मंडला जिले में बाल श्रमिकों की भारी मांग…छोटी बड़ी दुकानों में कार्य कर रहे है बाल श्रमिक

जगह जगह देखें जा सकते है बाल श्रमिक मंडला जिले का श्रम विभाग कोमे में.....

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रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिला होने के साथ साथ पिछड़ापन व बेरोजगारी गरीबी के चलते आज नगर की छोटी मोटी दुकानों से लेकर ग्रामीण अंचलो तक बाल श्रमिक कार्य करते देखे जा सकते है। सरकार की जहां एक ओर मंशा है कि हर बच्चा स्कूल जाए कोई बच्चा छूट न पाएं वही शासन के नाकों तले शहर के सबसे रिहायशी इलाके में बाल श्रम का चलन जोरों पर हैं। पूरे मंडला शहर से लेकर जिले भर में बाल श्रम की मांग और चलन जोरों पर हैं। शहर की गली गली और कूचों में बाल श्रम देखने को आसानी से मिल सकता हैं। आज बाल श्रमिक होटलों में किराना की दुकान में हार्डवेयर के साथ साथ अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत हैं और मंडला जिले के सक्षम अधिकारी हांथ में हाथ धर कर के बैठे हुए हैं। न कोई जबाव देही न ही कोई जिम्मेदारी तो फिर सवाल यह उठता हैं कि आखिर मध्य
प्रदेश सरकार ने विभाग और विभागीय अधिकारी को आखिर किस लिए पद में बैठा रखा हैं।

कम दाम पर मिल जाते हैं बाल श्रम
चुकीं मंडला आदिवासी बैगा बाहुल्य जिला हैं, जहां पर शिक्षा का अभाव और जागरूकता की कमी होने की वजह से आसनी से बाल श्रम इस जिले के उपलद्ब होते हैं इसलिए भी जिलें में बाल श्रम का चलन बहुत ही आसानी से उपलब्ध होता हैं। बाल श्रम की अधिकता होने की वजह से दुकानदारों और प्रतिष्ठान मालिकों को अच्छा खासा रुपया बचत के आता हैं। इसीलिए भी जिले में बाल श्रम की मांग और उपलब्धता आसानी से देखने को मिल जाती हैं।

शिक्षा और जागरूकता की कमी तो फिर योजनाएं क्या सिर्फ दिखावा मात्र…

जहां एक ओर शासन की मंशा साफ सुथरी जाहिर हैं कि शहर से लेकर गांव तक कोई बच्चा छूट न पाए हर बच्चा स्कूल जाए वही जिले में बाल श्रम की मांग और आसानी से उपलब्धता होने की वजह से शासन की मंशा पर सवाल खड़े होना लाज़मी बनता हैं। जिसमें शिक्षा की कमी और जागरूकता की कमी की वजह से शासन की जो योजनाएं दिखावा मात्र के लिए हैं।

जिम्मेदार मौन प्रतिष्ठान दुकानदार होटल मालिक हो रहें हैं मालामाल

जिले में बेहताशा और बढ़ते बाल श्रम को देख कर आसानी से समझा जा सकता हैं कि जिले में बैठे जिम्मेदार कितने सजग हैं..?? और अपने पद की जिम्मेदारी को कितनी सजगता और जागरूकता से निभा रहे हैं।
वही जब इस बात की जानकारी मंडला जिले के बाल श्रम अधिकारी डी.के. जैन से लेनी चाही तो जैन साहब के फोन की घंटी तो बजती रही पर साहब के द्वारा फ़ोन को रिसीव नहीं किया गया।

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