मंडला नगर पालिका की घोर लापरवाही से मिट्टी में मिल रहा है ऐतिहासिक टाउन हॉल की शान
1925 की धरोहर आज प्रशासनिक निकम्मेपन की जीती-जागती बनी मिसाल

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, वर्षो पुराने या कहे अंग्रेजों के जमाने का टाउन हॉल आज अपनी दुर्दशा खुद व खुद ब्याय कर रहा है जहाँ जो एक समय शान हुआ करता है और इस टाऊन हाल में बड़े बड़े कार्यक्रम सम्पन्न हुआ करते थे जिसकी हालात आज बद से बत्तर होते जा रही जगह जगह से छ्प्पर में लगी लकड़ी सड़ चुकी हैं, खपरे गिर रहे है और जगह जगह जाले लगे हुए है मरम्मत के लिए तरस रहा हैं और इस हाल में अब चमगादड़ो का डेरा होने लगा है।
वही नगर की पहचान और गौरव का प्रतीक टाउन हॉल आज बदहाली की उस हद तक पहुँच चुका है, जहाँ से साफ़ दिखाई देता है कि नगर पालिका और जिम्मेदार अधिकारियों को न इतिहास से मतलब है, न जनता से।
रसेल मेमोरियल टाउन हॉल, जिसकी नींव 1924 में रखी गई और 1 मार्च 1925 को तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर जेम्स मे एस्कर द्वारा उद्घाटन किया गया था, आज कूड़े-कचरे, टूटी दीवारों और अव्यवस्था में दम तोड़ रहा है।
प्रशासन की शर्मनाक चुप्पी
यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सालों की लापरवाही, भ्रष्ट सोच और प्रशासनिक निकम्मेपन का नतीजा है। सवाल यह है कि
क्या नगर पालिका के जिम्मेदार अंधे हो चुके हैं?
क्या विरासत सिर्फ़ फाइलों में ज़िंदा रखी जाती है?
रखरखाव के नाम पर आए बजट कहाँ डकार लिए गए?
इतिहास के साथ अपराध
टाउन हॉल सिर्फ़ एक इमारत नहीं, बल्कि मंडला की सांस्कृतिक आत्मा है। इसकी बदहाली यह साबित करती है कि यहाँ हेरिटेज संरक्षण एक मज़ाक बनकर रह गया है। जिम्मेदार अफसरों ने इस धरोहर को ऐसे छोड़ दिया है जैसे यह उनकी नहीं, किसी अनाथ की संपत्ति हो।
जनता का सब्र जवाब दे रहा है
नगरवासी आक्रोशित हैं। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह स्पष्ट माना जाएगा कि प्रशासन जानबूझकर मंडला के इतिहास को मिटाने पर आमादा है। इस ऐतिहासिक टाउन हॉल को यादगार के रूप में बनाये रखने के लिए लापरवाह अधिकारी कर्मचारी ले ऊपर
तत्काल जांच बैठाई जाए
लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई हो
टाउन हॉल को हेरिटेज भवन घोषित कर विशेष बजट दिया जाए
अन्यथा यह मुद्दा अब सिर्फ़ खबर नहीं रहेगा, बल्कि जन आंदोलन का रूप लेगा।
प्रश्न साफ़ है —
वही मंडला की धरोहर बचाने वाला कोई है या सब कुर्सी बचाने और जेब भरने में लगे हुए हैं? अगर जल्द ही इस ऐतिहासिक भवन का मरम्मत कार्य नही किया जाता है तो वह जल्द ही केवल यादों के साथ साथ खंडहर में तब्दील हो सकता है और कभी न कभी अप्रिय घटना घट सकती हैं।