कहां क्रियान्वित हो रही नेहरू युवा केंद्र की गतिविधियां?

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युवाओं के नाम पर योजनाएं, ज़मीन पर सन्नाटा

रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले को तरह तरह नामों से जाना जाता हैं कभी महिस्मती नगरी तो कभी गोंडवाना जिला तो कभी मंडल मिश्र की नगरी ऐसे अनेको नामों से मध्य प्रदेश के मंडला जिले को जाना जाता रहा और वह दिन दूर नही है जब मंडला जिला अपना प्रदेश में नया नाम बनायेगा जहाँ पर भ्रस्टाचार घोटाले ग़बन रिश्वत लेने जैसे मामंले आये दिन सुर्खियों में बने रहते है जहाँ पर जिले को नई पहचान जल्द मिल जाएगी जहाँ केवल भ्रष्टाचार सरकारी धन की लूट सरकारी तंत्र बिना रिश्वत के काम न करना और जिला प्रसाशन का कोमे से बाहर न आना जहाँ कानून व्यवस्था बद से बत्तर हो जा रही है केवल इस जिले में रसूखदारो ने अपना कब्जा जमा लिया है और गरीबों की सुनने वाला कोई नही।
इस जिले में शासन की योजनाएं कागजों में तो चल रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा नेहरू युवा केंद्र को लेकर है, जिसे युवाओं को संगठित कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सवाल यह है कि यह केंद्र आखिर कर क्या रहा है और कहां कर रहा है?
नागरिकों का आरोप है कि नेहरू युवा केंद्र द्वारा संचालित गतिविधियों की कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। न बोर्ड पर विवरण, न वेबसाइट पर अद्यतन जानकारी और न ही गांव-गांव कोई ठोस गतिविधि दिखाई दे रही है। ऐसे में जनता पूछ रही है कि आखिर किस आधार पर इस केंद्र को सफल बताया जा रहा है?
गांवों में मंडल ही नहीं, गतिविधि कहां से होगी?
लोगों का कहना है कि नियमानुसार प्रत्येक ग्राम में महिला एवं पुरुष युवा मंडलों का गठन और उनका पंजीयन होना चाहिए, लेकिन अधिकांश गांवों में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। न नियमित बैठकें, न प्रशिक्षण, न खेलकूद, न सामाजिक अभियान—यानी युवा शक्ति पूरी तरह उपेक्षित है।

आख़िर कहाँ गया फंड ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नेहरू युवा केंद्र को शासन से कितनी राशि मिल रही है और उसका उपयोग किस मद में किया जा रहा है। यदि गतिविधियां दिखाई नहीं दे रहीं, तो फिर खर्च किस बात का हो रहा है? यह स्थिति सीधे-सीधे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को जन्म देती है।
जवाबदेही से भागता तंत्र

नागरिकों का आरोप है कि केंद्र से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं। सूचना मांगने पर गोलमोल जवाब दिए जाते हैं, जिससे संदेह और गहरा रहा है।
जनता की स्पष्ट मांग
अब जनता साफ शब्दों में मांग कर रही है।
नेहरू युवा केंद्र की सभी गतिविधियों का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाए
ग्रामवार गठित युवा मंडलों की सूची और पंजीयन जानकारी उपलब्ध कराई जाए
केंद्र को मिले फंड की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए लापरवाही और गड़बड़ी के दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो
नेहरू युवा केंद्र को वास्तव में सक्रिय कर युवाओं को विकास का भागीदार बनाया जाए ।
यदि समय रहते सच्चाई सामने नहीं लाई गई, तो यह साफ हो जाएगा कि युवाओं के नाम पर चल रही योजनाएं भी सिर्फ कागजी साबित हो रही हैं। जनता अब जवाब चाहती है—घोषणाएं नहीं, परिणाम।

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