लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से सरेआम भेदभाव…..?
चुनिंदा पत्रकारों की पूछ परख बाकी की घोर उपेक्षा
प्रकाशित खबरों पर नहीं हो रही कोई कार्रवाई
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, मध्यप्रदेश के मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में आये दिन जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के द्वारा रसूखदारों और भ्रस्टो के इशारों पर सच्चाई उज़ागर करने वाले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता के साथ भेदभाव और उपेक्षा का सिलसिला लगातार गंभीर होता जा रहा है। कभी पत्रकारों के साथ अप्रिय घटनाएं सामने आ रही हैं, तो कभी झूठे मामलों में फंसाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके बावजूद सरकारी तंत्र में सुधार के कोई ठोस संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित योजना भवन में आयोजित एसआईआर से संबंधित बैठक में सामने आया, जहां कलेक्टर की उपस्थिति में पत्रकारों के साथ खुलेआम भेदभाव किया गया।
सूत्रों के अनुसार उक्त बैठक के लिए सभी मीडिया कर्मियों को समान रूप से सूचना नहीं दी गई। कुछ चुनिंदा पत्रकारों को ही बैठक की जानकारी दी गई, जबकि अनेक पत्रकारों को जानबूझकर अनदेखा किया गया। इस रवैये ने प्रशासन की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का कहना है कि यह व्यवहार न केवल पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सीधा आघात है।
बैठक के दौरान चाय वितरण में अपनाए गए दोहरे मापदंड ने भेदभाव को और उजागर कर दिया। कुछ को चीनी मिट्टी के कप में चाय परोसी गई, जबकि अन्य पत्रकारों को डिस्पोजल कप थमाकर औपचारिकता पूरी की गई। इस घटनाक्रम को पत्रकारों ने अपने सम्मान के साथ खुला खिलवाड़ बताया।
वही इस पूरे मामले को लेकर पत्रकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि जनहित से जुड़ी खबरें प्रकाशित होने के बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा कोई परिणामकारी कार्रवाई नहीं की जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि मीडिया द्वारा उजागर की गई समस्याओं पर भी प्रशासन मौन साधे हुए है, तो जवाबदेही आखिर किसकी बनती है?
मामले में जनसंपर्क विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। पत्रकारों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते शासन-प्रशासन ने हस्तक्षेप कर ऐसे भेदभावपूर्ण रवैये पर रोक नहीं लगाई, तो यह स्थिति पत्रकारिता और लोकतंत्र—दोनों के लिए घातक सिद्ध होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है।