एक दिवसीय शतरंज प्रतियोगिता के आयोजन में प्रदेश के अनेक जिलो से पहुंचे प्रतिभागी विजेताओं को हुआ सम्मान

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रेवांचल टाईम्स – मण्डला। मप्र राज्य स्तरीय शारीरिक दिव्यांग शतरंज संघ मंडला एवं जीएच राय सोनी मेमोरियल मंडला के तत्वाधान में एक दिवसीय शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन इंडोर स्टेडियम मंडला में किया गया। यहां पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से शतरंज के खिलाडिय़ो ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। मां सरस्वती के तैल्यचित्र पर माल्यार्पण दीप प्रज्वालन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमति ज्योति जायसवाल, श्रीमति संजुलता सिंगौर, शतरंज संघ के जिला अध्यक्ष ने खिलाडिय़ो से परिचय प्राप्त करते हुए प्रतियोगिता में चाल चलकर शुभारंभ कराया। वहीं पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा, जिला खेल अधिकारी विकास भी प्रतियोगिता में सहभागिता दर्ज कराने पहुंचे और खिलाडिय़ो से मुलाकात की व शतरंज प्रतियोगिता के आयोजन के बारे में सचिव प्रकाश वंशकार से चर्चा की। पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने कहा कि खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना और उन्हें मंच उपलब्ध कराना खेल विभाग का दायित्व है बीते वर्षो में अनेक खिलाडिय़ो ने राष्ट्र और प्रदेश स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है उन्होंने आयोजकों को बधाई दी। वहीं प्रतियोगिता के समापन अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा, नगर पालिका उपाध्यक्ष अखिलेश कछवाहा, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमति ज्योति जायसवाल, श्रीमति संजुलता सिंगौर, वनवासी विकास परिषद जिलाध्यक्ष कैलाश डेहरिया, जिला खेल अधिकारी विकास खड़ाकर, श्रीमति रश्मि पाठक एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमति इंदु उपाध्याय पहुंची जिनका शतरंज संघ के पदाधिकारियों ने पुष्पमाला से स्वागत किया। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा ने कहा कि जिले के इंडोर स्टेडियम में बौद्धिक खेल शतरंज को समर्पित एक भव्य और अनुकरणीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसने पूरे जिले ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी खासा उत्साह पैदा कर दिया। इस प्रतियोगिता में दूर-दराज से आए सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और अपने बौद्धिक कौशल धैर्य और रणनीतिक सोच का शानदार प्रदर्शन किया। यह आयोजन न सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता था बल्कि बौद्धिक विकास अनुशासन और खेल भावना का जीवंत उदाहरण भी था।
वहीं जिला खेल अधिकारी विकास सर ने शतरंज प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य युवाओं और बच्चों में बौद्धिक खेलों के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें मोबाइल व डिजिटल लत से दूर कर रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना है। शतरंज जैसे खेल न केवल सोचने-समझने की क्षमता को मजबूत करते हैं बल्कि निर्णय लेने की शक्ति धैर्य और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। इस प्रतियोगिता में ओपन कैटेगिरी विजेता श्रेयांश मिश्रा, अंडर 11 में आशुतोष जायसवाल, अंडर 7 में महिमा चौधरी, अंडर 13 में अर्पिता श्रीवास, अंडर 50 रफिक अहमत इंदौर, अंडर 19 अनुराग जबलपुर, अंडर 50 में अभिषेक जबलपुर, महिला टीम में संजुलता सिंगौर विजेता, अरूनव उपाध्याय रहे। खेल डॉक्टेक्टर प्रकाश वंशकार और एम्पायर कमेटी के संचालक विवेक विश्वकर्मा इंदौर मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं इस प्रतियोगिता में मप्र राज्य स्तरीय शारीरिक दिव्यांग शतरंज संघ के जिला अध्यक्ष उपाध्यक्ष श्रीमति संजुलता सिंगौर, सचिव भास्कर गरयार, सहसचिव कैलाश डेहरिया, सदस्य लकी गरयार, राखी वंशकार, अंकित श्रीवास की मुख्य भूमिका रही। शतरंज संघ के अध्यक्ष ने बताया कि प्रतियोगिता को विभिन्न आयु वर्गों में विभाजित किया गया था ताकि हर वर्ग के खिलाडिय़ों को समान अवसर मिल सके। अंडर-10, अंडर-14, अंडर-18 और ओपन कैटेगरी में मुकाबले कराए गए। प्रत्येक वर्ग में खिलाडिय़ों ने कड़ी प्रतिस्पर्धा दिखाई। कई मुकाबले इतने रोमांचक रहे कि दर्शक भी अंत तक अपनी नजरें बिसात से नहीं हटा पाए। आखिरी चाल तक चलने वाले मुकाबलों में खिलाडिय़ों की एकाग्रता और मानसिक मजबूती देखने लायक थी। इंडोर स्टेडियम में प्रतियोगिता के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। समय-सीमा के भीतर चालें चलने के नियम शांत वातावरण और निर्णायकों की सतर्क निगरानी ने प्रतियोगिता को और भी पेशेवर स्वरूप दिया। निर्णायक मंडल में अनुभवी शतरंज प्रशिक्षक और वरिष्ठ खिलाड़ी शामिल रहे। जिन्होंने निष्पक्षता के साथ हर मुकाबले का संचालन किया। प्रतियोगिता में भाग लेने आए खिलाडिय़ों ने आयोजन की सराहना की। प्रतिभागी अशुतोष जायसवाल का कहना था कि मंडला जैसे जिले में इतने बड़े स्तर पर शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन होना बेहद सराहनीय है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है और बाहर से आए खिलाडिय़ों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर भी मिलता है। कई युवा खिलाडिय़ों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आगे राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए प्रेरित होते हैं। अभिभावकों में भी इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा गया। बच्चों के साथ पहुंचे माता-पिता ने कहा कि आज के दौर में जब बच्चे ज्यादातर समय मोबाइल और वीडियो गेम्स में व्यस्त रहते हैं ऐसे में शतरंज जैसे खेल उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आयोजकों से भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने अपील की। प्रतियोगिता के दौरान इंडोर स्टेडियम में खेल प्रेमियों और दर्शकों की भी अच्छी खासी मौजूदगी रही। दर्शक खिलाडिय़ों की हर चाल पर नजर रखे हुए थे और रोमांचक मुकाबलों के दौरान तालियों से खिलाडिय़ों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। आयोजन के समापन अवसर पर पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। विजेता और उपविजेता खिलाडिय़ों को ट्रॉफी, मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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