अमरवाड़ा: प्राथमिक शाला तेंदनी माल की प्रधानपाठिका पर अभद्रता के आरोप, ग्रामीणों ने कहा- ‘महिला स्टाफ के नाम पर होती है मनमानी

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रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा|​छिंदवाड़ा विकासखंड अमरवाड़ा के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक शाला तेंदनी माल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। ग्रामीणों की शिकायतों का अंबार लगने के बाद जब मीडिया की टीम हकीकत जानने स्कूल पहुंची, तो प्रधानपाठिका शीला संग्रामिया ने सुधार करने के बजाय मीडियाकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में केवल महिला स्टाफ होने का फायदा उठाकर मनमानी की जा रही है।
*​मीडिया से बदसलूकी, सवालों पर भड़कीं प्रधानपाठिका*
​ग्रामीणों की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर जब मीडिया कर्मी स्कूल परिसर पहुंचे, तो प्रधानपाठिका शीला संग्रामिया अपना आपा खो बैठीं। बातचीत के दौरान उनका लहजा न केवल गैर-जिम्मेदाराना था, बल्कि उन्होंने कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ बदतमीजी भी की। यह व्यवहार उस समय देखने को मिला जब ग्रामीण स्कूल की बदहाली और बच्चों की पढ़ाई को लेकर सवाल उठा थे।
*​ग्रामीणों की व्यथा: ‘पुरुष शिक्षक न होने से हम बेबस’*
​ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि शाला में तीनों शिक्षिकाएं महिला हैं। इसका अनुचित लाभ उठाते हुए वे अक्सर ग्रामीणों को स्कूल में प्रवेश करने से रोकती हैं और पुरुष शिक्षक न होने का हवाला देकर अपनी मनमानी चलाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि
​स्कूल में पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।
*​मध्यान्ह भोजन (MDM) कभी भी निर्धारित मेनू के अनुसार नहीं बनाया जाता*
​बच्चों के भविष्य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
​जांच के बाद भी स्थिति जस की तस
​हैरानी की बात यह है कि इस शाला की शिकायतें पहले भी हो चुकी हैं। मीडिया में खबर आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दो दिनों तक स्कूल का निरीक्षण भी किया था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की जांच का शिक्षिकाओं पर कोई असर नहीं पड़ा और उनके व्यवहार व स्कूल के संचालन में रत्ती भर भी सुधार नहीं आया है।
​”हम चाहते हैं कि हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा और पोषण मिले, लेकिन यहां तो शिकायत करने पर ही विवाद खड़ा कर दिया जाता है। प्रशासन को इस ओर सख्त कदम उठाने चाहिए।” बताया जाता है कि नहीं आक्रोशित ग्रामीण, ग्राम तेंदनी माल
​अब देखना यह होगा कि विभाग की नाक के नीचे चल रही इस मनमानी पर उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं या फिर नौनिहालों का भविष्य इसी तरह अंधकार में धकेला जाता रहेगा।

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