गुरु तेग बहादुर न होते, तो न हिंदू बचता और न ही सिख’ : छिंदवाड़ा में विशाल ‘वीर बाल पथ संचलन

​शहीदी दिवस और वीर बाल दिवस पर संघ का आयोजन; साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान को दी गई श्रद्धांजलि

​ *रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा*
जितेन्द्र अलबेला
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) छिंदवाड़ा जिला बालकार्य विभाग द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस एवं वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को विशाल ‘वीर बाल पथ संचलन’ का आयोजन किया गया। पुलिस ग्राउंड से शुरू हुए इस संचलन में बाल स्वयंसेवकों का अनुशासन और जोश देखने लायक था।
​नगर में हुआ भव्य स्वागत
​जिला बाल कार्य प्रमुख ठा. राजा सिंह राजपूत ने बताया कि संचलन दोपहर 3 बजे पुलिस ग्राउंड से प्रारंभ होकर अमित ठेंगे चौक, इंदिरा तिराहा, डॉ. अम्बेडकर चौक (सत्कार तिराहा), बीएसएनएल ऑफिस और इंडियन कॉफी हाउस होते हुए पुनः पुलिस ग्राउंड पर समाप्त हुआ। मार्ग में जगह-जगह समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा पुष्पवर्षा और आतिशबाजी कर संचलन का भव्य स्वागत किया गया।
*​गुरु तेग बहादुर जी हैं ‘हिंद की चादर’ : वेदप्रकाश तिवारी*
​संचलन के पश्चात पुलिस ग्राउंड में आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता एवं सतपुड़ा विधि महाविद्यालय के प्राचार्य वेदप्रकाश तिवारी ने कहा, “गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगजेब के जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए अपना शीश बलिदान कर दिया। यदि वे न होते, तो आज न हिंदू बचता और न ही सिख। उनका त्याग पूरे भारत की आत्मा को बचाने के लिए था, इसीलिए उन्हें ‘हिंद की चादर’ कहा जाता है।”
​साहिबजादों का बलिदान इतिहास में अद्वितीय
​तिवारी ने दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों के शौर्य का स्मरण कराते हुए कहा कि चमकौर के युद्ध में बड़े साहिबजादे अजीत सिंह और जुझार सिंह वीरता से लड़ते हुए शहीद हुए। वहीं, मात्र 7 और 9 वर्ष की आयु में जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने दीवार में जिंदा चुने जाना स्वीकार किया, लेकिन अपना धर्म और स्वाभिमान नहीं छोड़ा। यह बलिदान आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।
*​इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति*
​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गुरुद्वारा प्रबंध कार्यकारिणी के सचिव अजिन्दर सिंह बेदी और नगर संघचालक राजेंद्र वर्मा उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभाग प्रचारक लखन सिंह, अंशुल शुक्ला, अमोल डबली, सीताराम शर्मा, सुनील सिंधिया, मनोज मिश्रा, धनंजय यादव सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, मातृशक्ति और गणमान्य नागरिक मौजूद थे। कार्यक्रम के अंत में सभी को प्रसाद स्वरूप ‘रामखिचड़ी’ का वितरण किया गया।

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