श्री सिद्धेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब

शुभ-लाभ के जन्म प्रसंग पर झूमे भक्त,

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रेवांचल टाइम्स महाराजपुर मंडला सुरंगदेवरी स्थित सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र श्री सिद्धेश्वर धाम में इन दिनों श्री गणेश पुराण कथा के माध्यम से भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। इस भव्य आयोजन के सातवें दिन भगवान श्री गणेश के दिव्य चरित्र का वर्णन सुनने के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास पंडित ललित नारायण मिश्रा ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान गणेश के पारिवारिक स्वरूप और उनके पुत्रों शुभ और लाभ के जन्म की कथा सुनाकर भक्तों को भावविभोर कर दिया।
सातवें दिन की कथा के विश्राम पर धाम में दिव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इसके बाद विशाल भंडारे में हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने कतारबद्ध होकर अत्यंत श्रद्धा के साथ प्रसादी ग्रहण की। सिद्धेश्वर धाम समिति ने बताया कि 5 जनवरी को कथा का विधिवत समापन होगा, जिसके लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
शुभ लाभ सुख और संपन्नता का प्रतीक
पंडित ललित नारायण मिश्रा ने कथा के दौरान शुभ-लाभ के जन्म और वामदेव की कथा के प्रसंग को विस्तार से बताया। जिसमें बताया कि भगवान गणेश का विवाह प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियों रिद्धि और सिद्धि से हुआ था। शास्त्रानुसार रिद्धि से शुभ और सिद्धि से लाभ का जन्म हुआ। गणेश जी बुद्धि के देवता हैं। जब मनुष्य की बुद्धि (गणेश) के साथ ऋद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (सफलता) जुड़ती है, तभी जीवन में शुभ और लाभ का आगमन होता है। यही कारण है कि किसी भी मांगलिक कार्य में द्वार पर शुभ-लाभ लिखा जाता है, जो सुख और संपन्नता का प्रतीक है।
विघ्रहर्ता की शरण में टल जाते है संकट
कथा के दौरान ऋषि वामदेव के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि कैसे उन्होंने भगवान गणेश की महत्ता को समझा। वामदेव जी ने तपस्या और गणेश तत्व के ज्ञान से यह सिद्ध किया कि विघ्नहर्ता की शरण में जाने से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं। यह प्रसंग अहंकार त्याग और पूर्ण समर्पण की सीख देता है।विधि विधान से होगा समापन पंडित ललित नारायण मिश्रा ने विसर्जन की शास्त्रीय विधि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कथा के अंतिम दिन ब्राह्मणों का पूजन और कन्या भोज अत्यंत आवश्यक है। पुराण की पोथी को ससम्मान मस्तक पर रखकर शोभायात्रा निकाली जानी चाहिए। अंत में दान-पुण्य और क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए जिससे कथा श्रवण के दौरान हुई किसी भी त्रुटि का परिमार्जन हो सके। उन्होंने बताया कि 5 जनवरी को इसी विधि-विधान के साथ अनुष्ठान पूर्ण होगा।

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