उदय चौक,बड़चौराहा मार्ग पर रोजाना जाम का संकट
संकरे पुल और अव्यवस्थित बाजार बने सबसे बड़े कारण, आमजन परेशान

रेवांचल टाईम्स – मंडला, नगर पालिका के सुस्त रवैय्या से नगर वासियों के गुस्सा धीरे धीरे पनप रहा है लोगों की माने तो बीते कुछ दिनों से नगर पालिका प्रशासन कोमे में चलने के करण नगर के अंदर की स्थिति बद से बत्तर होते जा रही है, कोई भी सुविधाएं नगर पालिका से लोगो को मिल पा रही है और वसुली अभियान धडल्ले चल रहा है न ही नगर में चलने को व्यवस्था है और न ही वाहनों की पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित की गई और जिला चिकित्सालय पहुँचने के लिये दो मात्र मार्ग है और दोनों में अतिक्रमण कारियो ने कब्जा जमाए हुए है आये दिन एंबुलेंस आने जाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करते निकलना पड़ता हैं, शहर का अत्यंत व्यस्त उदय चौक–बड़ाचौराहा मार्ग इन दिनों लगातार जाम की समस्या से जूझ रहा है। यह मार्ग न केवल नर्मदापार क्षेत्र को शहर से जोड़ता है, बल्कि सराफा, किराना, चिकित्सा प्रतिष्ठानों और बुधवारी बाजार की वजह से दिनभर भारी यातायात दबाव झेलता है। अंग्रेजी काल में निर्मित संकरा पुल अब बढ़ती आबादी और वाहन संख्या के मुकाबले पूरी तरह अक्षम साबित हो रहा है।
संकरे पुल से यातायात व्यवस्था चरमराई—10–15 मिनट तक फँसते वाहन
पुराना पुल मात्र दोपहिया और सीमित चारपहिया वाहनों के लिए उपयुक्त था, लेकिन अब भारी यातायात में यह बाधा बन चुका है। पुल पर एक बार में बड़े वाहन के चढ़ते ही दोनों ओर लंबी कतारें लग जाती हैं।
स्थानीय नागरिक बताते हैं—
“एक मिनट में पार होने वाला पुल अब 10–15 मिनट लेता है। गर्मी, धूप और बदबू के बीच खड़ा रहना मजबूरी बन गया है।”
स्कूली बच्चों, कॉलेज छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को रोजाना जाम का सामना करना पड़ रहा है।
दुकानों की अव्यवस्थित पार्किंग ने बढ़ाई दिक्कत
पुल के दोनों छोर पर अव्यवस्थित तरीके से लगी दुकानें, सड़क किनारे खड़े दोपहिया वाहन, और खरीदारी के दौरान जमा होने वाली भीड़ सड़क को और संकरा कर देती हैं। कई बार दुकानदार अपने माल को भी सड़क किनारे रख देते हैं, जिससे मार्ग और भी बाधित हो जाता है।
यातायात विभाग द्वारा समय-समय पर चलाए जाने वाले हटाओ-और-छोड़ो अभियान का असर भी स्थायी नहीं हो पा रहा है।
नर्मदापार क्षेत्र का सबसे प्रमुख मार्ग—एंबुलेंस तक फँसती
नर्मदापुर, बुधवारी और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोग इसी मार्ग से शहर में प्रवेश करते हैं। अस्पताल, बैंक और बाजार की निकटता इसे और महत्वपूर्ण बनाती है।
एंबुलेंस के फँसने की घटनाएँ भी लगातार सामने आ रही हैं। नागरिक बताते हैं कि कई बार मरीजों को अस्पताल पहुँचने में 10–20 मिनट की अतिरिक्त देरी हो जाती है, जो आपात स्थिति में खतरनाक साबित हो सकती है।
विकास योजनाओं में उपेक्षा का आरोप—“वर्षों से हो रहा है वादा, लेकिन समाधान नहीं”
व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से पुल चौड़ीकरण या नए पुल की आवश्यकता जताई जा रही है, परंतु अभी तक केवल सर्वे, प्रस्ताव और चर्चा तक ही सीमित रहा है।
कई बार जनप्रतिनिधियों द्वारा आश्वासन दिए गए, लेकिन वास्तविक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
बारिश के मौसम में और बिगड़ जाते हालात
मानसून के दौरान पुल क्षेत्र में जलभराव और फिसलन की स्थिति बन जाती है। संकरी सड़क पर फिसलने की आशंका के चलते वाहन और धीमे चलने लगते हैं, जिससे जाम दोगुना हो जाता है। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, बारिश में जाम लगने का समय 20 मिनट तक पहुंच जाता है।
नागरिकों की चार प्रमुख माँगें—समाधान अब आवश्यक, विकल्प नहीं
नगर पालिका क्षेत्र में लगातार बढ़ती परेशानी से त्रस्त नागरिकों ने प्रशासन से निम्न प्रमुख माँगें उठाई हैं—
पुराने पुल का चौड़ीकरण या बिल्कुल नया चौड़ा पुल बनाया जाए
दुकानों के सामने लगने वाली अव्यवस्थित पार्किंग पर सख़्त नियंत्रण
अवैध रूप से फैलाए गए दुकान-सामान का पुनर्गठन और नियमित निगरानी
नर्मदापार क्षेत्र के लिए एक वैकल्पिक मार्ग का तत्काल विकास
नागरिकों का कहना है कि दूसरी सड़क बनने से यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा और शहर को दीर्घकालिक राहत मिलेगी।
प्रशासन से उम्मीद—अब फैसला चाहिए, आश्वासन नहीं”
शहरवासियों का कहना है कि यह मार्ग अब केवल यातायात नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं का संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। यदि इसी तरह स्थिति बिगड़ती रही तो आने वाले वर्षों में यह मार्ग शहर की सबसे गंभीर समस्या बन सकता है।
वही जनता को उम्मीद है कि नगर परिषद और जिला प्रशासन इस विषय को प्राथमिकता में लेकर स्थायी और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।शहर के विकास के लिए यह सड़क अब निर्णायक साबित होगीबदलाव जितना जल्द होगा, राहत उतनी ही बड़ी मिलेगी।