लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मौन…? नल–जल योजना के ट्रांसफार्मर से अवैध बिजली कनेक्शन!

नैनपुर के परसवाड़ा में खुला भ्रष्टाचार का नया पिटारा — जिम्मेदार विभाग चुप, जनता हतप्रभ

रेवांचल टाईम्स – मंडला यदि प्रशासनिक अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों का ‘खजाना’ कहीं तलाशना हो, तो मंडला जिला आज भी दुर्भाग्य से शीर्ष पर खड़ा है। सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा, नियमों की धज्जियां और विभागीय मिलीभगत—यहां सब कुछ खुलेआम हो रहा है। ताज़ा मामला नैनपुर तहसील के ग्राम परसवाड़ा से सामने आया है, जहां जल जीवन मिशन के तहत लगाई गई नल–जल योजना के ट्रांसफॉर्मर से ही अवैध रूप से विद्युत कनेक्शन जारी कर दिए गए।

सूत्रों के अनुसार, बिजली विभाग के अधिकारियों ने इस ट्रांसफार्मर को मानो निजी संपत्ति समझ लिया हो—जहां मन आया, जैसे मन आया कनेक्शन दे दिए, और इसके लिए न तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHED) विभाग की अनापत्ति ली गई और न ही ग्राम पंचायत की ग्रामसभा से कोई सहमति!
बड़े सवाल, मगर विभागों ने साधी चुप्पी
क्या बिजली विभाग ने PHED से लिखित NOC लिया?
क्या ग्राम पंचायत से प्रावधान अनुसार ग्रामसभा की सहमति प्राप्त की गई?

यदि नहीं—तो किस अधिकार से नल–जल योजना का ट्रांसफॉर्मर ‘सामान्य उपयोग’ में लगा दिया गया?

इन सवालों का जवाब न बिजली विभाग दे रहा है, न PHED और न ही जनपद स्तर के अधिकारी। पूरा विभाग मौन है, मानो सब कुछ ‘सेटिंग’ के तहत हुआ हो।

भ्रष्टाचार की बू तेज, कार्रवाई ‘शून्य’

ग्रामवासियों का कहना है कि यह साफ–साफ सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग है। नल–जल योजना के लिए लगाए गए ट्रांसफॉर्मर को गांव की पेयजल आपूर्ति के लिए सुरक्षित रखा जाता है, लेकिन यहां इसे अवैध कनेक्शन बांटने का माध्यम बना दिया गया, जो न केवल बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है बल्कि भविष्य में गांव की जलापूर्ति को भी खतरे में डाल सकता है।
जनता का आरोप है कि,
“सरकारी योजनाओं के उपकरणों का उपयोग करके निजी लोगों को लाभ पहुँचाया जा रहा है, और अधिकारी इस पूरे खेल में शामिल दिखाई दे रहे हैं।”

कठोर कार्रवाई की मांग

ग्रामवासियों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और इसमें शामिल बिजली विभाग के अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह का खुला भ्रष्टाचार अनदेखा किया गया, तो नल–जल योजना का पूरा ढांचा खतरे में पड़ सकता है।

वही मंडला जिले में एक बार फिर यह मामला साबित करता है कि
“यहां योजनाएँ कम और गड़बड़ियाँ ज़्यादा चल रही हैं।

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