जिले का प्रमुख तीर्थ स्थल त्रिवेणी संगम बदहाल,

मकर संक्रांति पर कीचड़ वाली जगह पर स्नान को मजबूर होंगे श्रद्धालु

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रेवांचल टाइम्स मंडला महाराजपुर उपनगर स्थित जिले का प्रमुख तीर्थ स्थल त्रिवेणी संगम इन दिनों बदहाली का शिकार बना हुआ है। प्रतिवर्ष जनवरी माह में मकर संक्रांति पर्व पर यहां स्नान-डुबकी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इसी अवसर पर विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन पर्व और मेले में अब बहुत कम समय शेष रहने के बावजूद संगम घाट में किसी भी प्रकार की तैयारी शुरू नहीं की गई है, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी जा रही है।त्रिवेणी संगम घाट पर पूर्व में पक्की सीढ़ियों का निर्माण कराया गया था, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में सुविधा मिल सके। लेकिन नगर पालिका की उदासीनता के चलते साफ-सफाई और रखरखाव का कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। पक्के घाट पूरी तरह मिट्टी और कीचड़ में दब चुके हैं। घाटों पर जमी गंदगी के कारण श्रद्धालुओं को स्नान करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि समय रहते सफाई नहीं की गई तो मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालुओं को कीचड़ वाली जगह में स्नान करने को मजबूर होना पड़ेगा।स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर रंग-रोगन और मरम्मत की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जगह-जगह जमा कीचड़ दुर्घटना को भी न्योता दे रही हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जो चिंता का विषय है।त्रिवेणी संगम केवल स्नान और मेले का ही नहीं, बल्कि अस्थि विसर्जन का भी प्रमुख स्थल है। दूर-दराज से लोग अपने परिजनों की अस्थियों का विसर्जन करने यहां आते हैं। बावजूद इसके, प्रमुख मार्गों और घाट क्षेत्र में दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। अस्थायी दुकानें और ठेले लगने से रास्ते संकरे हो गए हैं, जिससे आम लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। कई बार तो श्रद्धालुओं को भीड़ और अव्यवस्था के चलते परेशानियों का सामना करना पड़ता है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका और संबंधित विभागों को अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मकर संक्रांति मेले के अलावा आगामी दिनों में इसी तीर्थ स्थल पर नर्मदा जयंती महोत्सव का भी आयोजन होना है। ऐसे में यदि अभी से व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है।श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगो ने मांग की है कि त्रिवेणी संगम घाट की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, पक्के घाटों से मिट्टी हटाई जाए और रंग-रोगन सहित आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा किया जाए। साथ ही अतिक्रमण हटाकर मार्गों को सुगम बनाया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।लोगों का कहना है कि त्रिवेणी संगम जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे पवित्र स्थल की उपेक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी जागरूक नहीं हुए तो मकर संक्रांति और नर्मदा जयंती जैसे पावन पर्व पर आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंच सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक नींद से जागकर इस महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल की सुध लेता है।

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