटों में कुचिया और ढाबों में खुलेआम शराब परोसी जा रही है और यह सब को नजर आता है पर केवल कार्यवाही करने वाले विभागों को यह कहि कुछ नज़र नही आ रहा है अखिर क्योंकि इसके पीछे में लोगों के अलग अलग तर्क है और जनता यह भी जानना चाह रही हैं कि वह कौन ताकतवर है जिसकी शह या छत्रछाया में यह गोरखधंधा चल रहा है? शराब से घर टूट रहे हैं, परिवार बर्बाद हो रहे हैं, युवा पीढ़ी नशे की जकड़ में फंसती जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन की नींद नहीं टूट रही।आबकारी विभाग, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन, तीनों की चुप्पी अब संदिग्ध बन चुकी है।
न तो कोई छापेमारी, न कार्रवाई, न नियंत्रण, बस बयानबाजी और औपचारिकता।
जनता पूछ रही है, क्या मंडला को नशे के दलदल में धकेलना ही सरकार की नीति बन चुकी है?
आज मंडला की पवित्रता को नशे की दुर्गंध निगल रही है।
जनता की मांग साफ है —
शराब माफियाओं पर तुरंत सख्त कार्रवाई हो, हर गांव-नगर में अवैध विक्रय पर रोक लगे, और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अब जनता का सब्र टूटने लगा है, अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो सड़क पर उतरकर जवाब मांगा जाएगा।