जिला सिवनी में अवैध प्लाटिंग का खुला खेल
*नागपुर रोड पर कुकुरमुत्तों की तरह फैल रही अवैध कॉलोनियां, कलेक्टर की नाक के नीचे करोड़ों का घोटाला राजस्व को पहुँचा रहें नुकसान*
दैनिक रेवांचल टाईम्स – सिवनी, जिला सिवनी में अवैध प्लाटिंग का कारोबार कुकुरमुत्तों की तरह फैलता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा गोरखधंधा जिला प्रशासन और जिले के मुखिया कलेक्टर की नाक के नीचे खुलेआम चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए नजर आ रहे हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला नागपुर रोड, गोपिका मॉल के सामने का है, जहां एक अबैध कालोनाइजर और ठेकेदार द्वारा कई एकड़ कृषि भूमि पर बिना डायवर्सन, बिना वैधानिक अनुमति और बिना किसी मूलभूत सुविधा के अवैध प्लाटिंग कर दी गई। न तो भूमि का वैध परिवर्तन कराया गया, न ही नगरपालिका से कोई अनुमति ली गई।
कॉलोनाइजर के द्वारा बनाई जा रही कॉलोनी में न सड़क, न स्ट्रीट लाइट, न ट्रांसफार्मर, न जल निकासी, न बिजली-पानी की सुविधा और न ही एनपीटीसी/नगरपालिका नक्शा पास — इसके बावजूद धड़ल्ले से प्लाट काटकर भोले-भाले नागरिकों को बेच दिए गए। सवाल यह है कि जब नियमों की इतनी खुली धज्जियां उड़ाई जा रही थीं, तब प्रशासन कहां था?
सूत्रों की मानें तो इस अवैध प्लाटिंग में प्रशासनिक संरक्षण और ठेकेदारों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन होने के बावजूद आज तक न कोई कार्रवाई हुई और न ही किसी अधिकारी पर जिम्मेदारी तय की गई।
यह पूरा मामला न केवल राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का है, बल्कि भविष्य में यहां प्लाट खरीदने वाले लोगों के लिए भी गंभीर संकट खड़ा करने वाला है। अवैध कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव आगे चलकर कानून-व्यवस्था और जनसुविधा का बड़ा सवाल बनेगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
क्या जिला कलेक्टर को इस अवैध प्लाटिंग की जानकारी नहीं है?
या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
आखिर किसके संरक्षण में ठेकेदार इतने बेखौफ होकर कानून को ठेंगा दिखा रहा है?
अब देखना यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन नींद से जागता है या फिर यह अवैध प्लाटिंग का खेल यूं ही फलता-फूलता रहेगा। और कॉलोनाइजर को फ़ायदा और राजस्व का नुकसान रहेगा जारी