मुख्यकार्यपालन अधिकारी को हटाने की मांग हुई तेज

जनपद पंचायत घुघरी में प्रशासनिक संकट

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रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले के तहसील मुख्यालय घुघरी स्थित जनपद पंचायत में इन दिनों प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और विकास कार्यों की ठप्प स्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जनपद पंचायत घुघरी की मुख्यकार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शुश्री भावना भात्रवंशी पर शासन द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता, लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के विरोध में जनपद अध्यक्ष सहित जनपद सदस्यों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है और अधिकारी को तत्काल हटाने की मांग की है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार जनपद पंचायत घुघरी में पिछले लगभग सात महीनों से विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प पड़े हुए हैं। शासन द्वारा ग्रामीण विकास, अधोसंरचना, रोजगार सृजन, भवन, पेयजल, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन मुख्यकार्यपालन अधिकारी की कथित उदासीनता और लापरवाही के चलते इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसका सीधा असर क्षेत्र के विकास और ग्रामीणों की जीवनशैली पर पड़ रहा है।जनपद अध्यक्ष और सदस्यों का आरोप है कि मुख्यकार्यपालन अधिकारी द्वारा न केवल शासकीय कार्यों में रुचि नहीं दिखाई जा रही है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया जाता है। जब जनपद सदस्य या अध्यक्ष विकास कार्यों की जानकारी लेने या योजनाओं की प्रगति के संबंध में चर्चा करने कार्यालय पहुंचते हैं, तो उन्हें उचित जानकारी नहीं दी जाती।
जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया है सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों पर अमल नहीं किया जाता। जिन प्रस्तावों को जनहित में स्वीकृत किया जाता है, वे महीनों तक फाइलों में दबे रहते हैं। अधिकारी द्वारा उन प्रस्तावों को आगे भेजने या आवश्यक स्वीकृति देने में अनावश्यक देरी की जाती है, जिससे विकास कार्य प्रारंभ ही नहीं हो पाते। 15वें वित्त आयोग और 5वें वित्त आयोग की राशि से होने वाले कार्यों को लेकर लगाए गए हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इन मदों से स्वीकृत निर्माण कार्यों पर भी जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। कई निर्माण कार्यों की फाइलें महीनों से लंबित हैं और मुख्यकार्यपालन अधिकारी द्वारा उन पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया जाता है। इसके कारण निर्माण एजेंसियों को सामग्री का भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे कार्य बीच में ही रुक गए हैं।
निर्माण एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने कार्य प्रारंभ करने के लिए सामग्री खरीदी, मजदूर लगाए और आंशिक कार्य भी पूर्ण किया, लेकिन भुगतान नहीं मिलने के कारण अब वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। भुगतान अटकने से न केवल ठेकेदारों को नुकसान हो रहा है, बल्कि मजदूरों को भी समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है। इससे क्षेत्र में असंतोष का माहौल बनता जा रहा है।
जनपद सदस्यों ने यह भी कहा कि वे बार-बार मुख्यकार्यपालन अधिकारी से विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट देने और लंबित कार्यों को शीघ्र शुरू कराने का अनुरोध करते रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। स्थिति यह है कि कई पंचायतों में सड़क, नाली, भवन और अन्य आवश्यक निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं या शुरू ही नहीं हो पाए हैं।
इन सभी आरोपों को लेकर जनपद अध्यक्ष और सदस्यों ने सामूहिक रूप से आवेदन में अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि मुख्यकार्यपालन अधिकारी को तत्काल जनपद पंचायत घुघरी से नहीं हटाया गया, तो वे मजबूरन धरना प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी, क्योंकि उन्होंने समय रहते समस्या के समाधान की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि जनपद पंचायत एक महत्वपूर्ण संस्था है, जिसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की योजनाएं लागू की जाती हैं। यदि इसी स्तर पर अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय नहीं होगा, तो विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यकार्यपालन अधिकारी का रवैया जनविरोधी है और वे न तो जनप्रतिनिधियों का सम्मान करती हैं और न ही जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देती हैं।
इस पूरे मामले ने घुघरी जनपद पंचायत में प्रशासनिक संकट को उजागर कर दिया है। कि विकास कार्य बंद होने से उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कहीं सड़कें जर्जर हालत में हैं, तो कहीं नालियों और जलनिकासी की समस्या बनी हुई है। भवन निर्माण और अन्य कार्य अधूरे होने से पंचायतों की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है।
अब सबकी नजर शासन और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के निर्णय पर टिकी हुई है। जनप्रतिनिधियों की मांग है कि मुख्यकार्यपालन अधिकारी को तत्काल हटाकर किसी सक्षम और संवेदनशील अधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि जनपद पंचायत घुघरी में विकास कार्यों को फिर से गति मिल सके।यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है, जिससे क्षेत्र की शांति व्यवस्था और विकास प्रक्रिया दोनों प्रभावित होने की आशंका है। जनपद पंचायत घुघरी में उपजे इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय कितना आवश्यक है।
इनका कहना है क़ि
में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को जबाब दे चुकी हूँ, ये एक छोटी सी चीज है आप जिस तरीके से प्रिंट करना चाहे कर सकते है।
शुश्री भावना भात्रवंशी
मुख्यकार्यपालन अधिकारी जनपद घुघरी मंडला

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